मछलियों के मल से बनेगी खाद, सब्जियों के लिये होती है लाभदायक

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अक्षत सरोत्री

नई दिल्ली: कृषि विज्ञान किसानों के लिये बड़ी खुशखबरी लेकर आये हैं। अब किसानों को मछली पालन के लिए बड़े तालाब बनाने और सब्जियों के लिए भी अच्छी मिट्टी और रसायनिक खादों की चिंता नहीं करनी पड़ेगी।

एक्वापोनिक्स टेक्नोलॉजी की मदद से किसान मछली पालन और सब्जियों की खेती एक साथ कर सकेंगे। इस प्रक्रिया में मछलियों के मल से बनी मिट्टी वर्मी कंपोस्ट और नारियल के बुरादा से सब्जी का उत्पादन होगा।

कृषि विज्ञान केंद्र ने अपने परिसर में एक्वापोनिक्स टेक्नोलॉजी लगाई है। इसमें छह-छह मीटर के दो पीवीसी टैंक में मछली पालन किया जा रहा है। इसके साथ ही हाइड्रोपोनिक्स फार्मिंग से सब्जियों की खेती की जा रही है।

केवीके के वैज्ञानिकों के अनुसार परिसर में छह-छह सौ मीटर के दो पीवीसी टैंकों में मछली का पालन किया जा रहा है। इन टैंकों के पास ही बैगन की सब्जी की खेती भी की जा रही है। टैंकों में मछलियों के मल के पानी को सब्जियों में खाद के रूप में जोड़ा गया है।

मछली के मल में अमोनिया अधिक होता है, तो पहले इसका ट्रीटमेंट कर इसके प्रभाव को कम किया जाता है। इसके बाद वर्मी कंपोस्ट और नारियल बुरादा से भरे एक थैले में लगी सब्जियों में यह पानी छोड़ा जाता है। जिससे सब्जियों पर कीटों और घास का प्रभाव कम होता है।

वैज्ञानिकों के अनुसार लोग इस विधि का प्रयोग अपने घरों की छतों में भी कर सकते हैं और छतों पर मछली पालन के साथ सब्जियां उगा सकते हैं। मत्स्य वैज्ञानिक केंद्र के डॉ. एसके शर्मा ने बताया कि एक्वापोनिक्स टेक्नोलॉजी से किसान मछली पालन के साथ ही जैविक खेती भी कर मुनाफा कमा सकते हैं महज 200 मीटर के एरिया में यह टेक्नोलॉजी स्थापित हो सकती है।

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