पंचायत खबर टोली
मऊ : बदलते मौसम के साथ न सिर्फ इंसान परेशान होते हैं बल्कि मवेशियों को भी कई तरह के मौसमी बीमारियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में जरूरत इस बात की है पशुपालक अतिरिक्त सावधानी बरतें। जीं हां यदि आपके पशुओं में इस मौसम में मुंहपका-खुरपका के साथ गलाघोटूं, चेचक, फड़किया आदि रोग के लक्षण दिख रहे हैं तो उसका तुरंत इलाज कराएं। यदि ऐसा न किया गया तो इन रोगों का प्रसार होगा। इससे बचाव के लिए पशुओं का तत्काल टीकाकरण कराएं। निकटवर्ती पशु सेवा केंद्र पर पशुपालन विभाग द्वारा यह टीका नि:शुल्क लगाया जा रहा है। ठंड के बढ़ते प्रभाव के बीच लापरवाही बरतने का घातक परिणाम हो सकता है।
कृषि विज्ञान केंद्र के पशु वैज्ञानिक डा. वीके सिंह ने बताया कि कोहरा और गलन के साथ ही पशुओं में मौसमी रोग के प्रसार की संभावना बढ़ जाती है। इस समय मुख्यत: मुंहपका-खुरपका के साथ गलाघोटूं, चेचक, फड़किया सहित ठंड लगने पर नमोनिया आदि रोग हो सकते हैं। ऐसे में पशुपालकों को बहुत ही सचेत रहने की आवश्यकता है। पशुपालन विभाग द्वारा नि:शुल्क टीकाकरण किया जा रहा है। पशुपालकों को निकटवर्ती सेवा केंद्र से संपर्क कर तत्काल टीकाकरण करा लेना चाहिए। डा. सिंह ने खानपान के प्रति भी सचेत रहने की बात कही। उन्होंने बताया कि ठंड के मौसम में पशुओें को ताजा पानी डालें। हरे चारे के रुप में बरसीम की दो तिहाई मात्रा से ज्यादा का प्रयाेग करें। पुआल की वनिस्पत भूसा का प्रयोग करें। दुधारु पशुओं को कैल्शियम के साथ संतुलित आहार अवश्य दें। गोबर पतला होने की दशा में तत्काल चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।
क्या है लक्षण
भारत में खासकर गायों व भैंसों में यह बीमारी पायी जाती है। बाधित जानवरों के श्वास-उश्वास, पेशाब गोबर, दूध तथा उसके संपर्क में आने वाली वस्तुओं द्वारा भी यह विषाणु स्वस्थ पशु को संक्रमित करता है। बुखार आना, दूध उत्पादन में कमी होना, मुंह के छाले आने से खाना न खाना या कम खाना, पैरों में खुरों के बीच में घाव होना इसके कारण पशु को चलने में परेशानी होना यह खुरपका एवं मुंहपका विषाणु बाधित जानवरों में पाया जाता है। बकरी और भेड़ में भी यह बीमारी होती है परन्तु बाधित जानवर ऊपरी तौर पर स्वस्थ दिखते हैं। इनके अलावा शूकरों में भी यह बीमारी होती है। इस बीमारी को रोकने के लिए भारत सरकार द्वारा खुरपका एवं मुंहपका नियंत्रण कार्यक्रम देश के कई जिलों में चलाया जा रहा है।
पशुशाला का रखें ध्यान
डा.वीके सिंह ने बताया कि ठंड में पशुशाला को लेकर बहुत ही सतर्क रहना चाहिए। हवा और कोहरा रोकने के सभी उपाय होने के साथ शाम होते ही पशुशाला में अलाव का प्रबंध होना अति अावश्यक है। नवजातों को बाहर निकलने के बाद जूट के बाेरे से ढंकने के साथ उस स्थान पर राख का छिड़काव करना चाहिए। पशुशाला हमेशा साफ व सीलन से मुक्त होना चाहिए। पशु पर ठंड का एहसास होते ही सरसों व अजवाइन के मिश्रित तेल से मालिश करना चाहिए।

