संतोष कुमार सिंह
पानी पानी हो रहा है। क्योंकि पानी उतर गया है सिर्फ धरती से नहीं, तालाबों से नहीं, नदियों से नहीं, झरणो से नहीं..हैंड पंप से नहीं आखों से। किसी के आंख से पानी बह रहा है पानी की कमी के बिना..तो किसी के आंख का पानी मर गया है। कोई ट्रेन से पानी भेजता है तो कोई लेने से मना करता है यह कहते हुए कि हमारे यहां पानी की कोई कमी नहीं। फिर यह भी दावा किया जा रहा है कि टैंकर में तो पानी ही नहीं थाा। पानी को लेकर गजब तरह की सियासत चल रही है’सियासत चल रही है देश में। सांसद पानी मांगता है। प्रदेश सरकार कहती है हमें पानी के रेल की जरूरत नहीं। प्रदेश में बहुत पानी है। हालांकि पानी को लेकर पानी पर काम करने वाले लोग बापू की समाधी से लेकर जंतर—मंतर तक जल सत्याग्रह कर रहे हैं। कुछ ऐसा ही देखने को आया आज बुंदेलखंड के महोबा में जब पानी एक्सप्रेस महोबा के लोगों के लिए पानी लेकर पहुंची। यूपी सरकार ने एक ट्वीट कर केंद्र सरकार से कहा है कि बुंदेलखंड में पानी नहीं बल्कि 10 हजार टैंकर भेज दो, ताकि जो हमारे पास जो जल संसाधन हैं,जल संसाधन है,जल संसाधन है हमें पानी नहीं टैंकर दो ताकि हम उसका उपयोग कर सकें। इससे पहले ‘पानी एक्सप्रेस’ ट्रेन से पानी लेने से यूपी सरकार ने इनकार कर दिया। महोबा जिला प्रशासन ने कहा- हमें ट्रेन से पानी लेने की कोई जरूरत नही।
क्या है मामला
कुछ दिन पहले महोबा-हमीरपुर क्षेत्र से सांसद पुष्पेन्द्र सिंह चंदेल ने रेल मंत्री सुरेश प्रभु और रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा को यहां की जल संकट से अवगत कराया था। उन्होंने ट्रेन से पानी भेजने की सलाह दी थी। इसके बाद रेलवे बोर्ड ने ट्रेन से पानी महोबा भेजने का निर्देश दिया है। महोबा के बीजेपी जिलाध्यक्ष जितेन्द्र सिंह सेंगर ने कहा कि उनकी पार्टी ने पानी भेजने की मांग की थी। पानी एक्सप्रेस झाँसी पहुंची इसके लिए महोबा डीएम वीरेश्वर सिंह से बात हुई तो उन्होंने ट्रेन से पानी मंगाए जाने की जरूरत से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि अभी महोबा जिले में टैंकरों से पानी सप्लाई हो रहा है। यूपी के मुख्य सचिव ने कहा कि बुंदेलखंड में पर्याप्त पानी है। ऐसे में हमें किसी दूसरे राज्य से या केंद्र से पानी लेने की कोई जरूरत नहीं है। बुधवार को हुई मीटिंग में भी ऐसा कोई फैसला नहीं हुआ कि केंद्र सरकार पानी का ट्रेन भेजे।
भड़के शिवपाल यादव
यूपी के सिंचाई मंत्री शिवपाल यादव ने कहा की हमारे यहां लातूर जैसे हालात नहीं हैं। उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड में किसी को भूख से मरने नहीं दिया जाएगा अगर अधिकारियों ने लापरवाही की तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
एडीआरएम के अनुसार, महोबा डीएम द्वारा जरूरत होने को मना करने के बाद पानी एक्सप्रेस को झांसी ही रखा जाएगा। आने वाले दिनों में अगर बुंदेलखंड के किसी जिले में पानी की जरूरत पड़ती है तो वहां इसी ट्रेन द्वारा पानी भेजा जाएगा। रेलवे और जिला प्रशासन के बीच हुई इस बातचीत से लोगों में असमंजस की स्थिति है।यह तय नहीं हो पा रहा है कि पानी एक्सप्रेस महोबा पहुंचेगी या नहीं। फिलहाल जिला प्रशासन द्वारा मना करने के बाद ट्रेन को झांसी ही रखा जाएगा।
क्या कहते हैं जानकार
दिल्ली के जंतर—मंतर पर जलसत्याग्रह में आये बुदेंलखंड के लोगों ने प्रदेश सरकार के दावों को सिरे से खारिज कर दिया। ग्रामीणों ने कहा कि बुंदेलखंड में हर जिले में पानी का संकट है। लोगों के पास पीने का पानी नहीं है। मवेशी मर रहे हैं, यदि केंद्र की सरकार पानी के ट्रेन भेजती है तो प्रदेश सरकार को इसे लौटाने के बजाय लोगों को पानी देने पर ध्यान देना चाहिए,ताकि लोगों को राहत मिले। एकता परिषद के संयोजक पी वी राजगोपाल कहते हैं कि पानी को लेकर आपातकाल की स्थिति है। ऐसी स्थिती यह केंद्र के नरेंद्र मोदी और प्रदेश के अखिलेश सरकार के बीच की लड़ाई नहीं बननी चाहिए। लोगों को जहां से तुरंत राहत मिले उस दिशा में ध्यान देना चाहिए।
जल पुरूष राजेंद्र सिंह कहते हैं केद्र और राज्य की लड़ाई में बुंदेलखंड के लोगों को प्यासा नहीं छोड़ा जा सकता। अभी वहां पानी की जरूरत है…जहां से भी पानी आयेगा लोगों की मदद होगी।
ये हैं महोबा के हालात
महोबा के डीएम वीरेश्वर सिंह यह तो मानते हैं की जिले में पानी की कमी है लेकिन उन्हें ट्रेन से पानी आपूर्ति से इंकार है महोबा के चरखारी, खरेला और कबरई में पानी की समस्या अधिक है। महोबा में 33 गांवों में टैंकरों से प्रशासन द्वारा पेयजल आपूर्ति किया जा रहा है। इन गांवों में 75 टैंकर पेयजल आपूर्ति में लगे हुए हैं। उन्होंने बताया कि ग्राम पंचायतों के प्रधानों को पेयजल किल्लत से निपटने के आदेश किए जा चुके हैं। सभी गांवों में टैंकर लेने के लिए प्रधान और सचिवों को निर्देश दिए गए हैं। इसके बाद भी घटते जा रहे जलस्तर के कारण ये समस्या बढ़ती जा रही है।

