संतोष कुमार सिंह
देश के प्राथमिक स्कूल से लेकर उच्च विद्यालयों तक दाखिले के स्तर पर सुधार हुआ है। बच्चे अब पहले की तुलना में स्कूल ज्यादा जाते हैं। आरटीई लागू होने के बाद बुनियादी सुविधाओं और संस्थागत ढांचे का भी विकास हुआ है। लेकिन इसका मतलब यह कदापि नहीं है कि शिक्षण के स्तर, और बच्चों में सीखने की गुणवत्ता बेहतर हुई है। ‘प्रथम’ और ‘असर’ केंद्र द्वारा लगातार कई वर्षों से जारी की जा रही रिपोर्ट से हमें इस दिशा में सोचने को मौका मिला है। विमर्श की प्रक्रिया आगे बढ़ी है। लेकिन यह विमर्श अभी सालाना जारी होने वाले रिपोर्ट और उस पर बौद्धिक विमर्श तक ही सीमित रहा है। आम जन इस तरह की चर्चा से कमोबेश दूर ही रहे हैं। यह विमर्श गांव—गांव तक पहुंचे इसके लिए ‘प्रथम’ और ‘असर’ केंद्र ने एक अभियान शुरू किया है, इस अभियान का नाम दिया गया है ‘लाखों में एक’। इस अभियान के जरिए भारत के एक लाख गांवों और शहरी बस्तियों में प्राथमिक शिक्षा की स्थिति को बेहतर बनाने के लिए लोगों को जागरूक किया जाएगा। इस अभियान की शुरूआत प्रथम की ब्रांड अंबासडर वहीदा रहमान द्वारा जारी किये गये संदेश और लाखों में एक वेबसाईट से हुआ है।
“लाखों में एक” अभियान सरकारी संस्थाओं, गैर-सरकारी संगठनों, कॉरपोरेट और फाउंडशेनों की सामूहिक पहल से जनवरी 2016 तक भारत के एक लाख गांवों व समुदायों तक पहुंचेगा I इसके अंतर्गत गांव व समुदाय वासियों को अपने शैक्षिक स्तर का आकलन कर उन्हें खुद ही स्तर का आकलन कर उन्हें खुद की अपने पहल से समुदाय की शैक्षिक स्थिति में बदलाव लाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। पहले चरण में संबंधित संस्थाएं विभिन्न स्तर पर सरकारी संस्थाओं व राज्य के नीति निर्धारकों को प्रेरित करेंगे कि वो प्राथमिक विद्यालयों के छात्रों को पढ़ने, लिखने गणित के स्तर को सुधारने के लिए और उनकी दक्षता में सुधार के लिए जरूरी कदम उठाएंगी। इस अभियान के बाद के चरणों में देश भर के नागरिकों के साथ मिलकर ‘पढ़ता—लिखता गांव’का निर्माण किया जाएगा। शैक्षणिक वर्ष 2016-17 की शुरुआत तक ज़्यादा से ज़्यादा जिला प्रशासन और राज्य सरकारों को शैक्षणिक स्तर में सुधार के लिए इस अभियान के जरिए तैयार किया जाएगा।
भारत में लगभग सभी बच्चों को स्कूल में नामांकन देने में सफलता हासिल की है। लेकिन दाखिले के बावजूद अब जरूरत इस बात की है कि इस तरह से पहल किया जाये कि नागरिकों, सरकार, विद्यालय एवं समुदाय का ध्यान शैक्षिक स्तर के सुधार पर केंद्रित हो। अगर माता-पिता, शिक्षक, समुदाय और सरकार साथ मिलकर काम करेंग तो बदलाव आयेगा।I प्रथम और असर की टीम इस साल देश भर में में ‘लाखों में एक’ अभियान चलायेगा।
‘असर’ और ‘प्रथम’ का व्यापक प्रभाव
असर के 10 वर्ष और ‘प्रथम’ के 20 वर्ष पूरे हो चुके हैं। इस दौरान प्रथम और असर की रिपोर्ट ने हर बच्चे स्कूल पहुंचे और सही तरीके से सीखें, स्कूल नामांकन और शैक्षिक उपलब्धि की स्थिति को अपने सालाना रिर्पोटों के जरिए लोगों को जमीनी हालात को समझाने, उसका समाधान ढूंढने की दिशा में लोगों को सोचने के लिए प्रेरित किया है। हालांकि अगले वर्ष असर की रिपोर्ट सिर्फ महाराष्ट्र व पंजाब के लिए जारी की जाएगी।
“असर” सेंटर की निदेशक रूक्मिनी बनर्जी कहती है कि अब तक हम प्राथमिक शिक्षा की स्थिति के आंकड़े के जरिए सरकार और जनता को यह सूचित करते रहे हैं कि जमीनी स्थिति क्या है। अब हमारी कोशिश है कि आम लोगों को भी अभियान से जोड़ा जाये, गांव के लोगों को इस अभियान से जोड़ा जाये। यदि प्रत्येक गांव से एक व्यक्ति भी मिलता है तो एक लाख लोग वोलंटियर के रूप में अभियान से जुड़ जायेंगे। स्थानीय स्तर पर ही लोगों को भविष्य के सर्वे के लिए तैयार किया जाएगा। ग्रामीणों के जुड़ने से सरकार पर दबाव होगा और कहा जा सकेगा कि ग्रामीण चाहते हैं कि शिक्षा की स्थिति सुधरे।


