आदर्श गांव की गोद में पीलंजी

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सुशील कुमार

नई दिल्ली,सरकार ने सबका साथ,सबका विकास नीति को फलीभूत करने के उद्देश्य से सांसद आदर्श गांव योजना की शुरुआत की है जिसके तहत हर सांसद को 2019 तक तीन गांवों को गोद लेकर उस गांव में विकास की एक ऐसी संरचना तैयार करनी है जिससे वह गांव आदर्श गांव की कतार में खड़ी दिखे । इस योजना के रुपरेखा के तौर पर बुनियादी सुविधाओं के विकास से लेकर सामुदायिक विकास की बात बड़े साफ तौर पर की गई है ।

सांसद आदर्श गांव योजना की जमीन पर हम पड़ताल करने पहुंचे नई दिल्ली संसदीय क्षेत्र के पीलंजी गांव, जिसे नई दिल्ली की सांसद मीनाक्षी लेखी ने सांसद आदर्श गांव योजना के तहत गोद लिया है । वैसे हम बताते चलें कि नई दिल्ली संसदीय क्षेत्र में 64 गांव हैं । एनडीएमसी की चाहरदीवारी में आने वाला यह गांव सरोजनी नगर मार्केट के एक मुहाने पर मौजूद है और यहां से पीएम निवास का फासला मात्र 3 किलोमीटर है । लगभग पचास हजार की आबादी वाला गुर्जर जाति बहुल पीलंजी गांव सीएम अरविंद केजरीवाल का विधानसभा क्षेत्र भी है । मकान से आने वाला किराया ही इनकी आय का मुख्य स्त्रोत है । लेकिन इन सबसे दीगर पीलंजी आज भी अपनी बुनियादी सुविधाओं से बुरी तरह मरहुम है और गांव के अंदर कोई भी सामुदायिक विकास की कोई भी लकीर को तलाशना आसान नहीं है । शायद इसी मुख्य वजह से सांसद मीनाक्षी लेखी ने इस गांव को आदर्श गांव बनाने के लिए गोद लिया है । सांसद के आदर्श गांव के सपने और उस सपने के साकार होने के बाबत इस गांव के लोगों से हमने पड़ताल की ,जिससे हम आपको रुबरु कराएंगे ,लेकिन हम एक बात जरुर बताना चाहेंगे कि गांव के लोगों ने एकस्वर से बताया कि सांसद मीनाक्षी लेखी हमारे गांव में हमेशा आती रहती हैं मगर हमारे एमएलए अरविंद केजरीवाल जीतने के बाद अभी तक एकबार भी नहीं आए । चलिए मिलवाते हैं लोगों की राय के जरिए गांव पीलंजी से ।

पीलंजी गांव के युवा और बीजेपी नई दिल्ली ग्रामीण क्षेत्र के अध्यक्ष प्रमोद कहते हैं कि सासंद ने 64 गांवों में हमारे गांव को आदर्श गांव बनाने का फैसला लिया, उससे हमें खुशी तो हुई मगर सबसे बड़ी बात यह हमारे सांसद ने गांव के हालातों और हमारी जरुरतों पर गौर फरमाया । सच तो यह था कि पिछले साठ सालों से हमारे गांव की जरुरतों पर किसी ने ध्यान नहीं दिया और हम अपने हालातों के साए में जीने को मजबूर थे । सुना है कि आदर्श गांव बनाने के लिए रुपरेखा तैयार कर ली गई है, एस्टिमेट भी बन गया है । सासंद के प्रयास से कुछ दिनों पहले युवाओं को रोजगार पैदा करने के उद्देश्य से हमारे गांव में स्किल डेवलपमेंट के लिए एलएण्टी,रिलायंस जैसी प्राईवेट कंपनियों ने कैंप भी लगाया था । ऐसी कोशिशों से तो लगता है कि हमारे गांव का आदर्श गांव बनने का सालों पुराना साकार होने वाला है ।

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गांव के दूसरे और गंभीर स्वभाव के युवा श्रीवत्स कहते हैं कि हमारी पीढ़ी गांव को आदर्श बनते हुए देखना चाहती है । लेकिन सबसे पहले हमारे गांव की बुनियादी समस्याओं का समाधान होना चाहिए । हमारे गांव की पहली बुनियादी समस्या है सीवर की । कोई तीस-पैंतीस साल पहले गांव में केवल 184 परिवार रहते थे और आज हमारे गांव की जनसंख्या लगभग 50 हजार हो गई है । सीवर उसी समय की डली हुई है । जबतक सीवर की समस्या हल नहीं होती है तबतक सड़क बनाने का कोई फायदा नहीं है । गांवों में अंदर जाकर देखिए, सर के उपर से बिजली के तार जा रहे हैं । पानी आता है लेकिन कब आएगा, यह पता किसी गांव वालों को नहीं । लगता है कि हम सिर्फ हालातों के रहमोकरम पर जिंदगी जिए जा रहे हैं । हमारे इन बुनियादी समस्याओं का समाधान हो जाए तो हमारा गांव आदर्श बन जाएगा। अभी हमने आदर्श गांव बनने की सिर्फ खबर सुनी है , इस खबर की हकीकत जमीन पर देखने को नहीं मिली है । जब हकीकत में हमारा गांव आदर्श बन जाएगा तभी हमें खुशी होगी । हां यह बात जरुर है कि हमारी सांसद मीनाक्षी लेखी गांव में हमेशा आती रहती हैं लेकिन हमारा विधायक अरविंद केजरीवाल जीतने के बाद कभी हाल पूछने नहीं आया,उसे तो अपनी पार्टी के बवालों से ही फुरसत ही नहीं तो कहां से लेगा हमारी सुध ।

