बिहार झांकी में ‘‘चंम्पारण सत्याग्रह‘‘ का सम्मोहक नजारा

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अपराजिता संतोष

नई दिल्ली, गणतंत्र दिवस-2016 के राष्ट्रीय परेड में प्रदर्शन हेतु 1917 में महात्मा गाँधी द्वारा बिहार की धरती पर प्रारम्म की गई ‘‘चम्पारण सत्याग्रह‘‘ के जीवन्त दृश्य को प्रदर्शित करेगा। इस बाबत सभी तैयारियां पूरी कर ली गयीं हैं। बिहार की झांकी सज धज के अपनी छटा बिखेरने हेतु लगभग तैयार है। बिहार झांकी के प्रदर्शन में इस वर्ष ‘‘चम्पारण सत्याग्रह‘‘ आन्दोलन को इसके ‘‘शताब्दी वर्ष‘‘ में दर्शाने का प्रयास किया जा रहा है।champaran 2 (3)

महात्मा गाँधी ने भारत में इस सत्याग्रह के माध्यम से देश में अपनी पहली महत्वपूर्ण स्वतंत्रता संग्राम की कड़ी की शुरूआत की। उन दिनों चंपारण के किसानों को अंग्रेजों ने यह बाध्य कर रखा था कि वे अपने खेतों में ‘‘तीन कठिया‘‘ प्रथा के अनुरूप एक बीघा जमीन जिसमें 20 कठा होता है, के तीन कठा खेत में ‘‘नील‘‘ की खेती अवश्य करें। नील की खेती हेतु किसानों की जमीन का पट्टा लिखवाने की बाध्यता ही सारी समस्या की जड़ थी। प्रत्येक वर्ष की खेती की शुरूआत से पहले एक अत्यंत ही अल्प अग्रिम राशि के एवज में पटटा पर जमीन देना अनिवार्य था। इस भुगतान का आधार उत्पादित फसल की मात्रा पर निर्भर नहीं था बल्कि किसानों द्वारा नील उत्पादन कार्य हेतु समर्पित खेतों की जमीन की मात्रा पर आधारित था। वास्तविकता यह थी कि चंपारण के किसानों का अंग्रेजों द्वारा शोषण किया जा रहा था। इस पट्टा प्रथा से मुक्ति हेतु वे भारी रकमों के मुआवजे की माँग करते थे, जो किसान चुकाने में असमर्थ थे। इस शोषण से मुक्ति के लिए राजकुमार शुक्ल के नेतृत्व में स्थानीय किसानों ने महात्मा गाँधी को संघर्ष चलाने के लिए आमंत्रित किया। गाँधी जी के वहां पहुँचने पर अंग्रेज जिलाधिकारी ने चंपारण छोड़ने का आदेश दिया, परन्तु गाँधी जी ने उसे मानने से इनकार करते हुए किसानों के शोषण के विरुद्ध ‘‘सत्याग्रह‘‘ आन्दोलन की शुरूआत की और अंततः अपने संघर्ष में कामयाब भी हुए, जो बस्तुतः गाँधी के भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन के संघर्ष के इतिहास में पहली सफलता साबित हुई।

champaran (3)झांकी के आगे के हिस्से में (ट्रेक्टर) युवा गाँधी जी को नील पौधों से घिरे दर्शाया गया है। ट्रेलर भाग के प्लेटफार्म और पार्श्व भितियों पर चंपारण के गरी़ब किसानों पर अंग्रेजों द्वारा किए गए हिंसा और अत्याचार को दर्शाया गया है।

गौरतलब है कि 21 जनवरी को शाम के समय रविन्द्र रंग शाला परिसर में झांकियों से जुड़े सांस्कृतिक टोली द्वारा प्रर्दशित सांस्कृतिक कार्यक्रम के उपलक्ष्य में रक्षा मंत्रालय द्वारा चयनित कुल 5 राज्यों के टोली को ट्राफी वितरित की गई। उक्त कार्यक्रमों में भी बिहार को एक ट्राफी से सम्मान्नित किया गया।

 

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