- अधिक व कम वर्षा दोनों में मिलेगा लाभ
- रोग से होगा बचाव..बढ़ेगी आमदनी
मऊ : अक्सर देखा गया है कि बरसात के दिनों में सब्जी को लेकर मारामारी होती है। किसान सब्जी तो लगाता है लेकिन कभी ज्यादा पानी की वजह से नुकसान तो कभी पानी के अभाव में सब्जी का नुकसान। ऐसे में सब्जियों का उत्पादन प्रभावित होता है और सब्जियां मंहगी हो जाती हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए कृषि वैज्ञानिकों की राय है कि यदि बरसात के दिनों में सब्जी का उत्पादन मेड़ बनाकर किया जाये तो किसान दोहरा लाभ उठा सकते हैं। अधिक बरसात होने की दशा में मेड़ पर बोई गई सब्जी की जड़ में जहां पानी लगने की संभावना कम हो जाती है, वही कम वर्षा की स्थिति में हल्की सिंचाईं करने से जड़ों में नमी का प्रभाव देर तक बना रहता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि मेड़ पर बोए जाने के कारण जमाव में वृद्धि के साथ रोग के प्रसार की संभावना में भी कमी आती है।
कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा.वीके सिंह की राय है कि बरसात में सब्जी उत्पादक किसानों को पानी के साथ कीट व रोग से बचाव को भी सतर्क रहना पड़ता है। फसल की जड़ में पानी लग जाने से सड़न रोग लगने लगता है। मेड़ पर लगाए पौधों में रोग लगने पर उनमें दवाओं के छिड़काव से लेकर नियंत्रण का सभी उपाय करना आसान हो जाता है। उन्होंने यह भी सुझाया कि कि बरसात में भिंड़ी, लोबिया सहित पौधे वाली सब्जियों के साथ लता वाली सब्जी की फसल की बोआई भी मेड़ पर करना चाहिए। इसके साथ ही अरहर व मक्का की खेती मेड़ पर करने से रोग एवं कीट से बचाव होने के साथ उत्पादन में भी वृद्धि होती है। डा.सिंह ने कहा कि अमूमन बरसात में पत्ती सिकुड़न रोग, जड़ों में गांठ रोग, फली छेदक आदि रोग का प्रभाव तेज हो जाता है। ऐसे में सामान्य या छिड़काव विधि से बोई गई फसलों में रोग व कीट नियंत्रण में परेशानी होती है। पौधे से पौधे की दूरी में समानता न होने की स्थिति में उत्पादन भी प्रभावित होता है। मेड़ पर बोई गई फसल में कीट व रोग प्रभावित पौधों को निकालने व उनकी जगह दूसरा पौधा लगाने में आसानी हो जाती है।
डा. सिंह ने खरीफ की मुख्य फसल धान की रोपाई के दौरान किसानों को सचेत रहने की आवश्यकता पर बल दिया। कहा कि दौरान दो से तीन दानों की रोपाई करानी चाहिए। इसके साथ एक वर्ग मीटर में 33 पौधे की रोपाई अवश्य कराएं। बताया कि रोपाई के दौरान मजदूर एक वर्ग मीटर में 18 से 20 पौधे ही लगाते हैं। इससे उत्पादन में गिरावट आती है। रोपाई से पूर्व खेत में घास नियंत्रण एवं उर्वरक प्रबंधन करना अत्यावश्यक है।



