बिहार में पंचायत चुनाव की प्रक्रिया मार्च में शुरू होगी। जून के पहले सप्ताह तक चुनाव की सभी प्रक्रिया खत्म हो जाएगी। दस चरणों में पंचायत चुनाव कराने की तैयारी में राज्य निर्वाचन आयोग लगी है। मतदाता सूची तैयार की जा चुकी है। सभी छह पदों के लिए होने वाले चुनाव को लेकर आरक्षण का चक्रानुक्रम 29 जनवरी तक तय कर लिया जाएगा। बूथों का निर्धारण किया जा रहा है। पंचायत चुनाव की तैयारी को लेकर राज्य निर्वाचन आयुक्त अशोक कुमार चौहानन ने 4 जनवरी को सभी जिलों के डीएम व एसपी समेत तमाम वरीय अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक के बाद उन्होंने बताया कि एक सप्ताह के अंदर राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा चुनाव की तिथियों को निर्धारित करते हुए राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजा जाएगा। विधानसभा चुनाव समाप्त होते ही बिहार में पंचायत महाचुनाव की तैयारी आरंभ हो गई। नयी सरकार में पंचायती राज विभाग को पंचायत में नए सिरे से पदों के आरक्षण के प्रावधानों को लागू करना कानूनी जरूरत है। पंचायती राज अधिनियम 2006 के अनुसार दो चुनावों के बाद पंचायत के सभी पदों पर नए सिरे से आरक्षण लागू किया जाना है। राज्य निर्वाचन आयोग ने तीन माह पूर्व ही अधिनियम में इसके लिए सरकार के पास प्रस्ताव भेज दिया था। पंचायतों के मुखिया, वार्ड सदस्य, सरपंच, पंच, पंचायत समिति सदस्य, जिला परिषद सदस्य का सीधा चुनाव किया जाता है। इसके अलावा पंचायत प्रमुख और जिला परिषद अध्यक्ष चुने जाएगे। इन सभी पदों पर पचास प्रतिशत आरक्षण होना है। कुल पदों में पचास प्रतिशत महिलाओं के लिए आरक्षित होगी। पंचायत राज संस्थाओं के कुल दो लाख 59 हजार 214 पदों के लिए आरक्षण होना है। पंचायत चुनाव नियमावली-2006 की धारा 126 के तहत वर्तमान में तैयार विधानसभा चुनाव क्षेत्र की मतदाता सूची में ग्राम पंचायत के जिन लोगों के नाम होंगे,वे सभी पंचायत चुनाव के मतदाता होंगे।
आयोग के अनुसार पंचायतवार मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन 25 जनवरी 2016को होगा। मुद्रण का काम 31 जनवरी तक कर लिया जाएगा। मतदाता सूची की तैयारी को लेकर 23 नवंबर से लेकर 31 जनवरी तक विस्तृत कार्यक्रम तय कर लिया गया है। पंचायत चुनाव प्रत्येक पांच वर्ष पर कराना अब संवैधानिक बाध्यता है। पिछला पंचायत चुनाव 2011 में हुआ था। उसके बाद जनसंख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है। विभिन्न पदों पर आरक्षण का निर्धारण जनसंख्या के आधार पर किया जाना है। पंचायत के गठन के लिए यह व्यवस्था की गई है कि प्रति 500 की आबादी पर एक पंचायत सदस्य सीधे निर्वाचित हो। इसलिए पंचायतों के वार्ड सदस्यों की संख्या में घट-बढ़ होती रहती है। पंचायत के गठन के लिए यह व्यवस्था की गई है कि प्रति 500 की आबादी पर एक पंचायत सदस्य सीधे निर्वाचित हो। इसलिए पंचायतों के वार्ड सदस्यों की संख्या में घट-बढ़ होती रहती है। मालूम हो कि बिहार के 38 जिलों में कुल 8498 ग्राम पंचायतों हैं। इसबार पंचायत चुनाव में उम्मीदवारों के खर्च की अधिकतम सीमा में बढोतरी होगी। राज्य निर्वाचन आयोग को चुनाव खर्च की सीमा भी निर्धारित करना है। आयोग हर चरण में 53 पंचायतों में चुनाव करने के बारे में सोच रही है। आयोग को इन चुनावों में 12 से 13 लाख उम्मीदवारों के हिस्सा लेने का अनुमान है। उम्मीदवारों को नामाकंन के साथ घर में शौचालय होने की सूचना शपथपत्र देनी होगी। जिनके घर में