कमलेश कुमार सिंह
हाजीपुर: जैसे भारत को एक विकासशील देश कहा जाता है, वैसे ही इसके गांव भी बदलाव के लिए अग्रसर दिख रहे हैं. यानी गांव विकासशील होते दिख रहे हैं. नये साल के आगमन पर गौसपुर इजरा गांव की बदलती तसवीर को समझाते हुए रिटायर शिक्षक राम अवधेश सिंह कहते हैं, अब गांव, गांव कहां रहा है. अब तो यहां तमाम सुविधाएं उपलब्ध हैं. गांव के मुहाने के चौक पर दुकानों की कतार में तमाम जरुरतों के समान आसानी से मिल जा रहे हैं. खाने-पीने के समान से लेकर आधुनिक कपड़ व मोबाइल तक लगभग सबकुछ. कुछ वर्ष पहले तक ऐसी चीजों को खरीदने के लिए हमें हाजीपुर जाना पडता था. बिजली व सडकों का हाल तो बेहतर हो ही चुका है. सभी के हाथों में मोबाइल, घरों के छत पर डिश टीवी के एंटिना तो आम बात है.
तरक्की पसंद गांव..खेती से दूर होते लोग
हां, इन सब के बीच खेती से लोग दूर होते गए. अब जो बुजुर्ग हैं, वे ही खेती का थोड़ा काम कर रहे हैं. इक्का -दुक्का युवा नकदी या आधुनिक फसलों की खेती करते दिख सकते हैं. युवा पढ़ने व रोजगार के लिए बड़े शहरों की ओर पलायन कर गये हैं. सही मायनों में कहें तो राज्य के अधिकतर गांव में युवा कम और ज्यादा बुजुर्ग बच गये हैं. उनकी बातों से साफ जाहिर है कि गांव की तसवीर भले ही बदली हो, लेकिन शिक्षा और स्वास्थ्य के हालात कमोबेश पुराने जैसे ही हैं. कमोबेश ऐसी तसवीर पूरे सूबे की गांवों की है. गांव की महिलाएं शराबबंदी से काफी खुश हैं. कुछ महिलाओं ने हंसते हुए कहा, नीतीश कुमार कुछ करै न करै लेकिन दारू बंद कराके सबसे बढिया काम कलै. नयका साल में खुबे तरक्की होतै. वहीं जनेश्वर पासवान कहते हैं, कथी के नया साल और पुराना साल. कमैबइ त खबइ न त भूखे सूते पडतइ. इ सब त बड़का पैसा वाला लोग के फायदा है. हमर बाबूओ कमअलइ खलइ अ मर गेलइ.
हालांकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार स्मार्ट गांव बनाने की बात कर रहे हैं. मुख्यमंत्री ने कहा है कि बिहार के सभी गांवों को स्मार्ट गांव बनाने के लिए पहल शुरू कर दी गई है. सूबे की सभी गांवों के हर घर तक पक्की सड़क का जाल बिछाया जाएगा. यहां सभी घरों में नल का जल और शौचालय की व्यवस्था होगी. इसके साथ ही हर घर में बिजली भी होगी. नीतीश कुमार ने कहा कि ये हो जाने से बिहार का हर गांव स्मार्ट हो जाएगा. मुख्यमंत्री ने एक बार फिर दोहराया कि अगले साल तक बिहार के हर घर को बिजली से जोड़ दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि उनका सपना है कि बिहार का एक घर भी ऐसा न हो जिसके दरवाजे तक पक्की सड़क न हो, घर में नल का जल हो, घर में शौचालय हो और बिहार के हर घर में 24 7 बिजली हो.
क्या कहते हैं आकड़े
आइए अब सूबे की गांवों के कुछ तसवीरों का आंकडों के सहारे परखने की कोशिश करें. राज्य के लगभग 24 हजार गांव पूर्ण विद्युतीकृत हो गए. रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड की ओर से जारी ताजा रिपोर्ट के अनुसार राज्य के 40 हजार 483 गांवों के आंशिक हिस्से में बिजली थी. इन गांवों को पूरी तरह विद्युतीकृत करने का काम दसवीं पंचवर्षीय योजना से शुरू किया गया. 31 दिसंबर 2016 को जारी रिपोर्ट के अनुसार राज्य में आंशिक विद्युतीकृत 40 हजार 483 गांवों में से 23 हजार 759 गांवों को पूरी तरह विद्युतीकृत कर दिया गया. मौजूदा वित्तीय वर्ष 2016-17 के नौ महीने में 6850 गांवों को पूरी तरह रोशन कर दिया गया है. कुल गांवों का लगभग 60 फीसदी विद्युतीकृत हो चुका है. अब 16 हजार 724 गांवों को पूरी तरह विद्युतीकृत करना बाकी है. अगले एक साल के भीतर इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए बिजली कंपनी ने लक्ष्य तय किया है. वहीं राज्य सरकार अगले चार सालों में 7,52,863 शौचालय निर्माण का लक्ष्य निर्धारित की है. लगभग 40 हजार शौचालय निर्माणाधिन हैं. चालू वित्तीय वर्ष में तीन लाख शौचालय निर्माण किया जाना है. हरेक निर्माण में केंद्र सरकार चार हजार और राज्य सरकार आठ हजार सहयोग राशी प्रदान करती है. यह अलग बात है कि इतनी राशी में शौचालय का निर्माण कैसे होगा. नये साल में गांव की इस सकारात्मक बनती छवी आगे कैसे दिखेगी यह तो अभी तय किया जाना बाकी है।
