Sitabdiara

सोशल मीडिया पर नहीं रूक रहा अध्यक्ष जी को याद करने का सिलसिला

मंगरूआ नयी दिल्ली: देश में कोरोना महामारी के कारण आपात काल जैसी स्थिति है। लॉक डाउन के दौरान बाहर निकलना मना है। कोई सार्वजनिक सभा समारोह भी नहीं किया जा सकता। लेकिन इस बीच आपात काल के दौरान और उसके बाद के संसदीय राजनीति में, देश में जनमानस के नायक, लोकयात्री और युवा तुर्क के …

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अब न वह गांव है, न वे लोग हैं, न वह परिवेश है…

हरिवंश जिस गांव में शिक्षा की भूख बढ़ी, वह भी खुद के कारण नहीं, अध्यापकों के कारण. वे पुराने किस्म के अध्यापक थे, धोती-कुर्ता वाले, हर साल इंक्रीमेंट और तनख्वाह बढ़ाने के लिए आंदोलन करने वाले नहीं, बल्कि अपने बच्चों को शिक्षित करने की प्रक्रिया में आत्मसुख पाने वाले (अपवाद हर दौर में होते हैं, …

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बहुत बदला गांव, पर कुछ अनमोल खो गया

  हरिवंश ग्राम्य जीवन को गांधी ने भी नजदीक से देखा था और उनका सही निष्कर्ष था कि इन गांवों को स्वायत्त बनाकर विकसित करना ही भारत के हक में होगा। शायद गांव की सांस्कृतिक धारावाहिकता या पुरातनता के कारण ही मुहम्मद इकबाल को लिखना पड़ा- यूनां, मिस्र, रोमा, सब मिट गए जहां से, बाकी …

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बचपन में समझते थे कि जगदीश बाबू जेपी के घर के हैं…

हरिवंश एक बार चंद्रशेखर जी से मैंने कहा कि आज जो भी राजनेता हैं वे सभी अपने संसदीय या विधानसभा क्षेत्र के विकास में डूबे हुए हैं. जयप्रकाश जी का यह गांव पीछे छूट गया था, आपने कुछ काम कराया. उनका जवाब था देखो, उत्तर प्रदेश से कितने प्रधानमंत्री और बड़े नेता हुए. हाल की …

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स्मृतियों में अटका मेरा गांव

हरिवंश जहां मैं पैदा हुआ, उस गांव का नाम सिताबदियारा है. थोड़ा समझना शुरू किया, तो पता चला कि गांव में कुल 27 टोले हैं. यह गांव दो नदियों ‘गंगा और घाघरा’ के बीच है. गांव के उत्तर घाघरा या सरयू, तो दक्षिण में गंगा. चौथी क्लास में पहुंचा तो पता चला कि यह गांव …

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