
Mango: आम के बाग में मार्च के महीने में आम आना शुरू हो जाते हैं। आम के पेड़ों में बौर आने के बाद फल बनने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। इसी समय पेड़ों की खास देखभाल की जरूरत होती है। यह किसानों के लिए अच्छी बात है, क्योंकि आम की मंजर का सही समय पर आना अच्छी पैदावार की उम्मीदें बढ़ाता है। इसके अलावा इस समय एक बड़ी चिंता का विषय दहिया कीट का प्रकोप भी है। बिहार में आम की खेती के लिए यह कीट एक गंभीर समस्या बन गया है। और इसका प्रकोप पिछले कुछ वर्षों से लगातार देखा जा रहा है। आम की सफल खेती सुनिश्चित करने के लिए किसानों को समय रहते इस कीट का प्रभावी प्रबंधन करना जरूरी है। यदि यह कीट मंजर के साथ दिखने लगे, तो यह उत्पादन को नुकसान पहुंचा सकता है।
दहिया कीट की पहचान
दहिया कीट ये छोटे, सफेद रूई जैसे कीट होते हैं। जो पेड़ की कोमल शाखाओं, पत्तियों और मंजर पर तेजी से फैलते है। यह कीट पौधों का रस चूसकर उन्हें कमजोर बना देते हैं। जिससे फूलों का गिरना, कम फल लगना और उपज में भारी कमी आ सकती है। इनके स्रावित चिपचिपे पदार्थ से फफूंद (सूट मोल्ड) बढ़ता है। जो पत्तियों को काला कर देता है। और प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया में बाधा डालता है। यदि मंजर 4-5 इंच से छोटा है। और फूल पूरी तरह से नहीं खिले हैं।तो करें ये उपाय
जैविक नियंत्रण
नीम के तेल का छिड़काव करना 1 लीटर गुनगुने पानी में 1.5 चम्मच नीम का तेल और 1 चम्मच हल्का तरल साबुन मिलाकर छिड़काव करें। नीम का तेल प्राकृतिक रूप से कीटों को नियंत्रित करने में मददगार होता है। और पर्यावरण के लिए सुरक्षित है।
ये भी पढ़े…
करेले के खेती कैसे करें, जानें कौन सी किस्में देंगी उपज, होगी अधिक पैदावार
रासायनिक नियंत्रण
मंजर निकलने की प्रारंभिक अवस्था में डायमेथोएट 30 ई.सी. या क्विनाल्फोस 25 ई.सी. 1 से 5 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। इससे कीटों को प्रभावी रूप से नियंत्रित किया जा सकता है।
कल्चरल एवं यांत्रिक नियंत्रण
1. प्रभावित शाखाओं को काटकर नष्ट करें और बाग में साफ-सफाई बनाए रखें।
2. बागों की नियमित रूप से निगरानी करें। ताकि प्रारंभिक अवस्था में कीटों को पहचाना और नियंत्रित किया जा सके।
3. पेड़ों के तनों पर ग्रीस बैंड या पोलिथीन पट्टी लगाएं ताकि कीट ऊपर न चढ़ सकें।
4. चींटियों पर नियंत्रण रखें, क्योंकि ये कीटों को पेड़ों पर फैलाने में मदद करती हैं।
5. जैविक और समेकित कीट प्रबंधन (आईपीएम) तकनीकों का उपयोग करें।
6. पेड़ों को पर्याप्त पोषण दें ताकि वे कीटों के प्रति अधिक प्रतिरोधी बन सकें।
दहिया कीट आम की खेती के लिए एक गंभीर खतरा है। लेकिन समय पर उचित प्रबंधन से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। किसानों को सतर्क रहकर बागों का निरीक्षण करना चाहिए। और जैविक व रासायनिक उपायों को सही समय पर लागू करना चाहिए। ताकि आम की मंजर की सुरक्षा हो और अच्छी पैदावार प्राप्त की जा सके।


