वर्षा वर्मा
लखनऊ: आज की नारी ममतामयी है त्यागमयी है महिलाएं त्याग के बलबुते पर समाज के हर क्षेत्र में अपना परचम लहरा रही है। विशेष रूप से खेती किसानी की बात करें तो भारत में बड़ी संख्या में महिला किसानों ने खेती किसानी का काम संभाल लिया है और सफलता पूर्वक व्यवसायिक कृषि कर रही हैं। आईये आपको उत्तर प्रदेश के मैनपुरी की रहने वाली एक ऐसे ही प्रगतिशील किसान से परिचय कराते हैं जिन्होंने ऐसा ही कुछ कर दिखाया है जो अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बना है।
बड़ी बात ये हैं कि वो गृहिणी तो हैं ही साथ ही एरोपोनिक तकनीक का इस्तेमाल कर केसर की खेती से अच्छी कमाई कर रही हैं। यानी सब कुछ खुद ही सीखा और खुद ही संवारा। इतना ही नहीं उन्होंने इसके बारे में रिसर्च की और परिवार की सहायता से केसर की खेती की शुरुआत की एक साल पहले शुरू किए अपने काम से उन्हें 10 लाख रुपये की आय प्राप्त हुई।
दरअसल 64 वर्षीय गृहिणी शुभा भटनागर की खेती में रुचि थी। वे गांव की महिलाओं के जीवन में कुछ अच्छे बदलाव लाने की इच्छा के चलते उन्होंने व्यवसायों की शुरुआत की आज उन्हें इसका फायदा मिल रहा है। साथ ही उनके फार्म में लगे लोगों को भी फायदा मिल रहा है।
खेती करने में परिवार ने दिया साथ
भारत और कश्मीर में केसर की पारंपरिक खेती होती है। लेकिन शुभा ने जलवायु जैसे जोखिम और चुनौतियों के बावजूद उत्तर प्रदेश में इनडोर केसर की खेती करने का निर्णय लिया है। इस काम में उनके पति संजीव ने बेसिक इन्फ्रास्ट्रक्चर में मदद की बेटे अंकित और बहू मंजरी ने तकनीकी और व्यवस्था को चलाने में मदद की।
स्टोर रूम से शुरू करी खेती
शुभा ने अपने घर के 560 वर्ग फीट के स्टोर रूम को केसर की खेती के लिए कोल्ड रूम में तब्दील किया है। इसमें केसर की खेती के अनुकूल वातावरण बनाने के लिए चिलर, ह्यूमिडिफायर, CO2 सेंसर और लाइट की खास व्यवस्था की गई है। उन्होंने खेती के लिए कश्मीर के पंपोर से केसर के बल्ब मंगाए हैं। जिनकी क्वालिटी बहुत अच्छी है। उन्हें 1000 किलोग्राम बल्बों से लगभग 800 ग्राम से 1 किलोग्राम केसर की पैदावार मिल रही है।
व्यापार में बढ़ोतरी
अपने व्यापार के विषय में शुभा कहती हैं कि केसर की खेती की फसल आने में लगभग 3-4 महीने लगते हैं। हम कहीं भी नियंत्रित वातावरण में केसर की खेती कर सकते हैं। इससे हमारी विदेशों पर विशेष रूप से अफगानिस्तान और ईरान से भारत में केसर की बड़ी मात्रा में आयात पर निर्भरता दूर होगी। शुभा का फार्म अभी इंस्टाग्राम, वॉट्सऐप के जरिए सीधे उपभोक्ताओं को केसर बेचता है। जिसकी कीमत 750 रुपये प्रति ग्राम है।
क्या है भविष्य की योजनायें
अपने आगामी योजनाओं के विषय में शुभा कहती हैं कि वे आगामी अक्टूबर में ई-कॉमर्स साइट्स पर भी बिक्री शुरू करने की योजना बना रही हैं। क्योंकि इन दिनों हेल्दी गिफ्ट्स और कई कार्यक्रमों में केसर भेंट करने का चलन बढ़ा है। ऐसे में उनकी कंपनी के केसर की डिमांड काफी बढ़ गई है। और तो और अब वो प्रमुख शहरों में केसर बेचती है। साथ ही साथ वे भविष्य में विस्तार के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों में केसर बेचने के लिए मार्केट खोज रही है।
अन्य महिलाओं के लिए संबल बनी शुभा
शुभा स्वयं तो व्यवसाय में पारंगत हैं हीं साथ ही उनकी कंपनी में लगभग 22 ग्रामीण महिलाएं काम कर रही हैं। उनकी सोच है कि भारत के युवा ग्रामीण इलाकों में कुछ नया करके ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दे सकते हैं और अधिक से अधिक रोजगार पैदा कर पलायन को रोक सकते हैं।
