
कोलकाता: पश्चिम बंगाल के किसानों की मांग को मानते हुए सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य पर आलू खरीदने के फैसले को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को कहा कि राज्य कैबिनेट ने आलू के लिए 900 रुपये प्रति क्विंटल न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने को मंजूरी दे दी है। राज्य सचिवालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बनर्जी ने कहा कि हमने किसानों की मदद के लिए आलू के लिए 900 रुपये प्रति क्विंटल न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने का फैसला किया है। इससे किसानों को अपनी उपज को मजबूरी में बेचने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
फसल को नुकसान होने पर डीवीसी की आलोचना
उन्होंने दामोदर घाटी निगम (डीवीसी) की भी आलोचना की, जिसने उनकी सरकार को सूचित किए बिना पानी छोड़ा और इस तरह खेतों में लगी फसलों (आलू) को नुकसान पहुंचाया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने किसानों को फसल बीमा प्रदान करने के लिए 321 करोड़ रुपये का कोष बनाया है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार किसानों से कुछ हद तक क्षतिग्रस्त आलू खरीदेगी। ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उन्हें कोई नुकसान न हो।
निर्यात चालू रखने की मांग कर रहे व्यापारी और किसान
सूत्रों के मुताबिक, हुगली, बर्धमान, दक्षिण 24 परगना और उत्तर बंगाल के कुछ जिले राज्य के सबसे बड़े आलू उत्पादन वाले जिलों में शामिल हैं। बंगाल से जब आलू का निर्यात होता है तो किसानों की उपज सही दाम बिकने की संभावना रहती है। यहां से ओडिशा, बिहार, असम में आलू जाता है। वहीं, बांग्लादेश में भी आलू का निर्यात किया जाता है। ऐसे में यहां के किसानों और मंडी व्यापारियों को निर्यात खोले जाने की आस है।
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पिछले साल रोक दिया था आलू का अतंरराज्यीय निर्यात
मालूम हो कि पिछले साल बंगाल की मुख्यमंत्री ने राज्य से आलू के निर्यात पर बैन लगा दिया था। जिसके बाद इसके पड़ोसी राज्य ओडिशा को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। क्योंकि मांग बढ़ने और सप्लाई कम न रहने से आलू की कीमतें बढ़ रही थीं। तब ओडिशा के तत्कालीन मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने भी बंगाल सीएम ममता बनर्जी से बात कर आलू की खेप उनके राज्य भेजे जाने को लेकर बात की थी।
वहीं, बंगाल कैबिनेट ने यह भी निर्णय लिया कि पूर्वी मेदिनीपुर जिले के लोकप्रिय तटीय शहर दीघा में जगन्नाथ मंदिर का उद्घाटन 30 अप्रैल को ‘अक्षय तृतीया’ के दिन होगा। इससे पहले उन्होंने मंदिर के निर्माण की समीक्षा की थी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के प्रतिनिधियों के अलावा, हमने मंदिर के न्यासी बोर्ड में विभिन्न धार्मिक और धर्मार्थ ट्रस्टों के प्रतिनिधियों को शामिल करने का भी निर्णय लिया है।

