आज से शुरू पूसा कृषि मेला, किसानों ने पाए उन्नत किस्मों के बीज

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Pusa Krishi Vigyan Mela:  देश के सबसे प्रमुख और बड़े कृषि मेले का आयोजन आज से भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली में शुरू हो चुका है। “पूसा कृषि विज्ञान मेला का आयोजन 3 दिनों के लिए किया जाएगा। आज पहले दिन उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान के हाथों हुआ। इसी के साथ कृषि विज्ञान मेले में किसानों को कृषि की नई तकनीकों से अवगत कराने के साथ ही संस्थान द्वारा विकसित नई उन्नत किस्मों के बीज उपलब्ध हुऐं

 

 

संस्थान द्वारा विभिन्न फ़सलों की कु​ल किस्में
पूसा संस्थान द्वारा विभिन्न फ़सलों की उन्नत किस्मों और बायो-फ़ोर्टिफ़ाइड किस्मों का विकास किया गया है। जो उच्च उत्पादकता के साथ बेहतर पोषण सुरक्षा भी प्रदान करती है। वर्ष 2024 के दौरान संस्थान द्वारा 10 विभिन्न फसलों में कुल 27 नई किस्मों का विकास किया गया था। जिनमें गेहूं की 7 किस्में, वहीं चावल की 3, और संकर मक्का की 8, संकर बाजरा की 1, चना की 2, अरहर की 1 संकर किस्म, मूंग दाल की 3, मसूर की 1, डबल जीरो सरसों की 2 और सोयाबीन की 1 किस्म शामिल है।

 

 

संस्थान द्वारा विकसित धान की उन्नत किस्में
पूसा संस्थान ने बासमती धान उत्पादन और व्यापार में श्रेष्ठ किस्मों के विकास के माध्यम से विशाल योगदान दिया है। पूसा बासमती धान की किस्मों में पूसा बासमती 1718, पूसा बासमती 1692, पूसा बासमती 1509 और उन्नत बासमती धान की किस्में जिनमें बैक्टीरियल ब्लाइट और ब्लास्ट रोगों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता है। जैसा की PB 1847, PB 1885 और PB 1886, 2023-2024 में भारत से 5.2 मिलियन टन बासमती धान के निर्यात से 48.389 करोड़ रुपये की आय में लगभग 90 प्रतिशत योगदान करती हैं। ठीक उसी तरह अप्रैल 2024 से नवंबर 2024 तक पूसा बासमती धान से निर्यात आय 31,488 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।

 

संस्थान द्वारा दो छोटे अवधी की धान की किस्में, पूसा 1824 और पूसा 2090 विकसित की गई हैं। जो बाद में रबी की फसल के खेतों की तैयारी के लिए पर्याप्त समय प्रदान करती हैं। पूसा RH 60 एक उच्च उपज वाली, छोटी अवधि वाली, सुगन्धित धान की संकर किस्म है। जिसमें लंबे पतले दाने होते हैं। जो बिहार और उत्तर प्रदेश के लिए सबसे उपयुक्त है। पूसा KN 1 और पूसा CRD KN2 उन्नत कालानमक धान की किस्में हैं। जिनमें बेहतर प्रतिरोधक क्षमता और उच्च उपज, जो उत्तर प्रदेश के लिए अनुशंसित की गई है।

 

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जलवायु अनुकूल किस्मों से रूबरू हुए किसान
जलवायु जोखिम और पोषण के बढ़ते महत्व को समझते हुए पूसा संस्थान में अनुसंधान जलवायु अनुकूल फसल किस्मों और बायोफोर्टिफाइड किस्मों के विकास पर केंद्रित है। जो उच्च उत्पादकता के साथ बेहतर पोषण सुरक्षा प्रदान करता है। इनमें 16 किस्में और 11 संकर हैं। बदलते जलवायु परिदृश्य के तहत पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 10 जलवायु अनुकूल और बायोफोर्टिफाइड किस्मों का विकास किया है। जिसमें 7 अनाज और मिलेट्स, 2 दालें और 1 चारा किस्म शामिल है।

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