भारत को बलशाली बनाना है तो बेटियों को समझें भाग्यशाली: रामदास अठावले

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संतोष कुमार सिंह
नयी दिल्ली: केद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य म़ंत्री रामदास अठावले ने इस बात पर चिंता जताई कि आज भी भारत में कुछ लोग भ्रूण हत्या के काम में लगे हुए हैं। उन्होंने कहा कि यह बहुत शर्म की बात है। जो भी लोग ऐसे कार्य में लगे हुए हैं,उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दी जानी चाहिए। सरकार इस दिशा में कठोरता से कदम उठाएगी। अठावले ने कहा कि भारत को बलशाली बनाना है तो बेटियों को भाग्यशाली बनाना होगा। राज्य मंत्री राष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर दीप वेलफेयर आॅर्गेनाईजेशन द्वारा आयोजित  ‘गर्ल चाईल्ड सर्वावाइवल एंड ग्रोथ’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्टि को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर अठावले ने संस्था द्वारा जा​री सोवेनेयर ‘लावण्या’ का विमोचन किया।

कार्यकम की अध्यक्षता कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता विक्रम दत्त ने बड़ी संख्या में शामिल किशोरियों से सीधा संवाद करते हुए उन्हें शपथ दिलाई कि यदि कोई भी उनसे शादी के लिए दहेज मांगती हैं तो वे उन्हें सीधा मना कर देंगी।आज समाज ,सरकार और सिविल सोसाइटी सभी को एक साथ मिलकर कार्य करने की जरूरत है। हम बालिकाओं के प्रति संवेदनशील नहीे हुए तो आने वाले दस सालों में लिंगानुपात इतना बढ़ जाएगा कि कई पुरूष ऐसे होंगे जिन्हें शादी के लिये लडकियां नसीब नहीे होनेवाली है
टीवी पत्रकार राखी बख्शी ने अपने संबोधन में कहा कि आज जीवन का कोई भी क्षेत्र नहीं बचा है जहां महिलाएं अपनी भूमिका नहीं निभा रही हैं। न सिर्फ लड़कियों की अपितु ल​ड़कों की समस्याओं को सुनते हुए समाज को रास्ता निकालना होगा। उन्हें आत्मसम्मान और उनके पसंद के काम करने के अवसर देने होंगे। देश की आधी आबादी को यदि आप इग्नोर कर देंगे तो देश कैसे आगे बढ़ सकता है। हमें यह समझना होगा कि ये हमारी मुख्य मानव संसाधन हैं।
झारखंड के सुदूर गांव से आयी एनजीओ कार्यकर्ता नीना पाण्डे ने क​हा कि माताएं स्वावलंबी नहीं होंगी तो बच्चियों को आत्मनिर्भर बनाने में बहुत बाधा है। आर्थिक स्वालंबन के लिए सरकार को एनजीओं की गतिविधियों में सहयोग देना चाहिए।

वहीं लड़कियों के डॉक्यूमेंट्री एवं अन्य कार्यक्रमों के जरिए उनके सुधार में योगदान दे रहीं सपना ने इस बात की ओर ध्यान दिलाया कि कुछ लड़कियां शादी के बाद अपने ससुराल के परिवार का जीवन दुश्वार कर देती हैं। उन्होंने कहा कि उस परिवार को भी अपना समझें तभी बेटी बचाने का फायदा है। पेशे से शिक्षक डॉ गौर ने बालिका शिक्षा को बराबरी का हथियार बताते हुए कहा कि वैसे तो समाज बालिकाओं के पढ़ाई के प्रति संवेदनशील हो रहा है। लेकिन जैसे—जैसे यह दर बढ़ेगा महिलायें समाज में आगे आएंगी और बराबरी का दर्जा प्राप्त करेंगी।
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ट अधिवक्ता प्रबोध कुमार ने एनडीटी एक्ट में सुधार करने कि जरूरत है दंड के प्रावधान को और कठोर बनाने की आवश्कता है। उन्होंने कहा कि सरकार ने कानून बनायें हैं लेकिन इस कानून के प्रति जागरूकता बढ़े तभी बात बन सकती है।
कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में उपस्थित लड़कियों का हौसला आफजाई करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता डॉ इंदिरा मिश्रा ने शायरी के जरिए अपनी बात कही। उन्होंने कहा कि
”खामोश मिजाजी तुम्हें जीने नहीं देगी
इस दौर में जीना है तो कोहराम मचा दे।”
इस परिचर्चा का संचालन करते हुए दीप के सचिव अजय प्रकाश पांडे ने सेमिनार में देश के अलग अलग हिस्सों से आये प्रतिनिधियों को पिछले पांच सालों से संस्था द्वारा देश के विभिन्न हिस्सों में चलाये जा रहे गतिविधियों की जानकारी दी । कार्यक्रम में दीप वेलफेयर द्वारा संचालित विभिन्न सेंटर के लडकियां बड़ी संख्या में उपस्थित थीं।

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