सांसदों ने बाल संसद में स्वीकारा… प्रत्येक बच्चे के सर्वांगीण विकास और समावेश के लिए खेल आवश्यक

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Nisha Girl, 15 years, XI class from Ajmer District, Rajasthan India interacts at  Bal Samvad - Children’s Interaction with Parliamentarians where there’s an interaction between Children and parliaments MPs where children share their stories, asks to the lawmakers and interact with them.on 16 November 2022 in UNICEF office ,Delhi,India // photograph by Priyanka Parashar
संतोष कुमार सिंह

नई दिल्ली: हमारी पीढ़ि का बचपन ये सुनते हुए ही गुजरा है कि खेलोगे कूदोगे होगे खराब, पढ़ोगे लिखोगे बनोगे नवाब। लेकिन अब वो दौर खत्म हो चुका है। अब माता—पिता बच्चों के पढ़ाई लिखाई के प्रति तो सजग हैं ही साथ ही बच्चों के साथ अब माता पिता को भी समझ आने लगा है कि सिर्फ पढ़ाई ही जरूरी नहीं है बल्कि खेल के जरिए भी बच्चों का भविष्य गढ़ा जा सकता है। उन्हें उंची उड़ान मिल सकती है साथ ही मिल सकती है सामाजिक प्रतिष्ठा। तभी तो देश के हर कोने से अलग-अलग खेलों में खिलाड़ी निकल कर सामने आ रहे हैं और अपनी राष्ट्रीय अंतरर्राष्ट्रीय पहचान गढ़ने में कामयाब हो रहे हैं। लेकिन सिर्फ माता पिता ही समझें या बच्चे ही खेल के महत्व को समझें यही पर्याप्त नहीं है। बात तो तब बने जब राजनीति दलों ओर उनसे जुड़े नेताओं को भी ये समझ आए कि बच्चों के सर्वांगिण विकास में खेल कूद की अहम भूमिका है।
कुछ इसी तरह की कवायद में बुधवार को यूनिसेफ के तत्वाधान में राजनीतिक पार्टियों का प्रतिनिधित्व करते हुए बच्चों के बाल संसद समूह ने (पार्लियामेंट्री ग्रुप ऑफ चिल्ड्रेन) और सांसदों के साथ परस्पर बातचीत का एक सत्र आयोजित किया। बाल अधिकार सप्ताह के अंर्तगत आयोजित इस सत्र में अलग—अलग राजनीतिक दलों के 35 सांसदों ने बच्चों के अनुभवों को सुना। इस दौरान सभी सांसदों ने इस बात पर सहमति दी कि खेल के माध्यम से बच्चों का सर्वांगीण विकास कर भेदभाव को दूर किया जा सकता है।

उल्लेखनीय है कि इस वर्ष विश्व बाल दिवस पर खेलों के महत्व को लक्षित किया गया है कि कैसे खेल के माध्यम से समानता, समावेश और भेदभाव को दूर किया जा सकता है। खेल बच्चों में महत्वपूर्ण जीवन कौशल का विकास करता है, जैसे खेल के माध्यम से नेतृत्व की क्षमता, अनुशासन, समूह में रहकर काम करना, सहनशीलता, कड़ी मेहनत और समन्वय जैसे गुर विकसित किए जा सकते हैं, सीखे जा सकते हैं। ।

सत्र की शुरूआत करते हुए आसाम के युवा सांसद और पीजीसी के अध्यक्ष गौरव गोगई ने इस बाबत अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि हमारा देश तब ही मजबूत बन सकता है जब प्रत्येक बच्चे को वैसा जीवन मिले जैसा कि वो चाहता है। जाति, धर्म, लिंग संबंधी भेदभाव और आय का निम्न स्तर उनके सपनों को प्रभावित करते हैं। वह वो ​हासिल नहीं कर पाते जो वो चाहते हैं। गौरव ने कहा कि हम इस बात पर विश्वास करते हैं कि देश में हर बच्चे को समान अवसरों के साथ सुरक्षित बचपन मिले, विशेष रूप से उन बच्चों कोे जो कमजोर हैं, हाशिए पर जीवन जी रहे हैं। उनके लिए यह बहुत ही जरूरी है।

कार्यक्रम के दौरान अपनी बात रखते हुए भारत के लिए संयुक्त राष्ट्र के रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर, शोम्बी शार्प ने सांसदों को संसद के अंदर और बाहर दोनों जगह बाल अधिकारों का समर्थन करने के लिए धन्यवाद दिया।

जन प्रतिनिधियों और बाल सांसदो के बीच परस्पर संवाद विकसित करने के उद्देश्य से आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान विभिन्न राज्यों के पांच बच्चों ने दृढ़ संकल्प, आशा और उम्मीद से भरी प्रेरणादायक कहानियों को साझा किया। इन बच्चों में मेघालय की सत्रह वर्षीय जोलीना मारक, डीफ्लैम्पिक्स में स्वर्ण पदक विजेता मध्य प्रदेश की 15 वर्षीय गुरांशी शर्मा, राजस्थान की 15 वर्षीय फुटबॉलर निशा, मुंबई की 16 वर्षीय मकसूद और 14 वर्षीय एथलीट तेलंगाना के बलविंदर सिंह ने सांसदों से खेल के बेहतर बुनियादी ढांचे और प्रतिस्पर्धी खेलों में भाग लेने के अवसरों को बढ़ाने की अपील की।

