थाने में अपराधियों का घूमना और पुलिस वालों द्वारा उसपर ज्यादती की खबरें अब किसी को चौकातीं नहीं, लेकिन यदि किसी थाने में पुलिस वाले मुर्गे की सुरक्षा के लिए काफी सचेत रहें, और लोगों को इसके संबंध में चेतावनी दें तौ चौंकना लाजिमी है। जी हां गाजीपुर जिले में एक थाना ऐसा भी है, जिसे मुर्गे पालने की वजह से जाना जाता है। पुलिसकर्मियों और फरियादियों के बीच तमाम मुर्गे बेधड़क घूमते रहते हैं। थाने में आने वाले हर शख्स को पहले ही चेतावनी दे दी जाती है कि इन मुर्गों को पकड़ना या छूना मना है। शिकार करने पर तो भयानक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। थाने में तैनात पुलिसकर्मियों का तो यहां तक मानना है कि जिसने भी लालच में आकर इन मुर्गों का स्वाद चखा, उस पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ेगा। यही कारण है कि जिले बड़ेसर थाना परिसर में पुलिसवाले और इलाके के अन्य लोग इन मुर्गों को आस्था की निगाह से देखते हैं।
इस बारे में जानकारी देते हुए थाने में तैनात सिपाही इबातद अली ने बताया कि बहुत पहले से ही थाने में एक बाबा की मजार है और लोग अपनी मिन्नते मांगते है और जब उनकी मन की मुराद पुरी होती है तो मुर्गे का चढ़ावा चढ़ाकर जिंद छोड़ देते है। जिसे कोई छुता नहीं है और न ही उस मुर्गे को हलाल किया जाता है। एक भय है कि इन मुर्गों को क्षति पहुंचाने पर काफी नुकसान हो सकता है। जिसके डर से इन मुर्गों को कई टच नहीं करता। वहीं ग्रामीण नंद पासवान का कहना है कि जब थाने का उद्घाटन किया गया था तो उस वक्त काफी संख्या में सर्प, बिच्छु दिखाई दिया करते थे। जिसे यहां पर रहने वाले लोग काफी भयभीत रहा करते थे। लोग इन से छुटकारा पाने की हर जुगत लगाने लगे। तभी कुछ लोगों ने बताया कि एक शहीद बाबा की मजार वहां पर उनकी पूजा, अर्चना करना शुरू कर दीजिए। आस्था और विश्वास के साथ जब लोग पूजा और मिन्नते करने लगे तो उनकी मुरादे पुरी होने लगी। और उनको चढ़ावे के रूप में जिंदा मुर्गा चढ़ाया जाता है और उसे जिंदा छोड़ दिया जाता है। मान्यता है कि इन मुर्गों को जो भी खाने या मारने का प्रयास किया उसका काफी नुकसान होता है। जिसके डर से थाने के कर्मचारी व ग्रामीण इन मुर्गों को क्षति पहुंचाने से भयभीत रहते है। हालांकि थाने पर तैनात करीब पुलिस कर्मी बिना किसी लापरवाही के इन मुर्गों को दाना-पानी और सुरक्षा देते है। दरअसल, बड़ेसर थाने में ही मंदिर और मजार भी है। हर गुरूवार को शहीद बाबा की मजार पर श्रद्धालुओं की भीड़ जमा होती है। यहां मुराद पूरी होने पर लोग मजार पर मुर्गे लाकर छोड़ जाते हैं, जिसकी वजह से थाने में मुर्गों की संख्या बढ़ती जा रही है।

