झारखंड में पंचायत चुनाव के लिए अभी करना होगा इंतजार, उम्मीद साल नहीं जाएगा बेकार

आलोक रंजन


रांची: झारखंड में पंचायत चुनाव को लेकर उहापोह की स्थिती समाप्त हो रही है। ये तो तय है कि नियत समय पर चुनाव न कराया जा सका लेकिन निकट भविष्य में पंचायत चुनाव संपन्न होने की संभावना जरूर बन रही है। यानी भले विलंब हुआ हो और उसके पीछे कई कारण रहे हैं लेकिन चुनाव होगा ये तय है। कुछ इसी तरह का जवाब गोमिया से आजसू विधायक लंबोदर महतो द्वारा ने ध्यानाकर्षण प्रश्न के जरिए राज्य सरकार से पंचायत चुनाव को लेकर मांगी गई जानकारी से मिला।
विधायक के सवाल
आजसू विधायक डॉ. लंबोदर महतो ने यह विषय उठाते हुए कहा कि पंचायत चुनाव के प्रतिनिधियों का कार्यकाल समाप्त हो गया है जिससे कई तरह की विकास योजनाएं बाधित हो रही हैं। काम सही से नहीं हो पा रहा है, पंचायत चुनाव आखिर सरकार कब तक करायेगी?
यानी विधायक लंबोदर महतो यह जानना चाहते ​थे कि आखिर प्रदेश में पंचायत चुनाव कब तक होगा।
ग्रामीण विकास मंत्री आलम गीर आलम का सदन में विधायक के सवाल पर जवाब आया झारखंड में पंचायत चुनाव जल्द होगी। इस बाबत मंत्री ने झारखंड विधानसभा के बजट सत्र में अपनी बात रखी। उल्लेखनीय है कि आलमगीर आलम ग्रामीण विकास के साथ ही संसदीय कार्य मंत्री भी हैं। वहीं, राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी जिले के DC को आगामी 22 मार्च तक परिसीमन पूरा करने का आदेश दिया है।

विधायक ने मानदेय का भी उठाया सवाल
आजसू पार्टी के विधायक डॉ. लंबोदर महतो ने आज विधानसभा में आज पंचायत प्रतिनिधियों के बकाया मानदेय का मामला उठाया। सरकार की ओर से इस संबंध में ठोस कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है। संसदीय कार्यमंत्री आलमगीर आलम ने लंबोदर महतो के प्रश्न के उत्तर में बताया कि बोकारो जिले में सेवारत पंचायत समिति के सदस्यों के मानदेय भुगतान के लिए राशि आवंटित कर दी गयी है। उन्होंने यह भी बताया कि निर्धारित प्रावधान के उनके लिए टी.ए. और डी.ए. के लिए भी राशि आवंटित की गयी है। पंचायत समिति के सदस्यों द्वारा प्राप्त दावा के अनुसार उन्हें टीए और डीए की राशि का भुगतान किया जाता है।

लंबोदर महतो ने बताया कि पूरे करीब 40 माह से राज्य भर के जिला परिषद सदस्य, मुखिया, पंचायत समिति सदस्य और वार्ड सदस्य को अब तक मानदेय नहीं मिल रहा है। मानदेय भुगतान नहीं होने का असर जिला एवं पंचायत प्रतिनिधियों पर देखा जा सकता है।

मालूम हो कि जिला परिषद सदस्य को 1500, मुखिया को 1000, पंचायत समिति सदस्य को 750 एवं वार्ड सदस्य को 250 रुपए का मानदेय तय किया गया है।


