संतोष कुमार सिंह
नयी दिल्ली: तकनीकि ने संवाद के तौर तरीकों को बदल दिया है। अब आप अपने जनप्रतिनिधियों से सीधा संवाद कर सकते हैं। सवाल पूछ सकते हैं। योजनाओं की जानकारी ले सकते हैं। अपनी बात रख सकते हैं,उनकी बात सुन सकते हैं। राधामोहन सिंह के नेतृत्व में कृषि मंत्रालय ने इस दिशा में तेजी से कदम बढ़ाया है। केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह इस सप्ताह देश भर के कृषि विज्ञान केन्द्रों के अधिकारियों, वैज्ञानिकों और राज्य स्तर के सभी कृषि अधिकारियों से वीडियो कांफ्रेंसिग के जरिए रूबरू हुए। एक घंटे के वीडियो कांफ्रेंसिग के दौरान कृषि मंत्री 12 पहाड़ी और मैदानी राज्यों के कृषि विज्ञान केन्द्रों के अधिकारियों, वैज्ञानिकों और कृषि, पशुपालन, मछली पालन, बागवानी के राज्य स्तर के अधिकारियों और लाभार्थी किसानों से विस्तुत बातचीत की।

इन राज्यों से हुई बातचीत
कृषि मंत्री के वीडियो कांफ्रेंसिंग में जिन राज्यों ने हिस्सा लिया उनके नाम हैं- असम, अरूणाचल प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा। कृषि मंत्री ने पहले आधे घंटे में अधिकारियों और किसानों के सामने अपनी बात रखी और बाद के आधे घंटे में उनके सवालों के जवाब दिए।
केवीके जुड़े लोगों से बातचीत करते हुए कुषि मंत्री ने आह्वान किया कि वे किसानों की आय बढ़ाने के लिए किसानों की हर संभव मदद करें। साथ ही किसानों से कृषि मंत्री ने आह्वान किया कि वे धान की कटाई के बाद खेतों में बचे पुवाल ना जलाएं क्योंकि यह पर्यावरण को बहुत नुक्सान पहुंचाता है। पुवाल का इस्तेमाल जैविक खाद, पेपर कार्ड बोर्ड उद्योग, मशरूम उत्पादन और पशुओं के चारे के रूप में किया जा सकता है।
राधामोहन सिंंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिक्किम को प्रथम जैविक राज्य घोषित किया है। उन्होंने कहा कि वैसे तो हिमालयन क्षेत्र में जैविक खेती का प्रचलन है लेकिन जैविक खेती को अधिक ऊपजाउ बनाने के लिए सतत तकनीकी विकास की आवश्ययकता है। आज जरूरत इस बात की है कि जैविक खेती को प्रोत्सानहित कर पूरे विश्वे के लिए जैविक उत्पाद उगाये जायें जिससे किसानों को अच्छी आमदनी हो सके।
नकदी फसल पर हो जोर
कृषि मंत्री ने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में सेब, नाशपाती, आलू-बुखारा, मालटा, संतरा, अखरोट, चेरी, स्ट्राबेरी के साथ अब किवी और जैतून की भी खेती की जा रही है। मंत्रालय के संस्थान इनके रखरखाव, प्रबंधन और उत्पादन पर काम कर रहे हैं। कश्मीर घाटी में उगायी जाने वाली केसर की मांग पूरी दुनिय़ा में है इसलिए केसर के व्यवसायियों को इसकी खेती की तरफ ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि सब्जियों और फलों को दुर्गम पहाड़ी इलाकों से मैदानी क्षेत्रों में तेजी से पहुंचाने के लिए यातायात का विकास किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर में अदरक और हल्दी की खेती सफलता पूर्वक की जा रही है लेकिन इन्हें विश्व बाजार में स्थापित करने के लिए प्रसंस्करण तकनीकों से इनकी गुणवत्ता का विकास किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में मछली एवं शीतजल मात्सियकी के विकास पर सरकार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि सजावटी मछलियों का पालन, मत्स्य पालन आधारित पर्यटन पर का भी विकास हो रहा है और किसानों को चाहिए कि अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए इन्हें अपनाएं।
गौरतलब है कि कृषि मंत्री ने 19 अक्तूबर को उत्तर भारत के 13 प्रदेशों के किसान विज्ञान केन्द्रों के अधिकारियों और किसानों को सम्बोधित किया था। वहीं दूसरे चरण में 25 अक्तूबर को दक्षिण भारत के 12 प्रदेशों के केवीके प्रतिनिधियों और किसानों ने हिस्सा लिया।
कृषि मंत्री के संबोधन की प्रमुख बातें
• आज जरूरत इस बात की है कि जैविक खेती को प्रोत्सा हित कर पूरे विश्वज के लिए जैविक उत्पातद उगाये जायें जिससे किसानों को अच्छी आमदनी हो सके
• पहाड़ी क्षेत्रों में सेब, नाशपाती, आलू-बुखारा, मालटा, संतरा, अखरोट, चेरी, स्ट्राबेरी के साथ अब किवी और जैतून की भी खेती की जा रही है
• सब्जियों और फलों को दुर्गम पहाड़ी इलाकों से मैदानी क्षेत्रों में तेजी से पहुंचाने के लिए यातायात का विकास किया जाना चाहिए

