गेहूं की खेती की इस विधि से करें बुवाई, पैदावार होगी दोगुनी

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कांता श्री

नई दिल्ली: किसान अ्गर सही तरीके से गेहू की खेती कर तो आप भी गेहूं की खेती कर दोगुनी पैदावार कर सकते है। गेहूं की खेती करते और उसकी सही देखभाल करके आप लाखों का मुनाफा कमा सकते है।

गेहूं बुवाई का सही समय
रबी फसलों की बुआई का मौसम आ गया है। गेहू की फसल रबी फसलों की एक महत्वपूर्ण फसल है। अक्टूबर-नवंबर महीने में गेहूं की बुवाई शुरू हो जाती है। ऐसे में हमारे किसान भाईयों की चिंता होती है कि वे गेहूं की कौन सी किस्म लगायें जिससे उनकी पैदावार बेहतर हो। यदि आप भी गेहूं की उन्नत किस्मों की बुवाई करना चाहते हैं तो गेहूं की बुवाई में सबसे ज़रूरी होता है सही बीजों का चुनाव, क्योंकि जितने अच्छे बीज होंगे,तो उत्पादन भी अच्छा मिलेगा ही बाकी खर्चों में भी कमी आ जाती है।

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गेहू की बुवाई का सही समय अक्टूबर से नवंबर के बीच का समय होता है, क्योंकि इस समय अच्छी फसलों की बुवाई की जाती है। इसके बाद, दिसंबर से पहले और देरी से उगने वाली फसल बोई जाती हैं। गेहूं की बुवाई से पहले खेत की जुताई कर उसे नमी युक्त बनाना चाहिए, ताकि फसल अच्छी तरह से जम सके।

बुवाई से पहले कर लें तैयारी
अगर आप अक्टूबर से नवंबर के बीच गेहू की बुवाई कर रहे हैं,तो भूमि के लिए बीज सही होता है। यदि आप देर से बुवाई कर रहे हैं, तो बीज सही मात्रा में बढ़ाकर बुवाई करनी पड़ती है। उर्वरकों में संतुलन बनाए रखना भी जरूरी है। गोबर की खाद की कमी होने पर हमें नाइट्रोजन, यूरिया,फास्फोरस,और न्यूरोटा पोटाश का इस्तेमाल करना चाहिए। इसके साथ ही बुवाई के समय सल्फर और जिंक सल्फेट का प्रयोग करना अधिक लाभकारी होता है। गेंहू की बुवाई करना अधिक लाभकारी होता है, क्योंकि इसमें बीज और उर्वरक दोनों साथ-साथ डाले जाते हैं और जमाव के साथ ही पौधों को पोषक तत्व मिलने लगते हैं। पहली सिंचाई कुछ ही दिनों के बीच करनी चाहिए इसके साथ नाइट्रोजन यानी यूरिया का इस्तेमाल आवश्यक करना चाहिए है। गेहूं की फसल में उर्वरक और पानी का संतुलन बहुत महत्वपूर्ण है।

 

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