क्या कहा मंत्री ने
संसदीय कार्य एवं ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम ने सदन को बताया कि राज्य में पंचायत चुनाव को लेकर तैयारी शुरू हो गयी है। परिसीमन, मतदाता सूची में मतदाताओं के नाम जोड़ने और सुधारने की प्रक्रिया भी शुरू हो गयी है। इसके पूरा होते ही पंचायत चुनाव की तारीखों का एलान हो जायेगा। यानी इस तरह से उन्होंने पंचायती राज व्यवस्था के जरिए चुन कर आने की बाट जोह रहे लोगों को भरोसा दिलाया कि भले देरी हुई है लेकिन राज्य में इस साल पंचायत चुनाव हो जायेंगे।
उल्लेखनीय है कि राज्य में त्रिस्तरीय पंचायत का कार्यकाल गत जनवरी 2021 के प्रथम सप्ताह में ही समाप्त हाे गया। नया चुनाव नहीं हाे पाने की वजह से त्रिस्तरीय पंचायत राज के सभी निर्वाचित पद विघटित हाे गए। वैसे ताे कोविड-19 की वजह से झारखंड में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव समय पर नहीं हाे सके। लेकिन चुनाव आयुक्त का पद रिक्त रहने की वजह से भी चुनाव की तैयारियों पर असर पड़ा है। कहा जा सकता है कि राज्य निर्वाचन आयुक्त का पद रिक्त होने की तकनीकी वजहों से पंचायत चुनाव तय समय पर नहीं हो पाया। लेकिन हेमंत साेरेन सरकार द्वारा राज्य के पूर्व मुख्य सचिव डीके तिवारी को राज्य का नया निर्वाचन आयुक्त नियुक्त किये जाने के बाद कामकाज में तेजी आई। इस तरह से झारखंड में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव का रास्ता साफ हुआ। इसके पश्चात निर्वाचन आयोग ने पंचायतों का आरक्षण, परिसीमन व मतदाता सूची के प्रकाशन जैसा काम शुरू किया।
परिसीमन को लेकर आपत्ति या सुझाव आगामी 9 मार्च और जिला स्तर पर इसका निष्पादन 16 मार्च तक करने की तिथि निर्धारित की गयी है। इसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग के स्तर पर वेरिफिकेशन 17 और 18 मार्च को किया जायेगा।
वर्ष 2015 में 4402 पंचायतों में चुनाव हुआ था, लेकिन इस बार करीब 4398 पंचायतों में ही चुनाव हो सकता है. हालांकि, अंतिम घोषणा परिसीमन के बाद ही तय हो पायेगा. बता दें कि झारखंड बनने के बाद वर्ष 2010 में पहला पंचायत चुनाव हुआ था, वहीं दूसरी पंचायत वर्ष 2015 में हुआ था. इस बार तीसरी पंचायत चुनाव होनी है.
विकास कार्य नहीं होगी बाधित
त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था के निर्वाचित पदाें के विघटित हाेने के बाद राज्य सरकार की ओर से त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था बनाए रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की। इसमें सरकार की ओर से तीनाें स्तर पर कार्यकारी समिति की वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। तीनाें स्तर पर कार्यकारी समितियाें में निवर्तमान निर्वाचित प्रतिनिधियों काे भी शामिल किया गया है।

इसके अलावा सरकारी कर्मी और सरकारी अफसर भी इन समितियाें में शामिल किए गए, ताकि समितियाें द्वारा खर्च पर निगरानी और नियंत्रण सही रहे। कार्यकारी समितियाें के गठन की वजह से त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था के आधार पर विकास कार्याें के लिए राशि मिलती रहेगी। इससे विकास कार्य बाधित नहीं हाेगा।
परिसीमन के बाद बदलेगी स्थिती
वर्ष 2015 में 4402 पंचायतों में चुनाव हुआ था, लेकिन इस बार करीब 4398 पंचायतों में ही चुनाव हो सकता है। हालांकि, अंतिम घोषणा परिसीमन के बाद ही तय हो पायेगा। गौरतलब है कि झारखंड बनने के बाद वर्ष 2010 में पहला पंचायत चुनाव हुआ था, वहीं दूसरी पंचायत वर्ष 2015 में हुआ था। इस बार तीसरी पंचायत चुनाव होनी है।

पंचायत प्रतिनिधियों की स्थिति :
जिला परिषद सदस्यों की संख्या : 545
पंचायत समिति सदस्य : 5,423
ग्राम पंचायत (मुखिया) : 4,402 (वर्तमान में 4398)
ग्राम पंचायत सदस्य : 54,330
कुल : 64,700

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *