ड्रिप सिंचाई सिस्टम से किसानों को राहत, इन बातों का जरूर रखें ध्यान

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पूजा श्याम

 

drip irrigation:  किसानों को खेती करने के बाद सिंचाई करने में परेशानी होती थी इतनी मोटी पाइप को बिछाना और पकड़ कर खेतो में घुमना पड़ता है। हलांकि जब से ड्रिप सिंचाई सिस्टम आया है इसे किसानों को राहत मिली है। इसके अलावा ड्रिप सिंचाई सिस्टम का खर्चा अत्यधिक है। इस बाबत खेतों में इसे लगाने से किसानों का लाख-दो लाख का खर्च हो जाता है। और इसकी देखभाल भी ठिक से करनी पड़ती है। अच्छी बात ये है जल उपयोग इफिसिएन्सी अधिक होने पर 50 से 70 प्रतिशत जल की बचत होती है। ऊबड़-खाबड़ क्षेत्रों में बिना लेवलिंग किए प्रयोग किया जा सकता है। कई साल तक यह खराब भी नहीं होता अगर बिना किसी बाधा के इस सिस्टम का सबसे अच्छा प्रयोग करना चाहते है तो ड्रिप सिस्टम की नियमित देखभाल सबसे जरूरी है।

इन बातों का रखें ध्यान
1. जिस जगह सिस्टम लगा है, वहाँ पर जानवरों का जाना प्रतिबन्धित होना चाहिए अन्यथा सिस्टम को नुकसान पहुंच सकता है।
2. लेटरल लाइन के जो हिस्से खराब हो जाये या ड्रिपर टूट जायें उन्हें तुरतं बदल देना चाहिए।
3. फिल्टरों की रबड़, वाल्व और अलग-अलग फिटिंग्स की जांच नियमित रूप से करते रहना
4. सब प्लान्ट का साईज सामान्यतः 1 से 2 एकड़ रखना चाहिए कि उसके दानों ओर सिंचाई की जा सके।
5. इस पर दबाव का ध्यान रखें ताकि पाइप फटे नहीं।
6. ड्रिपरों से नम किए जाने वाले क्षेत्रफल का लगातार निरीक्षण करते रहना चाहिए और उसमें किसी तरह की असमानता पाई जाती है तो तुरंत कार्रवाई करें। कि सिस्टम में कहीं गड़बड़ तो न​ही।
7. लैटरल पाइपों के अवांछित छेदों को गूफ प्लग के द्वारा बंद किया जा सकता है। यदि लैटरल पाइप कटा हुआ है तो सीधे जोड़क द्वारा जोड़ा जा सकता है।
8. उपमुख्य पाइप के सिरों पर फव्वारा वाल्व और लैटरल पाइपों के खुले सिरों को एंडकैप से बंद रखना चाहिए। यदि इन्हें खुला रखा जाए तो इन बिंदुओं पर दबाव में कमी आने के साथ-साथ पानी की कमी हो सकती है।
9. कटाई के समय ट्रैक्टर या बैलगाड़ी खेत में नहीं लाना चाहिए। ये पाइपों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
10. यदि कुछ ड्रिपरों से पानी की फुहार निकल नहीं रहा तो इसका कारण चकती या दाब अतिपूरक ड्रिपर्स से रबर का डायफ्राम गिर जाना हो सकता है जिसे तुरंत लगाना चाहिए।
11. यदि ड्रिपर कुछ दिनों के लिए बंद रहे तो संभव है कि मकड़ी या अन्य कीट अपना जाल बना लें जिससे पानी की निकासी कम हो सकती है। इसलिए नियमित रूप से ड्रिपर्स को खोल देना चाहिए।
12. बरसात के मौसम में खेत में बिछे सभी लैटरल पाइप को ढक देना चाहिए।
13. प्रति सप्ताह एक बार बलुई फिल्टर का ढक्कन खोल कर फिल्टर के भीतर की रेत को हाथ से मसल कर कूड़ा-कचरा बाहर निकाल देना चाहिए।
14. जालीदार फिल्टर का ढक्कन खोलकर अंदर का फिल्टर को अच्छे से साफ करना चाहिए। इससे पानी अधिक आता है और फव्वारा भी अच्छा बनता है।

 

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इन जरूरी बातों का ध्यान रखते हुए किसान अपने ड्रिप सिंचाई सिस्टम को कई साल तक चला सकते हैं। उसमें कोई जल्दी खराबी नहीं आएगी। अगर देखभाल ठीक से न करें तो सिस्टम खराब होने पर मरम्मत का खर्च अधिक होगा।

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