पंचायत चुनाव में शौचालय की शर्त से पीछे हटे नीतिश कुमार

0
586

अपराजिता संतोष

बिहार में नीतिश कुमार की सरकार अपने फैसलों में दो कदम आगे और चार कदम पीछे हटने की परंपरा को एक बार फिर से पालन करती हुई नजर आ रही है। कुछ ऐसा ही हुआ है पंचायत चुनाव में शौचालय की शर्त को लेकर। बिहार सरकार ने मंगलवार को पंचायत चुनाव में उम्मीदवार बनने के लिए शौचालय की अनिवार्यता को समाप्त करने का निर्णय लिया है। इस बाबत नीतिश कुमार की कैबिनेट ने फैसला लिया है। कैबिनेट के फैसले में कहा गया है कि बिहार सरकार ने मंगलवार को पंचायत चुनाव में उम्मीदवार बनने के लिए शौचालय की अनिवार्यता को समाप्त करने का निर्णय लिया है। राज्य सरकार ने माना है कि पंचायत राज अधिनयम 2006 में इस प्रावधान के कारण कमजोर वर्ग के लोगों को पंचायत चुनाव में उम्मीदवार बनने में कठिनाई होगी। क्योंकि बड़ी संख्या में कमजेार वर्ग के लोगों को घर और शौचालय बनाने के लिए जमीन भी नहीं है।

toilets-guarantee-womens-security-in-rural-India

कैबिनेट सचिव ब्रजेश मेहरोत्रा ने बताया कि राज्य सरकार के इस निर्णय से अब पंचायत चुनाव में उम्मीदवार बनने के लिए बिहार राज्य पंचायत राज अधिनियम 2006 में किये गये प्रावधान को हटा दिया गया है. जिसमें मुखिया, सरपंच, पंचायत समिति सदस्य, पंचायत सदस्य और जिला परिषद के सदस्यों को चुनाव लड़ने के लिए शौचालय होना अनिवार्य कर दिया गया था।

ऐसा लगता है कि सरकार इस मामले में शौचालय के महत्व और पंचायतों की जवाबदेही से पल्ला झारती नजर आ रही है। भले ही सामाजिक संगठन सरकार के शौचालय संबंधी फैसले की अनिवार्यता पर सहयोग करते नजर आ रहे थे, और इस दिशा में तेजी से काम बढ़ रहा था,लेकिन राजनीतिक दलों के विरोध को देखते हुए सरकार इस तरह के फैसले लेने को मजबूर हुई है। सीपीआई एमएल ने शौचालय की अनिवार्यता के प्रावधान को समाप्त करने की मांग को लेकर विगत दिनों में बिहार बंद बुलाया था ।

भाजपा का भी विरोध

पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने बिहार सरकार ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में उम्मीदवारी के लिए घरों में शौचालय होने की अनिवार्यता की शर्त को गलत बताया है। उन्होंने कहा की राज्य सरकार की विफलता के कारण बिहार के 1.65 करोड़ घरों में आज तक शौचालय नहीं बना है। भाजपा चुनाव में उम्मीदवारी के लिए शौचालय की अनिवार्यता की शर्त के पक्ष में है, मगर इस शर्त की वजह से बिहार के लाखों अनुसूचित जाति, जनजाति, अति पिछड़ा और गरीब सवर्ण समाज के लोग चुनाव लड़ने से वंचित हो जायेंगे। ऐसे में सरकार इस चुनाव में इस शर्त को शिथिल कर चुनाव जीतने वाले उम्मीदवारों के लिए अगले एक साल में अपने घरों में शौचालय बना लेने की शर्त लगा सकती है।

toiletttttttttttttttttमोदी ने कहा कि सरकार के तमाम प्रयासों के बावजूद बिहार के 76.38 प्रतिशत परिवार आज भी शौचालय विहीन हैं जिनमें से अधिकांश अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ा समाज के हैं। शौचालय बनवाने की जिम्मेवारी सरकार की थी, जिसमें वह बुरी तरह से विफल रही है। अगर नीतीश कुमार की सरकार अपनी जिम्मेवारी का निर्वाह कर शौचालय बनाने में विफल रही है, तो इसकी सजा चुनाव लड़ने के इच्छुक लाखों अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ों की नहीं दी जा सकती है। जब तक भाजपा गंठबंधन की सरकार थी, अभियान के तहत शौचालय बनवाये गये, मगर बाद के वर्षों में यह योजना ठप पड़ गयी। नतीजतन सूबे के करोड़ों परिवार आज भी शौचालयविहीन हैं। भाजपा पंचायत चुनाव में उम्मीदवारी के लिए शौचालय की शर्त की अनिवार्यता के पक्ष में होने के बावजूद शौचालयविहीन परिवारों की बड़ी तादाद के मद्देनजर अगले पांच वर्षों के लिए इस शर्त को शिथिल करने की सरकार से मांग करती है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here