60 की उम्र पार कर चूके महराज सिंह कहते हैं कि आदर्श गांव बनाने के फैसले से खुशी तो होना बहुत स्वभाविक है मगर 60 सालों में हमने गांव के विकास की बात सिर्फ सुनी है जमीन पर कभी देखा नहीं । हमारे अनुभव से लगता है कि अबतक जितने भी नेता हमारे गांव में आए हैं वो सिर्फ बात करते रहे हैं गलियों में कोई काम तो किया नहीं । नेताओं को चाहिए कि पहले हमारे गांव का मतलब तो समझें फिर तब तो विकास या आदर्श गांव की बात करेंगे । पहले मूलभूत जरुरतों को तो पूरा करें फिर आदर्श गांव की बात करें । सीवर का हाल खास्ता है, पानी का हाल बेहाल है ,बिजली की नंगी तारें आसमान को ढंक लिया-क्या इसे ही गांव कहते हैं ।

70 के उम्र में प्रवेश कर चूके जिले राम कहते हैं कि हमारे लिए सबसे बड़ी बात है कि पहली बार हमारे गांव के बारे में किसी ने सोचा । जिलेराम को पूरी उम्मीद है कि 2016 तक हमारा गांव देश के आदर्श गावों की कतार में खड़ा दिखेगा और यह सपना जरुर पूरा होगा क्योंकि हमारी सांसद इस काम को धीरे-धीरे आगे बड़ा रही हैं और पीएम मोदी की नजर भी बनी हुई है । जिलेराम के अनुसार सिर्फ बुनियादी सुविधाओं से ही हमारा गांव आदर्श गांव नहीं बनेगा बल्कि हमारे आदर्श गांव में सारी सुविधाएं होंगी । थोड़ा धैर्य रखना पड़ता है । जबतक कागजों कागजों का सारा काम खत्म नहीं होगा तबतक काम की शुरुआत कैसे होगी ।

गांव के दूसरे सज्जन कालू प्रधान कहते हैं कि हमें भी बहुत खुशी हुई जब हमारे गांव को आदर्श गांव बनाने की घोषणा हुई,लेकिन अभी तक कुछ हुआ ही नहीं तो यह खुशी अब खत्म भी होने लगी है । गांव का न तो अपना कोई स्कूल है, न कोई हॉस्पीटल है और न ही कोई सामुदायिक भवन । अगर ये सारी चीजें नहीं हुईं तो किस बात का आदर्श गांव बनेगा ।

70 की उम्र पार कर चूके बुद्धराम कहते हैं कि हम तो सिर्फ तीसरी तक ही पढ़ सके लेकिन हमारी आने वाली पीढ़ियां आगे की पढ़ाई करे,गांव में हमारा कोई स्कूल नहीं होने के कारण हम आगे पढ़ न सके । गांव में कोई उठने-बैठने के लिए जगह नहीं है । कोई छोटी सी भी डिस्पेंसरी का बी इंतजाम नहीं है । साफ-सफाई का भी कोई इंतजाम नहीं है । जबतक गांव में साफ-सफाई का इंतजाम नहीं होगा तबतक कोई भी गांव को आदर्श कैसे माना जाएगा । हमारे यहां सीवर से पानी ऐसे ही सड़कों पर बहता रहता है । सीवर को तो ठीक करना सबसे पहले जरुरी है ।

गांव के ही एक नई पीढ़ी राजेश को इस बात की खबर नहीं है कि पीलंजी को आदर्श गांव योजना में शामिल किया गया है । लेकिन उसकी राय है आदर्श गांव का मतलब सांस्कारिक गांव होना चाहिए और उसी लिहाज से इस गांव का विकास किया जाना चाहिए ।

गांव में कोई तीस-पैंतीस साल से रहते आ रहे पंडित देवदत शर्मा कहते हैं कि सीवर के साथ साथ बिजली के तारों को भी अंडरग्राउंड करना चाहिए । जिस तरह से बिजली की तारें गांव में फैली हैं उससे हमेशा जानमाल का खतरा बना रहता है ।

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