संपादक की कलम से

0
968

प्रधानमंत्री मोदी  मेड इन इंडिया की बात कर रहे हैं तो कई विशेषज्ञ मेड इन इंडिया की बजाय मेक इंडिया की वकालत कर रहे हैं, लेकिन मेरी राय है कि मेक इंडिया या मेड इन इंडिया का सपना तब पूरा हो सकता है जब हम मेड इन विलेज, और मेड विलेज की बात करें। अब आप कहेंगे कि मेड इन विलेज क्यों? मेड इन विलेज इसलिए क्योंकि हमारे पास बहुत बड़ा बाजार है जिसपर विदेशी कंपनियां नजर गड़ा के बैठी हुई हैं, जो चीजे गांवों में सहजता से मिलती थीं, अब वो शहरी बाजारों में या होटलों में वैरायटी या दुर्लभ चीजों के रूप में पेश की जाती है। पैकेंजिंग के मास्टर लोग उससे पैसे कमाते हैं और हमारे किसानों के उत्पादों का कोई पूछवईया नहीं है। अगर हम मेड इन विलेज को बढावा देंगे तो वही उत्पाद शहरों में बेचकर गांव को लोगों को रोजगार दे सकते हैं। इससे शहरों पर दबाब कम होगा और ग्लोबल दुनिया में जो शहरों की चकाचौंध आगंतुकों के मन में बसाना अर्थात विश्वस्तरीय शहर बनाना चाहते हैं, इन पर जनसंख्या का दबाव कम करना चाहते हैं उस लक्ष्य में भी कामयाबी मिलेगी। इसलिए मुझे लगता है कि मेक विलेज अर्थात गांव गढने की परंपरा विकसित की जाये, वहीं बुनियादी सुविधाओं का विकास हो तो हमारा मेड इन इंडिया का लक्ष्य भी पूरा होगा और मेक इंडिया का भी। इसलिए प्रधानमंत्री जी बिना बजट दिए मॉडल विलेज बनाने का सपना देखने से न तो मेक इंडिया का सपना पूरा होगा और न ही मेड इन इंडिया का। जरा इस पर गौर फरमाईये और गांव पर पैसा खर्च कीजिए तभी हम सबका साथ और सबका विकास का लक्ष्य पा सकते हैं। इनका हांथ उनके साथ और हर हाथ शक्ति और हर हाथ तरक्की का लक्ष्य भी तभी पूरा होगा जब हमारा हाथ दूसरे के साथ जुड़कर मुटठी बंधे और गांव इस काम में सहयेागी हो सकते हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here