शौचालय नहीं होगा, वे चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। आरक्षण के चक्रानुक्रम का अनुमोदन सबसे पहले खगडिया और लखीसराय के आरक्षण का अनुमोदन होगा। पंचायतों के लेकर मोटी समझ यह है कि जिस तरह केन्द्र और राज्य की सरकारें काम करती हैं उसी तरह गांव और नगर की सरकारें होनी चाहिए। वर्तमान सरकार ने पंचायती राज संस्थानों को मजबूत बनाने के लिए कई योजनाओं पर काम कर रही हैं, पर उनके कार्यान्वयन की गति बेहद मंथर है। विश्व बैंक बैंक की सहायता से संचालित बिहार पंचायत सुदृढ़ीकरण परियोजना चल रही है जिसकी कुल लागत 667 करोड़ रुपए हैं। परियोजना के तहत पंचायत स्तर पर कर्मचारियों की बहाली की जाएगी। पंचायती राज विभाग के प्रधान सचिव सुधीर कुमार राकेश के अनुसार बहाली का प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। बिहार पंचायत सुदृढ़ीकरण परियोजना के तहत इन कर्मियों की कांन्ट्रैक्ट पर बहाली होगी। इन्हें विभिन्न पदों पर तैनात किया जाएगा। विभागीय सूत्रों के अनुसार बिहार पंचायत सुदृढ़ीकरण परियोजना के लिए मंत्रीपरिषद द्वारा 710 पद स्वीकृत हैं। बिहार ग्राम स्वराज योजना सोसाइटी के तहत संचालित परियोजना के माध्यम से प्रखंड से राज्य स्तर तक 45 परियोजना प्रबंधकों की नियुक्ति की जा चुकी है। अभी 350 पदों पर बहाली के लिए विज्ञापन जारी कियाजाएगा। परियोजना के अंतर्गत मोटे तौर पर पंचायतों का प्रोफाइल बनाने का कार्य चल रहा है। अब तक परियोजना के तहत 12 जिलों के 10 प्रतिशत ग्राम पंचायतों की प्रोफाइल बनाने का कार्य अंतिम चरण में है। इस प्रोफाइल के आधार पर ग्राम पंचायतों में विकास योजनाओं का निर्माण एवं क्रियान्वयन किया जाएगा।
हालांकि पंचायती राज संस्थाओं के लिए साधन संपन्न कार्यालय भवन बनाने की चर्चा बहुत दिनों से चल रही है। पर बीते साल केवल 295 पंचायत भवनों का निर्माण किया जा सका। इनपर 251 करोड रुपए खर्च हुए। नवनिर्मित पंचायत भवनों का लोकार्पण करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पंचायतों को टैक्स लगाने का अधिकार देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इसके लिए नियमावली तैयार की जा रही है। अभी पंचायत भवनों के रखरखाव के लिए भी सरकार के अनुदान पर निर्भरता होती है। तेरहवें वित्त आयोग के समक्ष बिहार सकार ने पंचायत भवनों के लिए अलग से राशि देने की मांग की थी। उन भवनों में बैंकों की शाखाएं खोलने की मांग राज्य सरकार ने की है। राज्य सरकार ने निर्वाचित पंचायत प्रतिनिधि के असामयिक निधन पर उनके परिजनों को पांच लाख रुपए का अनुग्रह अनुदान देने का फैसला किया है। न्यास मित्रों, ग्राम कचहरी के सचिवों का मानदेय बढाया गया है। अन्य प्रतिनिधियों को मिलने वाले भत्ते में बढोतरी की गई है।
यद्यपि बिहार में पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव दलगत आधार पर नहीं लडे जाते। यह चुनाव पूरी तरह निर्दलीय होता है। पर विभिन्न राजनीतिक दलों के स्थानीय नेता और कार्यकर्ता उनमें हिस्सा जरूर लेते हैं। मौजूदा सरकार में लालू यादव की पार्टी के शामिल होने से पंचायतों को मजबूत करने में सरकार की घोषणाओं को लेकर संशय पैदा हो गया है। लालू यादव के कार्यंकाल में पुचायत चुनाव लंबे अरसे तक टलते गए थे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ही पुचायत चुनाव कराए जा सके। हालांकि पंचायत चुनावों को हर पांच साल पर निश्चित रूप से कराने का संवैधानिक प्रावधान काफी पहले हो गया था।
