रबी फसलों के उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए योगी सरकार ने बनाई विषेश रणनीति, 448 लाख मिट्रीक टन उत्पादन का रखा लक्ष्य

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मीनाक्षी पाल

यूपी में फसलों की सघनता बढ़ाने के लिए किसानों को साल में दो या तीन फसल की बुवाई करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। खरीफ सीजन में खाली पड़े खेतों में तोरिया अथवा लाही की बुवाई के लिए कृषकों को जागरुक किया जाएगा। खरीफ की फसलें बाजारों में बिक्री के लिए तैयार है। इसके बीच योगी सरकार ने आगामी रबी सीजन में खाद्यान्न तथा तिलहन फसलों के उत्पादन और उत्पाकता को बढ़ावा देने के लिए रणनीति तैयार कर ली है। साल 2022 में रबी सीजन में 136.06 लाख हेक्टेयर जमीन फसलों से आच्छादित थी जिससे 42783 लाख मीट्रिक टन का उत्पादन हुआ था। वहीं, साल 2023 में रबी सीजन में खाद्यान्न एवं तिलहन की फसलों के अंतर्गत 134.85 लाख हेक्टेयर क्षेत्र पर बोआई और 448.66 लाख मीट्रिक टन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। इस सीजन में रबी की फसलों के उत्पादन के लिए 428.77 लाख मीट्रिक टन एवं तिलहन उत्पादन के 19.90 लाख मिट्रिक टन (खाद्यान्न एवं तिलहन के कुल उत्पादन 448.66 लाख मीट्रिक टन) के लक्ष्य के सापेक्ष गेहूं, जो, मक्का, जौ, चना, मटर, मसूर, राई सरसों, तोरिया, अलसी फसलों के लिए अलग-अलग लक्ष्य भी निर्धारित किये गये है।
रबी उत्पादन और उत्पादक को बढ़ाने तथा उत्पादन लागत कम करने लिए साथ-साथ सरकार कृषिकों की आय बढ़ाने के लिए रणनीति तैयार कर रही है। सफसलों की सघनता बढ़ाने के लिए सरकार किसानों को साल में दो या तीन फसल की बुवाई के लिए प्रोत्साहित कर रही है। खरीफ में खाली पड़े खेतों में तोरिया अथवा लाही की बुवायी के लिए जागरूक किया जा रहा है। तो वहीं गन्ने से खाली होनो वाले खेतों में जल्दी पकने वाली अरहर से खाली खेतों में देरी की दशा में बोई जाने वाले गेहूं की प्रजातियों की बुवाई को सरकार प्रोत्साहित कर रही है।
देवरिया, कुशीनगर, गोंडा, बलरामपुर, बहराइच, श्रावस्ती, बलिया, सिद्धार्थनगर, महाराजगंज, आजमगढ़, बस्ती, बाराबंकी, अयोध्या, सीतापुर खीरी और जौनपुर, मक्का की खेती होती है, वहां सरकार संकर मक्का की खेती के लिए किसानों को जागरूक किया जा रहा है। इसी तरह उत्पादकता में वृद्धि के लिए न्यूनतम उत्पादकता वाले ब्लॉक के संबंध में खास रणनीति भी तैयार की जाएगी।

नियोजित प्रयासों से उत्पादकता में होगी वृद्धि

भारत में गेहूं का सबसे ज्यादा उत्पादन उत्तर प्रदेश में होता है। जलवायु भिन्नताओं, संसाधनों की कमी, कृषि निवेशों के असंतुलित प्रयोग तथा उन्नत तकनीक का पूरा लाभ न लेने के कारण प्रदेश में गेहूं की उत्पादकता पंजाब एवं हरियाणा की अपेक्षा कम है। प्रदेश के विभिन्न जनपदों की विभिन्न फसलों की उत्पादकता में भी भारी अंतर है। उत्पादकता वृद्धि के लिए न्यूनतम उत्पादकता वाले ब्लाक,न्याय पंचायत के सम्बन्ध में भी समुचित रणनीति बनाकर त्वरित क्रियान्वयन सुनिश्चित कराने हेतु जनपद स्तर पर उत्पादकता बढ़ाने के लिए विभिन्न फसलों की ब्लाक,न्याय पंचायतवार उत्पादकता को आधार मानकर योजनायें बनाकर सघन पद्धतियों को लागू करने की योजना है।

सिंचाई के लिए तैयार किये जाए नहर रोस्टर

फसलों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए क्षेत्रीय अनुकूलता तथा उपलब्ध संसाधनों के आधार पर उनका चयन करके कृषि की उन्नत प्राविधिकी का प्रयोग करके समुचित रणनीति तैयार की गई है। उत्तर प्रदेश ही नहीं, पावर कारपोरेशन, सिंचाई विभाग एवं नलकूप विभाग को स्पष्ट दिशा निर्देश दिये गये है। फसल उत्पादन के समय बिजली की आपूर्ति, नहरों में रोस्टर के अनुसार पानी चलने, सरकारी नलकूपों को कार्यरत रखने के आदेश दिए गए है। बीज शोधन के बाद बीज की बुआई हेतु कृषकों को प्रेरित किया जाए। सूक्ष्म पोषक तत्व का प्रयोग मृदा परीक्षण के उपरान्त करना बेहद लाभदायक होता है। ऐसे में इस पर विशेष बल दिया जाएगा।

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