मनीष अग्रहरि
प्रदेश के 74 जनपदों में ब्लाक प्रमुख चुनाव की घोषणा सोमवार को कर दी गई है। 5 फरवरी को नामाकन 6 फरवरी को नाम वापसी व 7 फरवरी को मतदान होगे और उसी दिन चुनाव के नतीजे घोषित कर दिए जायेगें। सत्ता पक्ष और विपक्ष के लिए यह चुनाव प्रतिष्ठा से जुड़ गया है। जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में प्रदेश में 60 सीटें सपा ने जीती थी, सत्ताधारी दल होने के नाते सपा में प्रत्याशी बनने के लिए सर्वाधिक होड़ है।
बता दे कि प्रदेश के 819 ब्लाकों में यह चुनाव होने है। पंचायती राज सिस्टम में ब्लाक प्रमुख की भूमिका बहुत ही अहम होती है। यह पद जिला पंचायत अध्यक्ष के बाद सबसे महत्वपूर्ण होता है। लिहाजा सभी लोग सत्ता से जुड़ी पार्टी के ही प्रत्याशी बनना चाहते है। समाजवादी पार्टी के लिए प्रत्याशी का चयन एक मुश्किल भरी प्रक्रिया है।जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव में पार्टी इसके गंभीर नुकसान झेल चुकी है। इन चुनावों में पार्टी में खासा असंतोष फैल गया था, जिसके बाद पार्टी के कई विधायको को बाहर का रास्ता तक देखना पड़ा था।
समाजवादी पार्टी के सामने एक बार फिर चुनौती है कि वह ब्लाक प्रमुख चुनावों में अपना बेहतर प्रदर्शन करें। उधर बहुजन समाज पार्टी ने भी ब्लाक प्रमुख चुनावों में अपनी विजय पताका फहरानें के लिए कमर कस चुकी है। इसके पीछे 2017 का विधान सभा चुनाव को देखा जा रहा है। यह चुनाव विधान सभा चुनाव में खासा असर डाल सकता है।एैसे में जाहिर है कि जिला पंचायत सदस्य एवं जिला पंचायत अध्यक्ष की भाति अब ब्लाक प्रमुखी का चुनाव भी पूरे बाहुबल के साथ ही लड़े जाएगे। ये बात और है की पिछले दिनों हुए जिला पंचायत चुनाव में कई प्रत्याशी ऐसे भी जीते हैं जो ठीक से शपथ तक नहीं ले सकते। फ़र्रुख़ाबाद की ज़िला पंचायत अध्यक्षा और विधायक की पत्नी सगुना कठेरिया को शपथ दिलाने के लिए जब बुलाया गया तो मैडम हिन्दी भी नहीं पढ़ पाईं। पास में बैठे सगुना जी के बेटे ने शपथ पत्र मैडम की जगह पढ़ दिया और मैडम हो गयी ज़िला पंचायत अध्यक्ष। यूपी में इससे बड़ा मज़ाक़ क्या होगा?
