प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के तहत हरेक सांसद को एक गांव गोद लेनी है, लेकिन भाजपा सांसद रविन्द्र कुमार सिन्हा ने राजधानी में ही गांव खोज लिया है। जहां मूलभूत सुविधाओं के पुख्ता प्रबंध है। जी हां, सांसद ने जिस गांव का चयन किया है उसका नाम है मैनपुरा।
अशोक राजपथ के किनारे और शहर के संपन्न इलाके पाटलिपुत्र कालनी से सटे इस गांव में बहुमंजिली इमारतों की भरमार है। पंचायत चारो ओर से पटना नगरनिगम की सीमा से घिरा है। राज्य सरकार ने 2007 में इसे पटना नगर निगम में शामिल करने की फैसला किया था, लेकिन यह काम अभी तक नहीं हो सका है। रविन्द्र कुमार सिन्हा ने इस गांव को गोद लेने का कारण बताया कि गांव के एक तरफ तो बहुमंजिली इमारतो से विकास के नमूने देखने को मिलते हैं, तो वहीं दूसरी ओर झुग्गी-झोपडी में भी रहने के लिए लोग मजबूर हैं। लोगों को स्वच्छ पानी नहीं मिलता। गंदगी का अंबार है। शौचालय की कमी है। हांलाकि आदर्श ग्राम योजना के तहत जो काम कराए जाने हैं, उनमें कई सुविधाएं ऐसी भी हैं जो मैनपुरा में उपलब्ध नहीं है। भाजपा सांसद सीपी ठाकुर ने फुलवारी शरीफ प्रखंड के गोणपुरा पंचायत को गोद लिया है। इसकी सूचना के बाद गांव वाले आशान्वित है किअब कायाकल्प हो जाएगा। भूमिहार व यादव बहुल इस गांव की आबादी 10 हजार 333 है, जिसमें 30 प्रतिशत महादलित और 10 प्रतिशत मुस्लिम भी है। राजधानी के 15 किलोमीटर और पटना एम्स से महज तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह गांव बुनियादी सुविधाओं से काफी दूर है। एक राजकीय बुनियादी विद्यालय है, लेकिन पूरे स्कूल में एक बेच नहीं है। आंगनबाडी केन्द्र है, पर खस्ताहाल है। अस्पताल भी है, पर वर्षो से कोई डाक्टर साहेब नहीं आए। पेयजल के लिए सरकारी मोटर लगा है जो आपरेटर की मनमानी से चलती है। सिंचाई के लिए चार वर्ष पहले बोरिंग तो लगा पर आजतक चालू नहीं हुआ। इसी पंचायत के गोरियाडीह गांव में सांसद रामकृपाल यादव की ससुराल है,शायद सरकारी योजनाएं आती जरूर हैं फिर सरकारी आदतों की शिकार होजाती हैं।
इतना ही नहीं आठ सांसदो ने पटना और उसके आसपास ही आदर्श गांव तलाश लिये हैं, जिसमें तीन केंद्रीय मंत्री भी शामिल हैं। शत्रुध्न सिन्हा विधिपुर नरौली, धर्मेंद प्रधान दानापुर स्थित लखानी बिगहा,रविशंकर प्रसाद फतुहां ब्लॉक में अदावलपुर गांव, रामकृपाल यादव धनौड़ा ब्लॉक के सोनमाई गांव, जदयू के राज्यसभा सांसद अनवर अली ने फुलवाड़ी ब्लॉक के नोहसा पंचायत को आदर्श गांव के रूप में अपनाया है।
राजधानी से सटे दो आदर्श गांवों की हालत जानने के बाद पूरे प्रदेश के सांसद आदर्श गांवों का जायजा लेना रोचक है। बिहार में इस योजना के तहत 53 गांव चिन्हित किए गए हैं जिन्हें 2.016 तक मॉडल गांव बनने का लक्ष्य है। उसके बाद के तीन वर्षों में हर सांसद दो-दो गांव को आदर्श ग्राम के तौर पर विकसित करेंगे। हालांकि किसी भी सांसद ने अपने गोद लिए गांव के लिए अब तक कोई राशि नहीं दी है। न ही केन्द्र सरकार की तरफ से कोई रकम मिली है। योजना का संचालन राज्य के ग्रामीण विकास विभाग द्वारा कियाजाना है। विभाग का मानना है कि जब तक अलग से राषि का इंतजाम नहीं होता, इन गांवों के लिए कोई योजना नहीं बन सकती। हालांकि योजना के लिए केन्द्र सरकार ने जो गाइडलाइन जारी किए हैं, उनके अनुसार प्रदेष में केन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं में से ही चयनितगांवों का विकास किया जाना है। अतिरिक्त संसाधन के लिए कारपोरेट सेक्टर से संपर्क करना है, लेकिन राज्य में बड़े उद्योग के नहीं रहने के कारण कारपोरेट सेक्टर की यहां मौजूदगी भी नगण्य है। केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री चोधरी वीरेन्द्र सिंह से मिलने के बाद राज्य के ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने बताया कि केन्द्र सरकार अगले वित्त वर्ष में गाइडलाइन में कुछ संशोधन कर सकती है। ऐसे राज्य जहां उद्योग नहीं हैं, उन्हें इस योजना के क्रियान्वयन के लिए केन्द्र सरकार अलग से राशि दे सकती है। पर ग्रामीण विकास के लिए जो योजनाएं पहले से चल रही हैं, उनका संक्रेन्द्रण इन गांवों में क्यों नहीं हो पाया? इसका जबाब एक सूचना से मिलता है। इसके तेज कार्यान्वयन के लिए अफसरों और तकनीकी कर्मियों को ट्रेनिंग देने की तैयारी मार्च में हुई। हालांकि अलग वेबसाइट बनाने और आदर्श ग्राम के बारे में सूचनाएं अपडेट करने का काम कतई नहीं हुआ है।
राज्य में इस योजना की धीमी प्रगति पर केन्द्र सरकार ने गहरा अफसोस जताया। चयनित पंचायतों में जागरूकता बढ़ाने, माहौल तैयार करने और सामाजिक एकजुटता से संबंधित रिपोर्ट केन्द्र को अब तक नहीं भेजी गई है। काफी दबाव पर सिर्फ 17 जिलों से रिपोर्ट भेजी जा सकी। चयनित ग्राम पंचायत से रिपोर्ट नहीं भेजी जाने पर केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने क्षोभ जताया। इसी प्रकार सभी सांसदों के बारे में ब्योरे अपलोड नहीं किया जा सका है। जानकारी के अनुसार अभी कई गांवों में बेसलाइन सर्वे भी संपन्न नहीं हुआ है। सचिव प्रदीप कुमार ने 31 मार्च तक सभी जिलाधिकारियों को सांसद आदर्श ग्राम से जुडे सभी बुनियादी कार्य अनिवार्य रूप से संपन्न करने की हिदायत दी है।
