
नयी दिल्लीः कोरोना से बचाव के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब देश की जनता को संबोधित करते हुए सोशल डिस्टेंसिंग की बात की और कहा ‘दो गज दूरी मास्क है जरूरी’। प्रधानमंत्री के इस आह्वाण के बाद लोग इस उधेर बुन में थे कि आखिर ये कैसे संभव हो पाएगा। इतनी विशाल जनसंख्या वाला देश भारत, बात-बेबात सामाजिकता वश एक दूसरे से हैलो-हाय और लिपटने चिपटने वाला हमारा युवा आखिर कैसे दो गज दूरी रख सकता है। और मुंह पर मास्क लगाना तो हमारी परंपरा थी ही नहीं। मास्क की उपलब्धता भी कम थी और आदत भी नहीं था। लोग सोचते कि आखिर मास्क लगा के कैसे बातचीत संभव हो पाएगा। बिना हैलो हाय के अभिवादन की परंपरा कैसे पूरी हो पायेगी। लेकिन कोरोना जैसी वैश्विक महामारी से बचना भी था और सामाजिकता भी निभानी थी। प्रधानमंत्री जी का आह्वाण था, विशेषज्ञों की राय थी और शुरूआती दौर में तो इस महामारी से बचाव के लिए हमारे पास टीका भी नहीं था। लोग उहापोह में पड़े हुए थे लेकिन ऐसे वक्त में भी उन्हीं परंपराओं ने हमे राह दिखाया। जिनके पास मास्क उपलब्ध हुआ वो तो मास्क के साथ ही कोरोना को हराने के जुगत में लग गये और प्रधानमंत्री जी ने यह भी कहा था कि नहीं मास्क है तो गमछा तो हमारे पोशाक में ही शामिल है।
जिसको जो उपलबध हुआ उसी के सहारे कोरोना के खिलाफ इस लड़ाई में जुट गया। बाकी हैलो हाय की परंपरा तो लोग अपने पुराने परंपराओं की तरफ लौटे और पीढ़ियों की परंपरा हमें यही सिखाती थी कि या तो बड़ों का चरण स्पर्श करना है और बराबर वालों को हाथ जोड़ कर प्रणाम या नमस्ते कहना है। कोरोना के कारण सोशल डिस्टेंसिंग का पालन भी करना था तो लोगों ने बड़ों ने बच्चों के जरिए चरण स्पर्श बजाए अभिवादन के लिए हाथ जोड़कर नमस्ते को ही स्वीकार कर लिया और यही इस पूरे कोरोना काल में न्यू नार्मल बन गया और लोग भारत की वर्षो पुरानी परंपरा को सराहते। क्या उत्तर, क्या दक्षिण, क्या पूरब, क्या पश्चिम सब जगह अभिवादन की हमारी परंपरा कोरोना काल में जीवंत हो उठी। यहां तक दुनिया के बड़े-बड़े राष्ट्राध्यक्ष की हाथ जोड़ कर नमस्ते करने की तस्वीर जब मीडिया के जरिए लोगों के समक्ष आई तो भारतीय इस बात के लिए प्रधानमंत्री के उस आह्वाण की दाद दिये बिना नहीं रह पाये जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था, ‘‘ दो गज दूरी, मास्क है जरूरी,’’ कोई राम राम कहता दिखा तो कोई दुआ सलाम करता तो कोई नमस्ते से काम चला रहा था।
लेकिन अचानक ये सब बदलाव आया हो ऐसा भी नहीं था। प्रधानमंत्री ने कहा तो स्वभाविक था कि देश की जनता अपने लोकप्रिय प्रधानमंत्री की कोरोना के खिलाफ इस लड़ाई में साथ देती। लेकिन अचानक सब कुछ हो गया हो ऐसा भी नहीं है। न सिर्फ सरकार के सरकार के स्तर पर बल्कि राष्ट्रीय गैरसरकारी संस्थायें और यूनिसेफ जैसी अंतरर्राष्ट्रीय संस्थाओं ने कोरोना के खिलाफ इस लड़ाई में सोशल डिस्टेंसिंग रूपी हथियार को और मारक बनाने के लिए काफी प्रचार प्रसार किया और उसी का परिणाम है कि मास्क न्यू नार्मल बन चुका है और नमस्ते की परंपरा जीवंत हो उठी है। इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए जनता को जागरूक करने के लिए यूनिसेफ के सहयोग से राष्ट्रीय चैनल दूरदर्शन के लिए एक सीरियल भी बनाया गया है, जिसे नाम दिया गया है, ‘दूर से नमस्ते’। और यूनिसेफ द्वारा किये गये इस जागरूकता पहल को दूर से नमस्ते को 14 अगस्त 2022 को डीडी नेशनल और यूट्यूब पर लॉन्च किया गया था।

