उड़द दाल की खेती के लिए बेस्ट है ये किस्म, जानें खेती का तरीका

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पूजा

 

Urad farming: मार्च-अप्रैल में उड़द की खेती किसानों के लिए अच्छी कमाई का विकल्प है। क्योंकि यह दो ढाई महीने की फसल है, और जिसकी डिमांड बाजार में पूरे साल रहती है। उड़द में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, कैल्शियम एवं फास्फोरस प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। इसके अलावा उड़द को दलहनी फसलों में प्रमुख फसल माना जाता है। उड़द की खेती से किसानों को कीमत भी अच्छी मिलती है। इसलिए गर्मी के मौसम में खेत खाली छोड़ने की बजाय किसान उड़द कि खेती से कमाई कर सकते हैं। लेकिन खेती का तरीका अच्छा होना चाहिए तभी पैदावार बढ़िया मिलेगी। आइए जानते हैं कैसे

 

 

उड़द की टी-9 सबसे अच्छी किस्म
उड़द की खेती करने के लिए किसानों को पता होना चाहिए, कि मंडी में या बाजार में उड़द की कौन सी वेराइटी की अधिक कीमत मिलती है, और उनके क्षेत्र के अनुसार कौन सी वेराइटी बढ़िया रहेगी, जिससे अधिक उत्पादन मिलेगा। कृषि विशेषज्ञों का कहना है, कि उड़द की टी-9 किस्म अच्छी मानी जाती है। एक हेक्टेयर में इस वैरायटी की खेती करेंगे तो 20 किलो बीजों की जरूरत पड़ेगी। जिसमें बुवाई के समय अगर खेत में नमी बनाए रखेंगे तो अधिक उत्पादन मिलेगा। चलिए जानते हैं खेती करने का तरीका

 

मिट्टी और भूमि की तैयारी
उड़द की खेती के लिए सबसे आदर्श मिट्टी 6.5 से 7.8 के पीएच के साथ अच्छी जल निकासी वाली दोमट होती है। इसके अलावा उड़द की खेती में खाद और पानी का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। तभी उत्पादन अच्छा मिलेगा। गर्मी के मौसम में सिंचाई का ध्यान रखें बुवाई से पहले खेत में गोबर खाद जरूर डालें। जिसमें डेढ़ से दो ट्रॉली गोबर की पुरानी सड़ी हुई खाद हो और उसे अच्छी तरह मिट्टी में मिलाएं। अगर किसान रासायनिक खाद का इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो 100 किलोग्राम डीएपी एक हेक्टेयर के अनुसार डालें।

 

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करें उड़द की बुवाई
किसी भी फसल की अच्छी उपज के लिए सही तरीके से बुवाई होना अति आवश्यक है। ऐसे में उड़द की बुवाई के लिए दो कतारों के बीच की दूरी 30 सेमी रखें और बुवाई के बाद 20 से 25 दिन में खरपतवार निकाले। जिससे पौधों का विकास अच्छा हो। बुवाई के एक महीने बाद किसानों को सूक्ष्म पोषक तत्व तरल रूप में देना चाहिए। इससे फलियां की मात्रा अधिक होगी। गुणवत्ता भी बढ़िया देखने को मिलेगी। जिससे किसानों को अच्छी कीमत मिलेगी और ज्यादा कमाई होगी। इसके अलावा खेत में बुवाई के समय अगर नमी न हो तो सिंचाई कर दें। किसान अप्रैल के पहले सप्ताह तक उड़द लगा सकते है।

 

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