बच्चों द्वारा रखी गई मांगों के जवाब में,सद सदस्यों ने पंचायत, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर खेलों की अधिकाधिक सुलभ बनाने व सुविधाजनक माहैल बनाने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दुहराई।

ओडिशा से लोकसभा सांसद प्रताप चंद्र सारंगी ने कहा, ”बच्चों के प्रति समाज की जिम्मेदारी है। आलमारी में रखा बीज विकसित नहीं हो सकता, यदि उसे सही ढंग से बोया जाए, तो वह हजारों लोगों को आश्रय और फल देने वाला एक विशाल वृक्ष बन जाएगा। हमारे बच्चे संभावित दिग्गज हैं, और हमें उन्हें चमकने का हर मौका देना चाहिए।”

ओडिशा के राज्यसभा सांसद सुजीत कुमार बच्चों के दृढ़ संकल्प से प्रेरित थे और उन्होंने अपने निर्वाचन क्षेत्र के ग्रामीण क्षेत्रों में खेल सुविधाओं और बुनियादी ढांचे के लिए अपने सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास निधि (एमपीलैड) से 10 प्रतिशत खर्च करने का आश्वासन दिया । उन्होंने अन्य सांसदों को भी अपने निर्वाचन क्षेत्रों में खेलों में बच्चों की भागीदारी बढ़ाने के लिए एमपीलैड से धन देने के लिए प्रोत्साहित किया। इस दौरान सुजीत कुमार ने कोठारी आयोग की सिफारिशों की चर्चा की और कहा आयोग की सिफारिशों के मुताबिक शिक्षा पर वित्तीय व्यय को वर्तमान 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 6 प्रतिशत करने की बात कही गई थी, जिसे पूरा किये जाने की आवश्यकता है। साथ ही साथ उन्होंने बच्चों के मुद्दों को समर्पित संसद में एक विशेष सत्र आयोजित करने का प्रस्ताव रखा।

डॉ महुआ मांझी, सांसद राज्यसभा झारखंड, श्रीमती सुनीता दुग्गल, सांसद लोकसभा हरियाणा,सुनील सिंह, सांसद लोकसभा झारखंड, दिलीप सैकिया, सांसद लोकसभा असम और डॉ फौजिया खान सांसद राज्यसभा महाराष्ट्र ने भी बच्चों के समर्थन करने की दिशा में मुखर होकर अपनी बात रखी। इसके साथ ही खेल और बाल भागीदारी को बढ़ावा देने वाली नीतियों के बेहतर कार्यान्वयन की वकालत की।

इस अवसर पर बच्चों के एक समूह ने लैंगिक भूमिकाओं पर एक नाटक का प्रदर्शन किया जिसमें बच्चों की, विशेषकर लड़कियों की क्षमता को रेखांकित किया गया। नाटक के जरिए बच्चों को प्रोत्साहित करने की कोशिश की गई कि वे अपने अधिकारों के किसी भी उल्लंघन की रिपोर्ट करने के लिए 1098 चाइल्डलाइन तक पहुंचें।

यूनिसेफ इंडिया की प्रतिनिधि सिंथिया मैककैफ्री ने लिंग और समानता की बाधाओं को दूर करने के प्रति बच्चों की भावना की सराहना की। उन्होंने कहा, “हर बच्चा सम्मानित महसूस करने का हकदार है और उसे विशेष और संरक्षित होने का अधिकार है और हर बच्चे को सुने जाने का अधिकार है। मैककैफ्री ने कहा कि हम अपनी युवा पीढ़ी के दृष्टिकोण को बढ़ाने के लिए भारत के प्रयासों से उत्साहित हैं और हर बच्चे के लिए बेहतर भविष्य गढ़ने की दिशा में पीजीसी द्वारा किये जा रहे प्रयास व नेतृत्व के लिए धन्यवाद देते हैं। उन्होंने सभी निर्वाचित प्रतिनिधियों से बेहतर भविष्य के लिए सभी बच्चों को समान अवसर प्रदान करने के लिए हाथ मिलाने का अनुरोध किया।

उल्लेखनीय है कि एक ओर जहां भारत में 14 नवंबर को राष्ट्रीय बाल दिवस मनाया जाता है वहीं विश्व बाल दिवस 20 नवंबर को मनाया जाने वाला एक वार्षिक कार्यक्रम है, जो बाल अधिकारों पर कन्वेंशन यानी यूएनसीआरसी को प्रमुखता से उजागर करने के लिए आयोजित किया जाता है। उल्लेखनीय है कि यूएनसीआरसी की शुरूआत 33 साल पहले इसी दिन किया गया था। बाल संवाद का आयोजन पार्लियामेंटेरियन्स ग्रुप फॉर चिल्ड्रेन (पीजीसी) द्वारा किया जाता है और यह युवाओं को बच्चों के अधिकारों को बढ़ावा देने और उनकी रक्षा करने में उनका समर्थन लेने के लिए राजनीतिक नेताओं और विधायकों के साथ सीधे जुड़ने के लिए एक मंच प्रदान करता है। यह 14 नवंबर (राष्ट्रीय बाल दिवस) से शुरू होकर 20 नवंबर (विश्व बाल दिवस) को समाप्त होता है। इसी के अंर्तगत बच्चों के बेहतरी के लिए दुनिया भर में काम करने संस्था यूनिसेफ और सहयोगी भारत में बाल अधिकार सप्ताह के रूप में बच्चों के लिए गतिविधियों और कार्यक्रमों का आयोजित करते हैं जिसे पूरे सप्ताह अलग—अलग कार्यक्रमों के जरिए मनाया जाता है।

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