बांग्लादेश हिंसा के पीछे पाकिस्तान का हाथ, जानिये क्या है पूरा मामला

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अक्षत सरोत्री

नई दिल्ली: बांग्लादेश में स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री इस समय भारत में शरण लिये हुए है। बांग्लादेश में हिंसा का दौर अभी भी जारी है।

शेख हसीना के प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने और देश छोड़ने के बाद भी प्रदर्शनकारी सड़कों पर डटे हुए हैं। हालात इतने बदतर हो गए है कि देश में अल्पसंख्यकों के घरों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया जा रहा है। इसी को लेकर ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल बांग्लादेश ने अधिकारियों से हिंसा प्रभावित देश में अल्पसंख्यकों और सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आह्वान किया है।

यहां हिंसा में मरने वालों की संख्या बढ़कर 440 हो गई है। वहीं, राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने मंगलवार को संसद भंग कर दी और 84 वर्षीय नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस को आगामी अंतरिम सरकार का प्रमुख नियुक्त किया। वहीं, ढाका में समुदाय के दो नेताओं के अनुसार, कई हिंदू मंदिरों, घरों और व्यवसायों में तोड़फोड़ की गई है।

जानकारी के अनुसार भेदभाव के खिलाफ चल रहा आंदोलन इसलिए सफल रहा क्योंकि जाति, धर्म, वर्ग या पेशे की परवाह किए बिना आम लोगों की सहज भागीदारी रही।

जिन छात्रों को हम उनकी धार्मिक पहचान के कारण अल्पसंख्यक कह रहे हैं, वे आंदोलन में शामिल हो गए! वे शहीद हुए और घायल हुए! हम उनके परिवारों का सामना कैसे करेंगे?

बांग्लादेश में सरकार गिराने को लेकर खुफिया विभाग की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है। इसके पीछे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई का हाथ बताया जा रहा है। खुफिया रिपोर्ट में ये बात सामने आ रही है कि बांग्लादेश की स्थिति के पीछे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई का हाथ है। पाकिस्तान ने हिंसा भड़काने के लिए छात्र शिविर नामक संगठन का इस्तेमाल किया है। ये छात्र शिविर संगठन बांग्लादेश में प्रतिबंधित जमात-ए-इस्लामी का ही एक हिस्सा है।

एक रिपोर्ट के अनुसार बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के कार्यवाहक प्रमुख खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान की सांठगांठ के सबूत बांग्लादेश के अधिकारियों के पास भी थे। जानकारी मिली कि बांग्लादेश में ऑपरेशन की रूपरेखा लंदन में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी के साथ मिलाकर बनाई गई थी। योजना का ब्लूप्रिंट तैयार करने के बाद बांग्लादेश में अंजाम दिया गया।

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