दलगत आधार पर पंचायत चुनाव की मांग पर अड़ा भाकपा माले, बिहार बंद आज

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चंदन कुमार

एक तरफ भाकपा माले इस मांग पर अडी है की राज्य में पंचायत चुनाव दलिय आधार पर कराये जाएँ, वहीँ दूसरी ओर चुनाव आयोग ने निर्देश दिया है की कोई भी प्रत्याशी राजनीतिक दलों के नाम पर वोट मांगते हैं तो या झंडा का इस्तेमाल करते हैं तो उनपर आचार संहिता का डंडा चलेगा। राज्य निर्वाचन आयोग ने आदर्श आचार संहिता को लेकर दिशा-निर्देश जारी कर उन भावी प्रत्याशियों को आगाह कर दिया है, जो इस बार पंचायत चुनाव में मैदान में उतरने की तैयारी में हैं। दरअसल बिहार में होने वाला पंचायत चुनाव दलीय आधार पर नहीं होगा। ऐसे में प्रत्याशियों को भी राजनीतिक दलों से दूरी बनाकर रखनी होगी। अगर कोई किसी राजनीतिक दल के नाम पर चुनाव प्रचार करता है तो उसे आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन माना जाएगा। बावजूद इश्के भाकपा माले ने राज्यव्यापी बंद बुलाकर राज्य में पंचायत चुनाव दलिय आधार पर कराये जाने को लेकर चक्का जाम करेगी। पार्टी ने डालिए आधार पर चुनाव, भाड़े पर खेती करने वाले किसानो के पंजीकरण, क्रेडिट कार्ड उपलब्ध करने, शोचालय की अनिवार्यता समाप्त करने जैसी मांग को लेकर रविवार को बंद बुलाया है। इस बंद में अखिल भारतीय किसान महासभा भी शामिल है।

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राज्य निर्वाचन आयोग ने आदर्श आचार संहिता को लेकर जारी किये गए दिशा-निर्देश में कहा है कि अभ्यर्थी या उनके समर्थकों द्वारा किसी भी सरकारी या सरकार के उपक्रमों के भवन, दीवार तथा चहारदीवारी पर पोस्टर सूचना चिपकाने पर भी रोक रहेगी। वहां किसी तरह का नारा नहीं लिखा जाएगा। बैनर-झंडा लगाने पर भी पाबंदी होगी। मतदान केंद्र के 100 मीटर के दायरे में चुनाव प्रचार भी आचार संहिता का उल्लंघन माना जाएगा। राज्य में अप्रैल मई में पंचायत चुनाव होना है। आचार संहिता के दौरान मंत्रियों के दौरों पर भी नजर रहेगी। मंत्रियों के सरकारी दौरों के कार्यक्रम को चुनाव प्रचार अभियान के साथ नहीं जोड़ा जाएगा और सरकारी तंत्र या कर्मियों का उपयोग चुनाव प्रचार अभियान में करने पर पाबंदी होगी। चुनाव की अधिसूचना जारी होने के साथ ही मंत्री या अन्य अधिकारी किसी भी रूप में वित्तीय अनुदान की घोषणा अथवा उसके लिए आश्वासन नहीं देंगे। किसी भी प्रकार की परियोजनाओं या योजनाओं का शिलान्यास नहीं करेंगे। सड़कों के निर्माण, पेयजल सुविधाओं आदि की व्यवस्था का कोई आश्वासन नहीं देंगे। शासन, सार्वजनिक उपक्रमों आदि में कोई ऐसी तदर्थ नियुक्ति, जो किसी उम्मीदवार के पक्ष में वोट को प्रभावित करे, नहीं करेंगे। सांसदों–विधानमंडल के सदस्यों के लिए सांसदों और विधायकों को किसी पंचायत क्षेत्र में जहां चुनाव होना है स्वेच्छानुदान राशि, जनसंपर्क निधि से कोई अनुदान स्वीकृत नहीं किया जाएगा। किसी की सहायता या अनुदान का आश्वासन भी नहीं देना होगा। किसी योजना का शिलान्यास या उद्‌घाटन भी नहीं करना होगा।

गौरतलब है कि आयोग ने दस चरणों में चुनाव के कार्यक्रम का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेज दिया है। पहले चरण का मतदान 24 अप्रैल से शुरू होगा। सरकार की हरी झंडी मिलते ही अधिसूचना जारी कर दी जाएगी। इसके साथ ही पूरे राज्य में आदर्श आचार संहिता प्रभावी होगी। ऐसे में यह देखना होगा की भाकपा माले के इस मांग पर लोगों का क्या रुख होता है या चुनाव आयोग की तरफ से क्या बदलाव किये जाते हैं।

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