संतोष कुमार सिंह
पटना: बोतल बंद पानी के बढ़ते कारोबार के इस दौर में यदि सरकार स्थानीय पंचायतों के साथ मिलकर नलकूप के जरिए पेयजल को घर—घर पहुंचाने का संकल्प ले और इस दिशा में आगे बढ़े तो यह सरकार की बड़ी उपलब्धि मानी जाएगी। बिहार सरकार ने मुख्यमंत्री के विभिन्न निश्चयों में एक महत्वपूर्ण निश्चय जिसमें प्रत्येक घर में नल का जल पहुंचाने के निर्णय को अमली जामा पहुंचाने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाया है। सरकार के तीन महत्वपूर्ण विभाग पंचायती राज विभाग, नगर विकास एवं आवास विभाग और लोक स्वास्थ्य एवं अभियंत्रण विभाग एक साथ पहल करते हुए विभाग एक साथ तहत हर घर नल का जल योजना की शुरुआत करेंगे। आगामी 27 तारीख को इस योजना की शुरुआत मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा उद्घाटन के साथ होगा।
राज्य के हर नागरिकों को हर घर नल का जल पहुंचाने के निश्चय पर अमल शुरू हो गया है। पंचायती राज विभाग के सचिव अरविंद चौधरी के मुताबिक राज्य के हर नागरिकों को हर घर नल का जल पहुंचाने के निश्चय पर अमल शुरू हो गया है। इसके तहत पंचायती राज विभाग द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में पांच हजार 13 पंचायतों में हर घर नल का जल पहुंचाने की योजना तैयार कर ली गयी है। पहले चरण में हर पंचायत के 20 फीसदी वार्डों में इस योजना को इस वित्तीय वर्ष में आरंभ किया जायेगा। उन्होंने बताया कि एक वार्ड में अनुमानित औसतन घरों की संख्या 155 आंकी गयी है। इसमें कुछ अंतर भी हो सकता है। इस अनुमान के अनुसार एक वार्ड में औसतन 967 लोग रहते हैं। हर वार्ड में प्रति व्यक्ति को हर दिन 70 लीटर पानी की आवश्यकता है। हर वार्ड में 63 हजार लीटर प्रति दिन पानी की आवश्यकता होगी। पानी पहुंचाने के लिए बोरिंग और सबमर्सिबल पंप के माध्यम से पानी पहुंचाया जायेगा।
पंचायती राज विभाग के अलावा लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग और नगर विकास एवं आवास विभाग भी मुख्यमंत्री निश्चय योजना को अमली जामा पहनाने के लिए सक्रियता से आगे बढ़ा है। प्रदूषित जल वाले 3378 पंचायतों में हर घर जल का नल पहुंचाने की जिम्मेवारी लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग को दी गयी है। साथ ही नगर विकास एवं आवास विभाग द्वारा 140 नगर निकायों में जालापूर्ति करनी है।
होगा बीमारियों से बचाव
बिहार के कई जिलों में गंगा तट के दोनो ओर बसे गांवों के लोगों में दूषित पेयजल के कारण कई तरह की बीमारियां देखी गयी हैं। विशेष तौर पर हैंडपंप से निकलने वाले जल में आर्सेनिक की मात्रा पाई गयी है। आर्सेनिक नामक धीमे ज़हर के कारण लीवर, किडनी के कैंसर और “गैंगरीन” जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के एक अधिकारी के अनुसार सर्वाधिक खराब स्थिति भोजपुर, बक्सर, वैशाली, भागलपुर, समस्तीपुर, खगड़िया, कटिहार, छपरा, मुंगेर और दरभंगा जिलों में है। सबसे चिन्ताजनक बात तो यह है कि आर्सेनिक हमारे शरीर में पेयजल के जरिए तो जाता ही है, लेकिन अब तो खाद्य और अनाजों के इस्तेमाल से भी शरीर में जा रहा है। आर्सेनिक ने मिट्टी में भी अपना ठिकाना बना लिया है, लिहाजा अब यह मानव के भोजन-चक्र में शामिल हो गया है और प्रभावित होने वाली बड़ी आबादी की सेहत के लिये बड़ा खतरा साबित हो रहा है।
क्या है योजना में खास
पंचायती राज विभाग 5013 पंचायतों में करेगा जलापूर्ति
लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग 3378 पंचायतों में पहुंचायेगा जल
नगर विकास को 140 नगर निकायों में जल पहुंचाने की जिम्मेवारी
प्रति वार्ड में 63 हजार हर दिन होगी पानी की आवश्यकता


