यह मध्य दिसंबर चल रहा है। गेहूं की फसल पहली सिंचाई के लिए तैयार है। ऐसे में सिंचाई की बेहतर विधि के लिए किसान भाई खेत में दोनों ओर से आड़ी तथा खड़ी नालियाँ प्रत्येक 15-20 मीटर पर बना लें। इन्हीं नालियों द्वारा बारी- बारी से क्यारियों में सिंचाई करें।
गेहूं के लिए सामान्यत नाइट्रोजन, स्फुर व पोटाश-4:2:1 के अनुपात में डालें। असिंचित खेती में 40:20:10, सीमित सिंचाई में 60:30:15 या 80:40:20, सिंचित खेती में 120:60:30 तथा देर से बुवाई में 100:50:25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर के अनुपात में उर्वरक दें। सिंचित खेती की मालवी किस्मों को नत्रजन, स्फुर व पोटाश 140:70:35 किलो ग्राम प्रति हेक्टेयर दें।
खेत के उतने ही हिस्से में यूरिया डाले जितने में उसी दिन सिंचाई की जा सके। जहाँ तक संभव हो यूरिया को समान मात्रा में डालें।सिंचाई समय पर, निर्धारित मात्रा में, तथा निर्धारित अवधि पर ही करें।
हूं की अगाड़ खेती में बीच क्षेत्र की काली मिट्टी तथा 3 सिंचाई की खेती में पहली सिंचाई बुवाई के तुरंत बाद, दूसरी 35-45
बालियाँ निकलते समय फव्वारा विधि से सिंचाई न करें अन्यथा फूल बिखर जाते हैं और इसकी वजह से झुलसा रोग हो सकता है। दानों में भी काला रोग लग जाता है व करनाल बंट तथा कंडुवा व्याधि के प्रकोप का डर रहता है।
गेहूं की फसल को पाले से बचाएं
पाले की संभावना होने पर इससे बचाव के लिए फसलों में स्प्रिंकलर के माध्यम से हल्की सिंचाई करें, थायो यूरिया की 500 ग्राम मात्रा का 1000 लीटर पानी में घोल बनाकर छिडक़ाव करें अथवा 8 से 10 किलोग्राम सल्फर पाउडर प्रति एकड़ का भुरकाव करें अथवा घुलनशील सल्फर 3 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिडक़ाव करें अथवा 0.1 प्रतिशत व्यापारिक सल्फ्यूरिक अम्ल गंधक का अम्ल का छिडक़ाव करें।
गेहूं की फसल को आवश्यक रूप से रखें खरपतवार विहीन
गेहूं फसल में मुख्यत: दो तरह के खरपतवार होते हैं- चौड़ी पत्ती वाले जैसे – बथुआ, सेंजी, दूधी, कासनी, जगंली पालक, जगंली मटर, कृष्ण नील, हिरनखुरी तथा संकरी पत्ती वाले-जंगली जई, गेहुँसा या गेहूं का मामा आदि।
किसान भाई अगर खरपतवार नाशक का उपयोग नहीं करना चाहते हैं तो डोरा, कुल्पा व हाथ से निंदाई-गुड़ाई 40 दिन से पहले अवश्य ही दो बार करके खरपतवार खेत से निकाल दें।
मानव संसाधन उपलब्ध न हो तो चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार के लिए 2,4-डी की 0.65 किलोग्राम या मेटसल्फ्यूरॉन मिथाइल की 4 ग्राम/हे. की दर से बुवाई के 30-35 दिन बाद छिडक़ाव करें।
पतली पत्ती वाले खरपतवार के लिए क्लौडिनेफॉप प्रौपरजिल 60 ग्राम/हेक्टेयर की दर से 25-35 दिन की फसल में जब खरपतवार 2-4 पत्ती वाले हो छिडक़ाव करें।
मध्य दिसंबर में गेहूं की फसल में जड़ माहू कीटों रूट एफिड का प्रकोप देखा जा सकता है। यह कीट गेहूँ के पौध को जड़ से रस चूसकर पौधों को सुखा देते हैं। जड़ माहू के नियंत्रण के लिए बीज उपचार गाऊचे रसायन से 3 ग्राम प्रति किलो ग्राम बीज की दर से उपचारित करें अथवा इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एसएल की 250 मिली या थाइमौक्सेम की 200 ग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से 300-400 लीटर पानी में घोल बनाकर छिडक़ेंं।
माहू का प्रकोप गेहूं फसल में ऊपरी भाग तना व पत्तों पर होने की दशा में इमिडाक्लोप्रिड 250 मिली ग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से पानी मे घोल बनाकर छिडक़ाव करें।
खेत में गेहूं के पौधें के सूखने अथवा पीले पडऩे पर जो कि किसी कीट, बीमारी अथवा पोषक तत्व की कमी से हो सकता है, तुरन्त विशेषज्ञ की सलाह लेकर शीघ्र उपचार करें।

