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चीनी का स्वाद इस साल कड़वा हो सकता है। गन्ने की कमी के कारण चीनी उत्पादन में काफी गिरावट आई है। सहकारी चीनी मिलों के संगठन नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज लिमिटेड एनएफसीएसएफ ने बताया है कि देश में चीनी उत्पादन के अनुमान को घटा दिया है। अब तक 16.13 फीसदी घटकर 2.37 करोड़ टन रह गया है। इस कारण सरकारी नीतियों के लिए चुनौतियां पैदा हो गई हैं। क्योंकि पहले बंपर चीनी उत्पादन का अनुमान लगाया गया था।
एनएफसीएसएफ के अनुसार चीनी उत्पादन चालू चीनी सीजन 2024-25 में भारत का कुल चीनी उत्पादन 259 लाख टन तक पहुंचने का अनुमान है। जो पिछले सत्र के 319 लाख टन के मुकाबले 18.81 फीसदी कम है। इससे पहले 265 लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान लगाया था। इसके अलावा उत्पादन में इस गिरावट का असर घरेलू बाजार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार के निर्यात पर दिखने वाला है। इन आंकड़ों को देखकर सरकार को अपनी नीतियों को दोबारा बदलना पड़ेगा।
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एनएफसीएसएफ ने चीनी उत्पादन के आंकड़ों में “अस्पष्टता” को लेकर चिंता जताते हुए कहा है, कि 2024-25 चीनी सीजन की शुरुआत से ही गन्ने की उपलब्धता और संभावित चीनी उत्पादन के अनुमानों में लगातार बदलाव देखा गया। चीनी उत्पादन के आंकड़ों में अस्पष्टता आज भी बनी हुई है। उद्योग के एक वर्ग ने केंद्र सरकार को 3.33 लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान पेश किया। जिसके आधार पर सरकार ने अपनी नीतियां बनानी शुरू की।
केंद्र सरकार ने जनवरी 2025 में प्रारंभिक उत्पादन अनुमान और उद्योग की मांग को देखते हुए 10 लाख टन चीनी के निर्यात की अनुमति दी थी। लेकिन तब से चीनी उत्पादन का अनुमान लगातार घटता जा रहा है। केंद्र सरकार ने प्रारंभिक उत्पादन अनुमान के आधार पर जनवरी 2025 में 10 लाख टन चीनी के निर्यात की अनुमति दी थी। लेकिन, अब वास्तविक उत्पादन के आंकड़े कम होने के कारण आपूर्ति-मांग में असंतुलन का सामना करना पड़ रहा है। एनएफसीएसएफ के आंकड़ों के अनुसार, भारत के सबसे बड़े चीनी उत्पादक राज्य महाराष्ट्र में उत्पादन चालू सत्र में 15 मार्च तक, भारत का चीनी उत्पादन 16.11 प्रतिशत घटकर 237.15 लाख टन रह गया है। जबकि एक साल पहले यह एक करोड़ टन था। देश के दूसरे सबसे बड़े उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में उत्पादन 88.5 लाख टन से घटकर 80.9 लाख टन रह गया। जबकि इसी अवधि में कर्नाटक का उत्पादन 49.5 लाख टन से 39.1 लाख टन रहा।

