कांग्रेस का हमेशा से ही आरोप रहा है की मोदी सरकार उनकी ही योजनाओं का श्रेय ले रही है, ऐसे में जब केंद्र सरकार ने मनरेगा योजना की सराहना की मनरेगा को एक दशक की उपलब्धि राष्ट्रीय गौरव और उत्सव का विषय बताया तो कांग्रेस को हमले का मौका मिल गया। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा है कि पहले मोदी सरकार महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) की तीखी आलोचना करती थी, लेकिन अब यू-टर्न लेकर राष्ट्रीय गौरव का कार्यक्रम बताकर वह इसकी उपलब्धियों पर वाह-वाह लूट रही है। दस साल पहल कांग्रेस नेतृत्व वाली सरकार ने की थी और आज के ही दिन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी तथा तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने दो फरवरी 2006 को आंध्रप्रदेश के अनंतपुर जिले के बंदलापल्ली गांव में इस कार्यक्रम की शुरुआत की थी। राहुल अनंतपुर जिले में बंदलापल्ली गांव गए, जो यहां से करीब 350 किलोमीटर के फासले पर है। वहां वह दिहाड़ी मजदूरों, गैर सरकारी संगठनों के प्रतिनिधियों और सरपंचों से मुलाकात किया और उनके साथ दोपहर का भोजन भी किया । इस मौके पर पूर्व प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह भी उपस्थित थे। बंदलापल्ली गांव में कार्यक्रम में हिस्सा लिया। उन्होंने मोदी द्वारा इस कार्यक्रम की सफलता को स्वीकार करके इसको लेकर उत्सव मनाना अच्छा संकेत बताया।
उन्होंने मनरेगा के दस साल सफलातपूर्वक पूरा होने पर मंगलवार को ट्वीट करके कहा कि मनरेगा को कांग्रेस सरकार की असफलता का जीता जागता स्मारक बताने वाली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार अब इसकी सफलता की प्रशंसा कर रही है और इसे राष्ट्रीय गौरव का कार्यक्रम बताकर उत्सव मना रही है। उन्होंने इसे पीएम मोदी की राजनीति सूझ बूझ का विशिष्ट उदाहरण बताया है।
एक साल पहले क्यो बोले थे प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले वर्ष मनरेगा को गरीबी खत्म करने में कांग्रेस की ‘असफलता Ó का ‘जीता जागता स्मारक बताया था। उन्होंने संसद में कांग्रेस की तरफ इशारा करते हुए कहा था, क्या आपको लगता है कि मैं इस योजना को समाप्त कर दूंगा। मैं राजनीति में इतना कमजोर नहीं हूं कि मैं इस तरह का कदम उठाऊं। यह गरीबी से निबटने का आपकी असफलता का जीता जागता स्मारक है। मैं गाजे बाजे के साथ इस योजना को जारी रखूंगा।
अब क्या कहती है सरकार
कांग्रेस ने ग्रामीण विकास मंत्रालय की इस संदर्भ में जारी रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि इस योजना की प्रशंसा करते हुए मोदी सरकार कहती है, अब तक मनरेगा पर 3,13,844.55 करोड़ रुपया, खर्च हुए हैं और इसमें से 71 प्रतिशत राशि श्रमिकों को पारिश्रमिक के रूप में दी गई। इसमें अनुसूचित जाति के श्रमिकों की संख्या 20 प्रतिशत बढ़ी है, जबकि जनजाति के श्रमिकों की संख्या में 17 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। महिला श्रमिकों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इससे सतत और स्थायी परिसंपत्ति का निर्माण हुआ और इसके जरिए 65 प्रतिशत से ज्यादा काम कृषि तथा इससे जुड़ी गतिविधियों में हुआ है। पार्टी का कहना है कि मनरेगा की तीखी आलोचना करने वाली मोदी सरकार इसे अब गौरव का विषय बता रही है और मंत्रालय की रिपोर्ट में कहा गया है, मनरेगा रोजगार उपलब्ध कराने वाला दुनिया की सबसे बड़ा कार्यक्रम है और इसके क्रियान्वयन से गरीबी 32 प्रतिशत घटी है और एक करोड़ 40 लाख लोग इसके कारण गरीबी की चपेट में आने से बचे हैं।
मनमोहन सिंह और सोनिया गाँधी न ने 2 फरवरी 2006 को इस योजना की शुरुआत की थी ताकि देश के गांवों में रहने वाले करोड़ों गरीबों की आजीविका सुनिश्चित हो सके। तत्कालीन संप्रग सरकार ने इसे देश के दामन से गरीबी का दाग धोने में ऐतिहासिक पहल करार दिया था। शुरू में 200 जिलों में फैली इस योजना को बाद में पूरे देश में शुरू किया गया था। यह योजना गांवों में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति के लिए एक वर्ष में कम से कम सौ दिन का रोजगार सुनिश्चित करती है।
गाँव गाँव जाएगी कांग्रेस
कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवं पार्टी के उत्तर प्रदेश प्रभारी मधुसूदन मिस्त्री ने आज केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार पर देश के गरीबों को रोजगार की गारंटी देने वाली योजना ‘मनरेगा’ को खत्म करने की साजिश रचने का आरोप लगाते हुए कार्यकर्ताओं का गांव-गांव जाकर इसे बेनकाब करने का आह्वान किया. उन्होंने मनरेगा सम्मेलन में कहा कि केंद्र की पूर्ववर्ती कांग्रेसनीत सरकार ने गरीबों को कम से कम 100 दिन के रोजगार की गारंटी देने के प्रावधान वाली दुनिया की अनूठी ‘मनरेगा’ योजना शरु की थी, जिससे गरीब तबकों को व्यापक लाभ भी मिला था.उन्होंने कहा कि आज केंद्र की मोदी सरकार एक तरफ जहां इस योजना की तारीफ करती है वहीं मनरेगा को बंद करने के लिए षडयंत्र रच रही है, जिसको कांग्रेसजनों को बेनकाब करना है तथा अपने-अपने जिलों में, ब्लाक में, गांवों में मनरेगा में श्रमिकों को काम मिले, उनकी मजदूरी मिले, इसके लिए संघर्ष करने की आवश्यकता है.


