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सैनिकों के गांव में खेती-बाडी

हरीश रसगोत्रा भारत के मुकुट यानी जम्मू में मेरा एक छोटा-सा गांव है ‘संगवाल’। भारत के अन्य गांवों की तरह यहां का जीवन भी मुख्य रूप से खेती-किसानी पर ही निर्भर है। आधुनिक कृषि के इस दौर में भी मेरे गांव के लोग परंपरागत खेती को ही आधार बनाए हुए हैं। मुख्य रूप से गेहूं, मक्का, बाजरा …

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अपने प्रयास से आगे बढ़ा दानियाल परसौना

प्रवेश कुमार मिश्र महात्मा गांधी की कर्मभूमि चम्पारण के साठी थाना में दानियाल परसौना गांव आज विकास की गति के साथ कदमताल करने को तैयार है। कभी शहर व बाजार से महरूम रहा यह गांव आज बड़े-बड़े शहरों से आने वाले धन पर इठला रहा है। लोग देश-विदेश तक अपनी पहुंच बना चुके हैं। कभी …

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परंपरा की पगडंडी पर धूल-धूसरित हो लुप्त होती गांव की स्मृतियां…

गांव से मेरी स्मृति की डोर अस्सी के दशक के मेरे स्कूली दिनों से जुडी है। गर्मियों की छुट्टी में हम लोग हर साल सपरिवार गांव जाते थे। दिल्ली रूपी कंक्रीट के जंगल से दूर गांव में छप्पर की छांव तले दो-ढाई महीने व्यतीत होते थे। मेरे माता-पिताजी यूपी के उन्नाव जिले के पड़री खुर्द …

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गांव स्मार्ट हों तभी शहर हो पाएंगे खुशहाल

शहरों की ओर लगातार हो रहे पलायन को रोकने के लिए गांवों के हालात बेहतर बनाने होंगे देश में करीब ढाई लाख पंचायतें हैं। अगर एक पंचायत के विकास की जिम्मेदारी सीएसआर वाली एक कंपनी को दे दी जाए तो गांवों में बदलाव दिखने लगेगा उमेश चतुर्वेदी, वरिष्ठ पत्रकार मानसून के असमान वितरण के चलते ग्रामीण …

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