
श्रीनगर: एक समय ऐसा भी था जब उत्तरी कश्मीर के बारामूला की तहसील सोपोर को मिनी पाकिस्तान कहा जाता था। यहां पर कई ऐसे मामले होते थे जैसे आतंकवाद को ही ले लिजिए जिसके कारण ना जाने कितने घर तबाह हो गये।
एक समय था तो कहते हैं कि सेना पर हमला सोपोर में आम बात होती थी। अब कश्मीर में चुनाव होने वाला है और धारा-370 हटने के बाद से ही कश्मीर में बड़ा बदलाव देखने को मिला है।
देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता के प्रति प्रतिबद्धता का प्रदर्शन करते हुए, सामाजिक कार्यकर्ता शेख मुनीर ने आज सोपोर में राष्ट्रीय ध्वज अभियान का नेतृत्व किया। जीडीसी सोपोर से शुरू होकर डाक बंगलो सोपोर में समाप्त होने वाले इस मार्च का उद्देश्य राष्ट्र के लिए प्रेम, शांति और समृद्धि की भावना को बढ़ावा देना था।
मुनीर की पहल ने तिरंगे के महत्व को रेखांकित किया और ‘एक राष्ट्र, एक ध्वज’ मंत्र का प्रचार किया। यह एक स्पष्ट संदेश था कि यह क्षेत्र शेष भारत के साथ एकजुट है।
यह कार्यक्रम उन लोगों को भी करारा जवाब था, जिन्होंने पहले अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद जम्मू और कश्मीर में राष्ट्रीय ध्वज को अपनाने के विचार को चुनौती दी थी। मुनीर ने जोर देकर कहा कि न केवल तिरंगे को स्वीकार किया गया है, बल्कि लोगों ने इसे पूरे दिल से अपनाया है।
कार्यकर्ता ने युवाओं, खासकर सोपोर के युवाओं पर पड़ रहे नकारात्मक प्रभाव पर चिंता व्यक्त की और उनसे समय की भावना के साथ तालमेल बिठाने और समाज में सकारात्मक योगदान देने का आग्रह किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मौजूदा दौर सभी के लिए अवसर प्रदान करता है।
