प्रधानमंत्री जहां हर घर में शौचालय की बात कर रहे हैं, वहीं बांदा में एक गांव ऐसा भी है जहां शौच के लिए भूमिहीन दलितों को खेत मालिकों की मनमानी का होना पड़ता है शिकार।
बांदा: देश भर में स्वच्छता अभियान चलाया जा रहा है। शौचालय बनाये जा रहे हैं। खुले में शौच मुक्त जिले,प्रखंड, गावं की सूचना भी जगह—जगह से मिल रही है। लेकिन उत्तर प्रदेश में एक गांव ऐसा भी है जहां वहां के दलित बासिंदो पर इसलिए भूमि मालिकों के यहां काम करना होता है क्योंकि उन्हें उनके खेत में शौच करने की इजाजत मिले। यह गांव है उप्र के बांदा स्थित अतर्रा कस्बे से जुड़े गांव भुजवन पुरवा। यहां के भूमिहीन दलितों को खेत मालिकों की का शिकार होना पड़ रहा है।
घर में अभी तक शौचालय न होने के चलते उन्हें गांव के खेतों में शौच के लिए जाना पड़ता है। इस पर खेत मालिक उनसे शौच करने के बदले खुद के खेतों में मजदूरी की शर्त रखते हैं। हालांकि इसके लिए उन्हें मजदूरी भी दी जाती है। भुजवनपुरवा के दलित लोटन, बुद्ध विलास, बच्चीलाल, मुन्नीलाल, मीरा, राजदुलारी आदि ने बताया कि अभी तक उनके घरों में शौचालय नहीं बनवाए गए हैं। जिससे उन्हें मजबूरी में दूसरे के खेतों में शौच के लिए जाना पड़ता है। इस पर खेत मालिक समय-समय पर खेतों पर काम करने की शर्त रखते हैं। उनका कहना है कि या तो हमारी मजदूरी करो वर्ना हमारे खेतों में शौच के लिए मत जाओ।
क्या कहते हैं पीड़ित
पीड़ितों ने बताया कि सरकार भी उनका साथ नहीं दे रही है। एक साल पहले 42 लोगों को आवासीय पट्टे हुए थे। लेकिन, आज तक उनकी माप कराकर कब्जा नहीं दिलाया गया है। जिसके चलते उन्हें झोपड़ियों में रहना पड़ता है। जब भी लेखपाल से कहा जाता है तो वह पैसों की मांग करते हैं। इसी तरह पहले राशन कार्ड बने थे जो बाद में जमा हो गए। जिससे उन्हें लाभ भी नहीं मिल पा रहा है। ग्रामीण जाब कार्ड भी न होने की बात कह रहे हैं। इस मामले पर ग्राम प्रधान ब्रजजीवन ने बताया कि पट्टे की जानकारी तो नहीं है लेकिन जॉब कार्ड बने हुए हैं। रही शौचालय की बात तो अब शौचालय आधा पहले बनवाना होता है। तब आधा पैसा दिया जाता है। फिर उसे पूरा करने पर बाकी पैसा सीधे खाते में भेजा जाता है। लेकिन, यह लोग पहले पैसा चाहते हैं जो अब नियम ही नहीं है।
क्या कहते हैं अधिकारी
तहसीलदार हनुमान सिंह ने बताया कि राशन कार्डो का सत्यापन चल रहा है। पात्र होने पर उन्हें आवेदन करना चाहिए। वहीं रही पट्टे की बात तो आज तक कोई भी अपनी शिकायत लेकर नहीं आया है। यदि कब्जा नहीं मिला तो उसके लिए अधिकारियों से मिलना चाहिए। बावजूद इसके पूरे मामले की जानकारी की जा रही है। (दैनिक जागरण से साभार)

