आगामी पंचायत चुनाव में सक्रिय भूमिका निभाना चाहती है भाजपा

अमरनाथ झा

पटना: वैसे तो बिहार में दलीय आधार पर पंचायत चुनाव में भागीदारी और उम्मीदवार उताड़ने की परंपरा नहीं रही है ​लेकिन आगामी पंचायत चुनाव में राजनीतिक दल पंचायत चुनाव में भले ही दलीय आधार पर भागीदारी न करें लेकिन अपने पार्टी के पक्ष में और पार्टी समर्थित उम्मीदवारों के पक्ष में जम कर गोलबंदी करने की फिराक में लगे हुए हैं। यहां तक राज्य के सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल भारतीय जनता पार्टी प्रदेश में होने वाली पंचायत चुनावों में भी दिलचस्पी ले रही है। प्रदेश भाजपा की चुनाव आयोग सेल ने इसे लेकर बकायदा बैठक की है जिसमें केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद भी शामिल हुए और जिला स्तर तक इसबारे में समितियां बनाने का सुझाव दे डाला। बिहार में पंचायत चुनाव परंपरा से गैर-दलीय आधार पर लड़े जाते हैं। भाजपा पहली पार्टी है जिसने पंचायत चुनावों में सक्रियता निभाने की पहल की है।
उल्लेखनीय है कि ग्रामीण स्तर पर दलीय आधार पर विभाजन को रोकने और सामुदायिक भावना के विकास का अवसर प्रदान करने के विचार से लोकनायक जयप्रकाश नारायण और उस दौर के दूसरे राजनीतिक विचारकों ने इसे प्रोत्साहित करने की कोशिश की थी। बिहार में तो पंचायती राज संस्थाएं बहुत पहले बनने लगी थी, पर साठ के दशक में जब पूरे देश में पंचायती राज संस्थाएं बनने लगी तो देशभर में गैर-दलीय आधार पर चुनाव कराने पर ही जोर रहा। हालांकि कम्यूनिस्ट पार्टियों ने अपने राजनीतिक विचारों के प्रसार के लिहाज से पंचायती राज संस्थाओं में भी दलीय आधार पर हिस्सेदारी की जरूरत मानी। धीरे-धीरे दूसरी पार्टियों की हिस्सेदारी भी शुरु हुई। पर बिहार में पंचायतें अभी तक दलीय दलदल से दूर रहे हैं। लेकिन इसबार भाजपा परोक्ष तरीके से पंचायत चुनावों में सक्रिय होने कोशिश में है।
पंचायत चुनावों में संभावित उम्मीदवारों को कानूनी सहायता प्रदान करने के माध्यम से सक्रिय होने की कोशिश में भाजपा है। यह विचार केन्द्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद का है। उन्होंने प्रदेश भाजपा से अनुरोध किया है कि जिला स्तर पर अधिवक्ताओं की एक टोली या सेल बनाई जाए तो पंचायत चुनाव में उम्मीदवार बनने के इच्छुक लोगों को कानूनी सहायता प्रदान करे। उन्होंने इस सेल से जुड़ने वाले अधिवक्ताओं को सलाह दिया कि पंचायत कानूनों का बारीकी से अध्ययन करें। विभिन्न गाइडलाइनों की ताजा जानकारी रखें ताकि जरूरत पड़ने पर तत्काल कानूनी सहायता दी जा सके।
प्रदेश भाजपा कार्यालय में 28 फरवरी को भाजपा के चुनाव सेल की बैठक हुई। प्रसाद इसमें मुख्य अतिथि थे। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष डॉ संजय जायसवाल ने कहा कि पंचायत चुनाव के दलीय आधार पर होने की स्थिती अभी साफ नहीं है, पर संभावित उम्मीदवारों को कानूनी सहायता तो दी जा सकती है। उन्होंने आरक्षित वर्ग की वैसी जातियों के बीच से नेतृत्व उभारने की कोशिश करने की जरूरत बताई जिनमें नेतृत्व का अभाव है और उन्हें सत्ता में हिस्सेदारी नहीं मिल पाती।
बैठक में प्रदेश भाजपा के कई नेता, राज्य सरकार के मंत्री, विधायक शामिल हुए। सांसद व पूर्व उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी ने कहा इन पंचायतों में इस बात का प्रचार कराया जाना चाहिए कि लालू-राबड़ी राज में 23 वर्षों तक पंचायत चुनाव नहीं कराए गए। 2001 में जब चुनाव कराया गया तो एकल पदों पर दलित–आदिवासियों को आरक्षण नहीं दिया गया जो उनका हक था। उन्होंने पंचायत चुनाव ईवीएम के माध्यम से कराने का फैसला करने के लिए राज्य सरकार की सराहना की।
कुछ इसी तरह की बैठक और चर्चा पटना के सदाकत आश्रम में विगत दिनों कांग्रेस पार्टी में भी हुई थी। कांग्रेस पार्टी के ज्यादातर नेता इस बात को लेकर उत्सुक दिखे कि पंचायत चुनाव में पार्टी को जमीनी जनाधार मजबूत करने के लिए इच्छुक प्रत्याशियों के साथ खड़ा होना चाहिए ताकी जमीन पर पार्टी को मजबूत किया जा सके।

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