
नई दिल्ली: देश ने साल 2020 -21 में कोरोना के दौरान “लॉकडाउन” का दौर देखा था। लेकिन इस बार एक ऐसा मामला सामने आया है जो हैरान करने वाला है। दरअसल हजारीबाग जिले के बड़कागांव ब्लॉक में स्थित पचंडा में कुल 100 घरों के लगभग 600 निवासी अगले तीन महीनों के लिए किराने का सामान और दवाइयों की सूची तैयार कर रहे हैं क्योंकि उनका गांव मानसून के कारण “लॉकडाउन” में रहेगा। पचंडा के ग्रामीणों को अगले तीन महीनों तक अपने इलाके के अंदर रहने के लिए मजबूर होना पड़ेगा जब तक कि बारिश से हाहरो नदी का जल स्तर कम नहीं हो जाता। ग्रामीण दशकों से पुल की मांग कर रहे हैं लेकिन उनकी गुहार किसी ने नहीं सुनी ।
बिनोद बेसरा नामक एक निवासी ने बताया, “पचंडा किसानों और दिहाड़ी मजदूरों का गांव है। यहां उत्कर्मित मध्य विद्यालय पचंडा नाम का एक स्कूल है, जहां आठवीं तक के छात्र पढ़ते हैं। कक्षा 9 से आगे की पढ़ाई के लिए 5 किलोमीटर दूर आंगो जाना पड़ता है, जहां बारिश से बहने वाली हाहरो नदी को पार करना पड़ता है। किसी भी मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति में मरीजों को उफनती नदी के पार ले जाने का जोखिम उठाना पड़ता है।
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सौभाग्य से, अभी तक कोई अप्रिय घटना नहीं हुई है।” स्थानीय मुखिया के प्रतिनिधि महेंद्र मांझी ने कहा कि मानसून के दौरान गांव के लोग गांव में ही बंद हो जाते हैं। उन्होंने बताया, “हमारे पास जंगल के इलाके से होकर जाने वाला एक और रास्ता है, लेकिन मानसून के दौरान बारिश से बहने वाली झिंझोर नदी के कारण यह भी बंद हो जाता है।”वहीं मुखिया नीलम मिंज ने कहा कि उन्होंने इस मामले को प्रशासन के समक्ष नियमित रूप से उठाया है। उन्होंने कहा, “यह सच है कि ग्रामीणों को खास तौर पर मानसून के दौरान समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।”

