पंचायत खबर टोली
मऊ : कुछ ऐसा ही कर दिखाया है युवा राजेश सिंह ने जिन्होंने जलाशय को रोजगार का साधन बनाया। अगर साहित्यिक दृष्टिकोण से बात को सामने रखा जाए तो आदि काल में पौराणिक नदी तमसा के तट पर क्राैंच पक्षी के वध के उपरांत वाल्मिकी के मन में फूटी करुणा ने अगर आदि छंद का सृजन किया तो भीषण गर्मी में जलाशय की तलहटी में पशुओं को पानी के लिए आपस में लड़ते देख ताजोपुर निवासी राजेश सिंह किंकर के मन में उपजी करुणा ने अक्षय जल के श्रोत का निर्माण कर दिया। सरकारी नौकरी को लात मार जल संरक्षण को जीवन समर्पित करने वाले इस युवा के त्याग और प्रयास की मिशाल क्षेत्र में दी जाती है। उनके द्वारा लगभग आठ बीघा में निर्मित पांच जलाशयों में मत्स्य पालन के साथ स्थानीय लोगों के लिए के जल श्रोत को एकमात्र सुगम स्थान बना हुआ है।
यूं बदली जीवनचर्या
वर्ष 2002 में कृषि विभाग में कार्यरत पिता के देहावसान के उपरांत बेरोजगार राजेश सिंह ने मझले भाई को उक्त स्थान पर नियुक्त करा दिया। इसी वर्ष भीषण गर्मी में अपने छोटे से तालाब की पेंदी में अत्यल्प जल के लिए चार भैंस को आपस में लड़ते देख राजेश सिंह का मन द्रवित हो गया। करुणा की उपज ने क्षेत्र में अक्षय जल श्रोत निर्माण का संकल्प लिया। उसी छोटे तालाब को उन्होंने अपने खर्च से एक एकड़ में उसको विस्तार कर दिया। मन नहीं माना तो बगल में फिर एक एकड़ जलाशय का निर्माण कराना प्रारंभ किया। अब पशुओं सहित स्थानीय निवासियों को जल की सुविधा उपलब्ध होने के साथ आय के श्रोत का निर्माण भी हो गया था।
विभाग से मिली मदद
इसी दौरान मत्स्य पालन विकास अभिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजीव गुप्ता से उनका संपर्क हुआ। उन्होंने विभाग की डास्प योजना से उन्हें जोड़कर आर्थिक एवं तकनीकी सहायता प्रदान किया। इससे उत्साहित राजेश ने तीसरे जलाशय के निर्माण करने का निश्चय लेते हुए इसे ही अपनी आजीविका का आधार बना लिया। अपनी इस कठिन यात्रा के दौरान कभी अपने निश्चय से लोगों के उपहास का पात्र बनने वाले राजेश सिंह की आज क्षेत्र में मिशाल दी जाती है। इसी बीच मझले भाई के आकस्मिक निधन से बुरी तरह टूटे राजेश सिंह ने हिम्मत नहीं हारी। उनकी पत्नी को उनके स्थान पर नियुक्त कराने के साथ ही छोटे भाई की आजीविका के लिए व्यावसायिक प्रतिष्ठान का निर्माण किया। अपनी दो बहनों का कन्यादान करते हुए उनकी शादी शिक्षित एवं उच्च कुल में किया। पारिवारिक दायित्वों का बोझ कम होते ही एक बार फिर उन्होंने एक साथ दो और तालाबों के निर्माण करने कार निर्णय लिया। जो इस समय निर्माणाधीन हैं।
राजेश सिंह का कहना है कि आजीविका के साथ जल संरक्षण के बहाने बेजुबान जीवों के लिए कुछ कर पाना अपने आप में बहुत संतोष देता है। कभी निर्जन रहे इस स्थान पर आज पशु पक्षियों का कलरव और स्थानीय लोगों को सहूलियत पाते देखना अभी और भी बहुत कुछ करने की प्रेरणा देता है। इस दिशा में जीवन भर प्रयासरत रहुंगा।
