मीनाक्षी पाल
मानसून आते ही डेंगू का खतरा सबसे ज्यादा बढ़ जाता है। बारिश के मौसम में जगह-जगह पानी जमा हो जाने से भारी संख्या में मच्छर पनपने लगते है जो डेंगू, चिकनगुनिया, मलेरिया जैसे रोगों का कारण बनते हैं। तो आईए जानते कैसे प्राकृतिक तरकों से करें डेंगू का इलाज। इन दिनों भारी बारिश के कारण उत्तर भारत के विभिन्न हिस्सों में लगातार बुखार और डेंगू के मामले बढ़ रहे है। गुड़गांव में आर्टेमिस अस्पताल से जुड़े डॉ.पी. वेंकट कहते है कि सबसे पहले यह पुष्टी कर लेनी चाहिए कि यह डेंगू का बुखार है या सामान्य वायरल बुखार। डॉ.पी. वेंकट के अनुसार डेंगू और वायरल बुखार में लक्षण, गंभीरता और जटिलताओं के मामले में अंतर होता है। डेंगू का बुखार मादा मच्छरों, मुख्यतः एडीज एजिप्टी मच्छर के काटने से होता है। इसमें अचानक बुखार होता है। इसके साथ ही सिर, जोड़ों एवं मांसपेशियों में तेज दर्द होता है और शरीर पर चकत्ते भी पड़ जाते हैं। गंभीर मामलों में यह डेंगू हीमोरहेजिक फीवर का कारण बन जाता हैं, जो जानलेवा हो सकता है।
कैसे करें डेंगू की पहचान
डेंगू के बुखार में प्लेटलेट्स काफी कम होने लगती है जिस वजह से नाक, मसूड़ों, आंतों से रक्तस्त्राव, बेहोशी, कम पेशाब आना, सांस लेने में कठिनाई, हाथ, चेहरे व पैरों में सूजन और कम रक्तचाप जैसी समस्याएं होने लगती हैं। ऐसे में तुरंत डॉक्टर के पास जाएं।
सामान्य वायरल में बुखार धीरे-धीरे चढ़ता है। इसमें गले में खराश,खांसी, नाक बहना, शरीर दर्द व थकान के हल्के लक्ष्ण दिखाई देते हैं। डेंगू जांच में खून में एंटीबॉडी की जांच की जाती हैं। रोजवॉक हास्पिटल से जुड़े पेडियाट्रिशन डॉ. राम गोपाल होला बताते है कि , ‘बुखार व दर्द की कुछ दवाएं प्लेटलेट्स पर बुरा असर डालती हैं, ऐसे में खुद से कोई दवा न लें और न ही कोई एंटीबायोटिक्स दवाएं खाएं। सुनी-सुनाई बातों के आधार पर खाने-पीने की चीजों का सेवन न करें।‘
डेंगू के इलाज में कारगर हैं ये प्राकृतिक उपाय
अखिल भारतीय आयुवर्वेद संस्थान में काय चिकित्सा से जुड़े डॉ.आर.के यादव कहते हैं,डेंगू बुखार में कई तरह की जड़ी-बूटियों मसलन गिलोय, तुलसी, मंजिष्ठा, मुलैठी व आंवला का अच्छा असर देखने को मिलता है। इसी तरह हल्दी व अदरक प्राकृतिक दर्द निवारक हैं। जड़ी-बूटी का सेवन करते समय मात्रा का ध्यान रखना चाहिए।
* गिलोय या आंवला यदि चूर्ण रुप ले रहे हैं तो दिन में तीन से छह ग्राम तक ले सकते हैं। यह मरीज की उम्र व स्थिति पर निर्भर करता है। अगर जूस लेते हैं तो एक दिन में 20 से 25 मिलीग्राम तक ही लें। तुलसी को काढ़े के तौर पर ही लेने की सलाह दी जाती है। बेहतर है कि विशेषज्ञ से मिलकर अपने लिए सलाह लें। यदि लक्षण गंभीर हो रहे हैं तो डॉक्टर से मिलें। आर्युवेदिक व एलोपैथिक दवाओं के बीच आधे घंटे का अंतर रखें।
* बुखार से राहत पाने के लिए अधिक मात्रा में नारियल के पानी का सेवन करें। इसमें मौजूद जरूरी पोषक तत्व जैसे मिनरल्स और एलेक्ट्रोलाइट्स शरीर को मजबूत बनाने में मदद करता है।
* डेंगू में मेथी की पत्ती उबालकर चाय बनाकर पिएं। मेथी का पानी पीने से शरीर के विषाक्त पदार्थ बाहर निकलते है और इसका कमजोर होता है।
* डेंगू के इलाज में पपीत्ते के पत्ते भी काफी असरदार होते है। इसमें मौजूद पपेन शरीर के पाचन को सही रखता है। इसका जूस पीने प्लेटलेट्स तेजी से बढ़ती हैं।
*घर के आसपास सफाई रखें। कहीं पानी जमा न होने दें। कहीं पानी जमा न होने दें। मच्छर दूर रखने के लिए नीम का तेल, यूकेलिप्टस का तेल या तुलसी के पत्तों का इस्तेमाल करें।
* हर्बल चाय, ओआरएस, नारियल पानी व ताजे फलों के जूस के तौर पर पर्याप्त तरल चीजों का सेवन करें। हल्के और आसानी से पचने वाले आहार जैसे खिचड़ी और सूप का सेवन करें, इससे पाचन तंत्र पर दवाब नहीं पड़ता। जंक फूड से बचकर रहें।
* एंटीपायरेटिक हर्ब जैसे मेथी, धनिया और जीरा को नियमित भोजन में शामिल करें।
