तेज हवाओं, भारी बारिश से ​हो सकती बागवानी फसलें बर्बाद, IMD ने दिए सुझाव

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पूजा

 

नई दिल्ली:  पूर्वी और मध्य भारत में 20 से 22 मार्च तक मौसम में तेजी से बदलाव होने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार इस दौरान कई जगहों पर भारी बारिश, तेज हवाएं, बिजली और बर्फबारी का काफी प्रभाव पड़ सकता है। खासतौर पर इसका असर बागवानी और पशुपालन से जुड़े लोगों के जीवन पर देखने को मिल सकता है। ऐसे में किसानों की खड़ी फसलों और बागवानी को बर्बाद होने से बचाने के लिए भारत मौसम विज्ञान विभाग यानी आईएमडी ने सूचना जारी किया है। ताकि किसानों को होने वाले नुकसान से बचाया जा सके। आईएमडी की ओर से जारी इस एडवाइजरी में किसानों को कठोर मौसम से फसलों को बचाने के बारे में जानकारी दी गई है।

 

 

तेज हवाओं का असर फसलों पर
तेज हवाओं और बर्फ़ीली बारिश के कारण सबसे ज्यादा प्रभाव कृषि क्षेत्र पर पड़ने की संभावना है। विशेष रूप से गेहूं, चना और मसूर जैसी खड़ी फसलों पर भारी बारिश का असर देखा जा सकता है। बर्फ़ीली बारिश से फसलों को क्षति हो सकती है। और नुकसान की स्थिति में किसानों की फसल बर्बाद होने की संभावना बढ़ सकती है।

क्या करें बचाव के लिए
किसानों को अपनी फसलों को नुकसान से बचाने के लिए पहले से सुरक्षा उपायों को अपनाना चाहिए। तेज हवाओं के कारण बागवानी फसलों को भी खतरा हो सकता है, इसलिए इन फसलों को सुरक्षित करने के लिए उचित इंतजाम करें
यदि संभव हो, तो फसलों को ढकने के लिए जाली या तंबू का प्रयोग करें सकते है। ताकि बर्फ़ीली बारिश से नुकसान कम हो सके

बागवानी फसलों को ज्यादा नुकसान
तेज हवाओं और बारिश के कारण बागवानी फसलों को भी नुकसान हो सकता है। आम, आमला, संतरा, और अन्य बागवानी फसलों को खासा नुकसान हो सकता है। तेज हवाओं से इन फसलों के पेड़ गिर सकते हैं और फल गिरने की संभावना बढ़ सकती है। इससे फसल का उत्पादन कम हो सकता है।

 

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बागवानी के पेड़ों को सुरक्षित करने के लिए मजबूत खंभों का उपयोग करें। यदि मुमकिन हो तो पेड़ों को अस्थायी ढंग से सहारा दें, ताकि वे तेज हवाओं से गिरने से बच सकें। फलदार पेड़ों के नीचे पानी को जमा होने से रोकने के लिए उचित जल निकासी व्यवस्था करें।

दरअसल, इस मौसम में बिजली गिरने की भी संभावना भी हो सकती है। जो खेतों, बागों और खुले क्षेत्रों में विशेष खतरे का कारण बन सकती है। ऐसे में पशुओं को खुले में ना बांधें। इसके अलावा, गरज के साथ बारिश किसानों और स्थानीय निवासियों के लिए भी खतरे की घंटी हो सकती है। बिजली गिरने के कारण आग लगने की घटनाएं भी हो सकती है।

बचाव के लिए करें यह उपाय
. खुले स्थानों में काम करते समय सुरक्षा उपायों का ध्यान रखें।
. खेतों में काम करते समय सावधानी बरतें और बाढ़ के कारण जलजमाव से बचने के लिए अपने उपकरणों को सुरक्षित रखें।
. बच्चों और बुजुर्गों को घर के अंदर ही रखें, खासकर जब बर्फ़ीली बारिश की संभावना हो।

20 से 22 मार्च 2025 के बीच पूर्वी और मध्य भारत में मौसम में बदलाव की संभावना है, जो कृषि, बागवानी और आम जन-जीवन पर प्रभाव डाल सकता है। किसानों और स्थानीय निवासियों को इस दौरान अपनी फसलों, बागवानी और घरों को बचाने के लिए सुरक्षा उपायों को अपनाना चाहिए। इसके अलावा, यातायात और यात्रा के दौरान भी सावधानी बरतना आवश्यक है।

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