व्यस्त रूटों पर चलेंगी नान एसी ट्रेनें
देश के अंदर राज्यों खासकर उत्तर प्रदेश और बिहार से प्रतिवर्ष हजारों की संख्या में मजदूर रोजी कमाने के लिए महानगरों की तरह पलायन करते हैं। जाहिर है कि वे कहीं भी जाने के लिए ट्रेन से ही सफर करते हैं ऐसे में शादी-ब्याह के सीजन को तो छोड़ ही दें, आम दिनों में भी ऐसे रूटों पर यात्रा करना जनमानस के लिए अत्यधिक कष्ट पूर्ण साबित हो जाता है।
रेल गाड़ियां अपनी क्षमता से लगभग 4 गुना भीड़ को लेकर चलती हैं। जिसकी वजह से रेल दुर्घटनाओं में अधिक जान की क्षति का खतरा भी रहता हैं।
अप्रैल से लेकर जून तक जनरल बोगियों की बात तो दूर यात्री जिनकी स्लीपर बोगियों में सीटें कंफर्म होती हैं वह भी बहुत मुश्किल से ट्रेनों में चढ़ पाते हैं। यह स्थिति बिहार से महानगरों की तरफ जाने वाली प्रत्येक रेल गाड़ियों में देखने को मिलती है।
इन्ही असुविधाओं को देखते हुए रेल मंत्रालय ने व्यस्ततम रूटों पर जनसाधारण की सहज यात्रा के लिए बड़ा निर्णय लिया है। अब व्यस्ततम रूटों पर नई ट्रेनें चलाई जाएंगी। इन ट्रेनों की खासियत यह होगी कि इनकी सभी बोगियां जनरल एवं स्लीपर होंगी। इन ट्रेनों के चलने से निम्न आय वर्ग के लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।
दुनिया के सबसे बड़े राष्ट्रीय उपक्रमों में भारतीय रेल, भारत का सबसे बड़ा उत्थान है। भारतीय रेल इस महाद्वीप के 7172 से अधिक स्टेशनों को जोड़ते हुए प्रतिदिन 12617 गाडि़यों में 2 करोड़ 30 लाख से ज्यादा यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाती है.
के अनुरूप यह आंकड़ा छोटा ही है। बिहार,उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल तथा ओडिशा से सर्वाधिक लोग प्रतिदिन ट्रेनों से यात्रा करते हैं। इन राज्यों से दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु तथा चेनाई जैसे बड़े शहरों की तरफ जाने वाली ट्रेनों में ट्रेन क्षमता से कहीं अधिक लोग यात्रा करते हैं। और यह यात्री अधिकतर मध्यम आयु वर्ग के होते हैं जो सवारी के लिए अत्यधिक किराया वहन नहीं कर सकते हैं। इस बुनियादी समस्या पर देर से ही सही केंद्र सरकार की नजर पड़ी है। इसी समस्या को दूर करने के लिए यह कदम उठाया गया है।
यह ट्रेनें तोहारो के समय चलाई जाने वाली ट्रेनों से अलग होंगी। व्यस्त रूटों पर यात्रियों की अधिकता का आकलन करने के बाद निर्णय लिया जाएगा कि किस रोड पर सप्ताह में कितने दिन इन ट्रेनों का संचालन किया जाए। रेल मंत्री अश्विन वैष्णव ने बताया कि देश की विभिन्न रेल मार्गों पर रेल यात्रियों की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए एक सर्वे के बाद यह निर्णय लिया गया है। प्रस्तावित इन ट्रेनों के नाम क्या होंगे अभी इस पर विचार किया जा रहा है सूत्रों के अनुसार इनके नाम वंदे भारत की तर्ज पर वंदे शब्द से जोड़कर ही रखे जाएगा।