क्या है मकसद
एडुटेनमेंट पहल दूर से नमस्ते को हास्य, नाटक और कॉमेडी के तौर पर डिजाईन किया गया है और इससे जुड़े विभिन्न पात्र कहानी के जरिए जनता से रूबरू होते हैं ताकी इसे आर्कषक बनाया जा सके। इस शो का मुख्य मंकसद स्वस्थ व्यवहार और इससे जुड़ी प्रथाओं को अपनाने को प्रोत्साहित करता है। इसके जरिए वैक्सीन हिचकिचाहट जुड़ कारणों को रेखांकित करते हुए वैक्सीन को बढ़ावा देना, और इस प्रक्रिया जारी रखने की आवश्यकता, पर बल देने के साथ ही वयस्कों के बीच मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों को उजागर करना और बच्चों के स्कूल लौटने पर उनका हौसला बढ़ाने और खेल-खेल में कोरोना के दौरान के व्यवहार के विषय में जागरूक करना है।

इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए यूनिसेफ ने मीडिया से जुड़े लोगों को ‘दूर से नमस्ते, ’ एडुटेनमेंट को लॉच करने और इस विषय पर विस्तार से चर्चा करने के लिए कार्यक्रम का आयोजन किया है जिसका उद्देश्य लोगों को इस नये एपिसोड के निर्माण प्रक्रिया और इसकी जरूरत से रूबरू कराना है। यूनिसेफ और यूएसएड के सौजन्य से तैयार किये गये इन सूचना परक एपिसोंडों पर अपना विचार साझा करने के लिए यूनिसेफ, यूएसएड के वक्ताओं और भागीदारों, के साथ ही स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय और सूचना और प्रसारण मंत्रालय के अधिकारी, दूरदर्शन और प्रसार भारती से जुड़े अधिकारी और इस ज्ञानव़़र्द्धक रोमांचक कहानियों के जरिए कोरोना के खिलाफ जंग में दूर से नमस्ते कह योगदान देने वाले प्रमुख कलाकारों और चालक दल के सदस्यों के अनुभवों को भी इसके लांच के दौरान सुनने का मौका मिलेगा। साथ ही साथ इस सीरियल का ट्रेलर यूट्यूब के जरिए रीलिज कर दिया गया है तो स्वाभविक तौर पर दर्शकों की प्रतिक्रियाओं से भी अवगत होने का मौका मिलेगा। साथ ही साथ दर्शकों की शुरुआती प्रतिक्रियाओं के साथ स्वास्थ्य संदेशों से जुड़ी मुख्य कहानी पर एक लघु फिल्म भी कार्यक्रम में दिखाई जाएगी, जिसका मकसद है एंटरटेनमेंट एजुकेशन का उपयोग करके भारत में सामाजिक और व्यवहार परिवर्तन को बढ़ावा देना। लांचिंग कार्यक्रम में उपलब्ध कलाकार, निर्देशक ‘दूर से नमस्ते’ पर काम करने के अपने अनुभवों के बारे में बात करेंगे, साथ ही मीडिया को भी उनसे सवाल पूछने का मौका मिल पायेगा और इसके जरिए इस कार्यक्रम को लोगों में लोकप्रिय बनाया जा सकता है।
इतना ही नहीं प्रसार भारती के सीईओं मयंक अग्रवाल व डीडी के अन्य अधिकारियों के साथ सुश्री रोली सिंह, एएसएमडी, एमओएचएफडब्ल्यू, यूनिसेफ प्रतिनिधि ;लाना प्रभारी अधिकारी के रूप में, और सुश्री वीना रेड्डी, यूएसएआईडी कंट्री रिप्रजेन्टेटिव की उपस्थिती भी होगी। देश की प्रतिनिधि भी उपस्थित होंगी। हीकलाकारों की उपस्थिती इस सीरियल के बारिकियों को समझाने में मददगार साबित होगी और मीडिया के जरिए जनता तक इसकी धमक होगी और नमस्ते की हमारी परंपरा दूर से नमस्ते में रेखांकित होगी क्योंकि कोरोना के खिलाफ हमारी लड़ाई खत्म नहीं हुई है।




