कोरोना के बाद देश में बढ़ी बेरोगारी की दर, भारत में 15 प्रतिशत ग्रेजुएट बेरोजगार

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मीनाक्षी पाल

भले ही आज भारत विश्व की पांचवी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन हो गया है। लेकिन बेरोजगारी की समस्या आज भी भारत के लिए एक गंभीर मुद्दा बना हुआ है। ‘श्रम बल सर्वेक्षण’ के 2021-2022 के आंकड़ो का हवाला देते हुए अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी द्वारा 20 सिंतबर को ‘स्टेट ऑफ वर्किंग इंडिया’ 2023 नाम से एक रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट बताती है कि कोविड के बाद में भारत में बेरोज़गारी की दर में गिरावट आई है। लेकिन इसके बावजूबद वर्तमान में 15 फ़ीसदी से अधिक स्नातकधारी नौकरी से वंचित है। देश में 25 वर्ष से कम आयुवर्ग वाले 42 फीसदी स्नातक बेरोजगारी से जूझ रहे है। वहीं उच्च शिक्षित समूह के भीतर व्याप्त बेरोजंगारी दर में बड़ा अंतर है। स्नातकों को उनकी प्रतिभा और कौशल के अनूरूप रोजगार मिलने पर भी प्रश्नचिन्ह लगा हुआ है।

विकास और रोजगार एक ही सिक्के के दो पहलू होते है। माना जाता है कि देश का विकास होने पर रोज़गार के अवसर भी बढ़ते हैं लेकिन मौजूदा आंकड़े कुछ और ही तस्वीर पेश कर रहे है। रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2004 से 2017 के बीच प्रतिवर्ष लगभग 30 लाख नौकियां सृजित हुईं। वहीं 2017 से 2019 के बीच देश में 50 लाख नौकरियों का सृजन हुआ। लेकिन 2019 के बाद देश में नियमित वेतन वाले रोज़गारों में कमी आई। इसका प्रमुख कारण कोविड को माना जा रहा है, जिसके चलते 2023 में वैश्विक स्तर पर लगभग लाखों कमर्चारयों को नौकरी छोड़ने के लिए बाध्य होना पड़ा। कोविड के दुष्प्रभावों से भारत भी अछूता न रह पाया। कोविड के कारण देश में 2020- 2021 के बीच 22 लाख नौकियां कम हुईं। वहीं कोविड के कारण असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले 52 लाख लोगों अपनी नौकरियां गंवानी पड़ी।

रिपोर्ट बताती है कि भारत में नियमित वेतन वाली नौकरियों में मात्र छह प्रतिशत नौकरियों में ही कर्मचारियों को स्वास्थ्य बीमा अथवा दुघर्टना लाभ बीमा जैसी सुविधाएं दी जाती है। चिंता का विषय है कि अधिक्तर युवाओं को आशा के अनुरूप नौकरियां न मिलेन पर वह वैकल्पिक बेरोजगारी को अधिक पसंद कर रहे हैं। वहीं देश में रोजगार-डेटा तैयार करने वाली निजी संस्था, ‘सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी’ द्वारा जारी रोपोर्ट में पाया गया कि जून, 2023 में दौरान बेरोजगारी दर 8.45 प्रतिशत पर जा पहुंची है, जबकि मई में यह आंकड़ा 7.86 फीसदी रहा। रिपोर्ट में पाया गया कि हरियाणा, राजस्थान, बिहार, झारखंड तथा जम्मू-कश्मीर में बेरोज़गारी दर सबसे अधिक रही, वहीं दिल्ली भारत का सर्वाधिक बेरोज़गार केंद्रशासित प्रदेश है।

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