
लखनऊ: किसी भी देश की आर्थिक और सामाजिक व्यवस्था सुधारनी हो तो उसे गांव अथवा पंचायत स्तर पर कार्य करने होते है। पंचायत व्यवस्था सुधार हेतु उत्तर प्रदेश की योगी सरकार भी नई नीतियों पर कार्य कर रही है। इस क्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पंचायती राज विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार स्मार्ट गांवों की अवधारणा को प्राथमिकता दे रही है और ग्राम पंचायतों के कामकाज में पारदर्शिता लाने का प्रयत्न कर यही है। ।उन्होंने ग्राम सचिवालय, सामान्य सेवा केन्द्र, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, उत्सव भवन, जन संबोधन प्रणाली, सीसीटीवी कैमरे और सौर स्ट्रीट लाइट जैसी पहलों से ग्रामीण जीवन में आई व्यापक सुधार पर प्रकाश डाला।
सीएम योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिया कि पंचायत सहायकों के लिए 15 दिवसीय कंप्यूटर प्रशिक्षण अनिवार्य किया जाए और इन डिजिटल प्लेटफार्मों का अधिकतम उपयोग गांव, ब्लॉक और जिला पंचायतों के काम की निगरानी के लिए किया जाए। जलाशयों के पुनरुद्धार और अमृत सरोवरों के रखरखाव जैसे कार्यों में जनभागीदारी को मजबूत करने का आह्वान करते हुए सीएम ने कहा कि संबंधित अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि सीवेज का पानी अमृत सरोवर या अन्य तालाबों में न पहुंचे और गांव के बाहर उचित जल निकासी की व्यवस्था की जाए।
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सीएम ने ग्रामीण क्षेत्रों में एकल-उपयोग प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध पर भी जोर दिया और अधिकारियों को प्लास्टिक प्रबंधन इकाइयों के निर्माण को सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। सीएम योगी ने गोबरधन योजना की प्रगति की समीक्षा की, जिसमें अधिकारियों ने बताया कि 75 में से 73 जिलों में 115 गोबरधन संयंत्र पूरे हो चुके हैं, जिनमें से दो इकाइयां निर्माणाधीन हैं। सीएम योगी ने बताया कि राज्य सरकार स्मार्ट गांवों की अवधारणा को प्राथमिकता दे रही है, जिसके तहत ग्रामीण निवासियों के जीवन को आसान बनाने के लिए गांवों में ग्राम सचिवालय, सामान्य सेवा केंद्र, सार्वजनिक वितरण प्रणाली की दुकानें, उत्सव हॉल, सार्वजनिक संबोधन प्रणाली, सीसीटीवी कैमरे और सोलर स्ट्रीट लाइट जैसी सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं।

