अमितेश सिंह, वरिष्ट पत्रकार
गाजीपुर: बिहार में शराबबंदी क्या हुई बोर्डर पार कर दूसरे राज्यों में शराब के शौकीनों की भीड़ बढ़ने लगी। कोई झारखंड की ओर बढ़ रहा है तो कोई उत्तर प्रदेश की ओर। कुछ लोग तो ऐसे भी हैं जो सप्ताहांत पर दिल्ली में डेरा डाल दिए हैं ताकि नशे में झूमा जा सके। सस्ता होते प्याज और प्रतिबंध लगते शराब ने पीने वालों से शराब गिफट देने की बात भी सुनने को मिल रही है अर्थात आओगे तो एक बोतल लेते आना। इन प्रदेशों की सरकारें भी खुश है और शराब दुकानदार भी कि चलो बिहार में बहार है और शराब की क्या दरकार है वाली नीतिश सरकार की सोच का फायदा उन्हें मिलेगा। लेकिन बंदी की बयार अर्थात शराब पर प्रतिबंध लगाने की मांग अब उन राज्यों से भी उठने लगी है जो बिहार से सटे हुए है। कुछ ऐसा ही मामला उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में देखने को मिला है।

गाजीपुर के जमानियां क्षेत्र के कई इलाकों में शराब की दुकानों के खिलाफ ग्रामीण लामबंद हो रहे हैं।इन इलाकों में शराब की नई दुकाने खोलने का ग्रामीण एकजुट होकर विरोध कर रहे हैं। ग्रामीणों की मांग है कि जमानियां क्षेत्र के कई गांवों में नयी खोली गयी शराब की सरकारी दुकानों का आवंटन रद्द किया जाये। गहमर बारा क्षेत्र के कुतुबपुर एवं आसपास के ग्रामीण सरकार की मंशा पर सवाल खड़ा करते हुए शराबबंदी के लिए एकजुट हो रहे हैं। उनकी राय है कि किसी भी हालात में शराब की नयी दुकाने नहीं खुलने दी जाएंगी। इससे नयी पीढ़ि के खराब होने का खतरा है। शराब की दुकानों के खिलाफ एकजुट हो रहे ग्रामीणों को आशंका है कि बिहार से सटे इन गांवों में शराब की दुकाने खुलने से जहां शराब तस्करी को बढ़ावा मिलेगा वहीं इलाके में अपरा्धियों की ावाजाही से ग्रामीणों को समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। ग्रामीणों को शराब की दुकाने खुलने से गांवों के सामाजिक ताने—बाने पर दुष्प्रभाव पड़ने की भी आशंका है। ऐसें में ग्रामीण शराब की दुकाने खुलने का विरोध कर रहे हैं। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और आबकारी विभाग से शराब की सरकारी दुकाने न खोलने की गुहार लगाई है। इस मामले पर आबकारी विभाग की उदासीनता से लोगों के बीच रोष नजर आ रहा है। ग्रामीणों नें मांग पूरी न होने पर आंदोलन का मन बनाया है। स्थानीय ग्रामीण जमाल खान कहते हैं कि शराब दुकानदारों के लिए बिहार में शराब बंदी मौका बन कर आया है लेकिन हमें लगता है कि इससे हमारे आस पास शराब का कारोबार बढ़ेगा। जब बिहार में बंदी हो सकती है तो उत्तर प्रदेश में क्यों नहीं? हम इसके खिलाफ संघर्ष को तैयार हैं।
वही जिला आबकारी अधिकारी गाजीपुर राजेन्द्र कुमार का कहना है कि गांव के लोग गलत बात कर रहे हैं उन्होंने कुछ लोगों पर आरोप लगाते हुए कहा कि ये लोग दुकान में हिस्सेदारी और कमीशन चाहते थे लेकिन दुकान की निलामी सरकारी प्रक्रिया के तहत की गयी है, ये सरकारी नीति के तहत खोली जा रही दुकानें हैं और शराब की स्मगलिंग नहीं होगी क्योंकि दोनों तरफ पुलिस चौकियां हैं और उस ए रियालिटी में कड़ाई से इसका पालन किया जाएगा । साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि बिहार में शराब बंदी के बाद अवैध रूप से नकली शराब न बिक सके और नकली शराब पीने की वजह से कोई जनहानि न होने पाए इसके लिए बार्डर पर सरकारी दुकाने खोली गई है। ताकि नकली शराब पर रोक थाम लग सके।

