संतोष कुमार सिंह/नीरज प्रताप सिंह
नयी दिल्ली: पूर्वाचल सहित देश के बड़े हिस्से में लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। बाढ़ में जान माल का नुकसान तो होता ही है, लेकिन इसके साथ ही प्रभावित ईलाकों में सबसे बड़ी समस्या होती है शौच की। हालांकि सरकार ने लक्ष्य रखा है कि इस देश को खुले में शौच मुक्त करना है। सरकार के स्तर पर प्रयास किये जा रहे हैं, अब काम होगा तो चैंपियन भी होंगे। और चैंपियन होंगे तो उनका सम्मान भी होगा। तो देश के ऐसे ही स्वच्छता चैंपियनों अर्थात जिलाधिकारियों को सम्मानित किया देश के सबसे बड़े चैंपियन और यूनिसेफ के स्वच्छता दूत यानी स्वच्छ भारत अंबास्डर सचिन तेंदूलकर ने।
मौका था केंद्रीय पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय और यूनिसेफ द्वारा आयोजित स्व्च्छ भारत के चैंपियन रहे जिलाधिकारियों को सम्मानित करने के साथ ही संवाद का। इस बैठक में 22 राज्यों के स्वच्छ भारत के चैंपियन रहे जिलाधिकारियों ने शिरकत की जिन्होंने अपने जिलों में ग्रामीण स्वच्छता के क्षेत्र में बड़ा काम किया है और अपने जिलों को खुले में शौच मुक्त बनाने में अहम योगदान दिया है। सचिन तेंदूलकर ने न सिर्फ इन स्वच्छता के लिए काम कर रहे अधिकारियों को सम्मानित किया बल्कि कहा कि देश को खुले मुक्ति के इस सफर में वे भी खुद को इस दल का हिस्सा मानते हैं। उन्होंने कहा कि या तो आप अपने देश को प्यार करते हैं या नहीं करते। यदि आप सही मायने में देश को प्यार करते हैं तो आप एक आम नागरिक की तरह भी बहुत कुछ कर सकते हैं, अपने देश को गंदगी से मुक्त कर सकते हैं। यदि प्रत्येक व्यक्ति यह ठान ले कि उसे अपने देश को साफ रखना है और वह प्रत्येक वर्ष में केवल एक घंटा समय इस काम के लिए दे तो हमारे पास एक बिलियन से भी ज्यादा घंटे प्रत्येक वर्ष साफ सफाई के लिए होंगे।
मास्टर ब्लास्टर ने क्रिकेट फिल्ड में अपने अनुभवों के जरिए अधिकारियों को उनके बेहतर काम के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि जब हम दृढ़ निश्चय के साथ और कड़ी मेहनत के साथ लक्ष्य की ओर आगे बढ़ते हैं तो करोड़ों लोगों का साथ मिलता है उनकी दुआयें मिलती हैं। पूरा देश आपके साथ है और आप स्वचछ भारत बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
लेकिन जब हाकिम हुक्काम सरकारी कार्यक्रमों में सम्मानित किये जा रहे हों तो बेहतर यह भी होता है कि जरा जमीनी हकिकत की पड़ताल की जाये। क्योंकि इस भीषण बाढ़ के मौके पर शौच की समस्या और भी विकराल रूप में सामने आती है। कई तरह के बीमारियों के साथ ही असुरक्षा को भी जन्म देती है।
क्या है जमीनी हकिकत
2 अक्टूबर 2014 को हमारे प्रधानमंत्री जी ने स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत की। बड़े जोर शोर से इस अभियान को पूरे देश में शुरू किया गया। कई एनजीओ और स्वयं सेवी संस्थाओं ने इसमे बढ़ चढ़ के हिस्सा लिया । इसी योजना के तहत शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में शौचालय बनाने का अभियान शुरू हुआ ।इसे आप एक अच्छा कदम कह सकते थे। आशा यही की गई अब खुले में शौच से मुक्ति मिलेगी । कई राज्य सरकारों ने तो इसे पंचायत चुनाव से जोड़ दिया कि जिसके घर में शौचालय नहीं ,वो इलेक्शन नहीं लड़ पायेगा।
युद्ध स्तर पे शौचालय का निर्माण शुरू हुए। लेकिन ग्रामीण इलाके में जो ये निर्माण हुए, उनमे से आधे से अधिक वो हाथी के दांत ही साबित हुए। जैसे तैसे, कच्ची पक्की दीवार बना के कहने को तो शौचालय बना दिया गया। वो आम दिनों में काम भी कर रहे थे ।
लेकिन अभी देश के कुछ हिस्सों में जो भयानक बाढ़ आयी, उसने इस शौचालय अभियान की पोल खोल के रख दी। अधिकांश शौचालय मलवे के ढेर में बदल गये। जिसकी दीवाल खड़ी भी रही उसकी टंकी जबाब दे गयी ,अभी बाढ़ पीड़ित लोगों के पास शौच की सबसे बड़ी समस्या आ पड़ी है ,कहाँ जाएँ ,कोई भी जगह तो नहीं बचा है जहाँ पानी नहीं है ,अधिकांश जगहों पे सड़क या तो रेल लाइन, लेकिन कहीं कही तो सड़क भी नहीं बचा है, उसके ऊपर से भी पानी बह रहा है, कई लोग तो पेड़ या अपने खुले छत को ही शौचालय के रूप में प्रयोग कर रहे है ।क्या करें मज़बूरी है।
जरूरी है कि अब शौचालय बनाते समय अब क्षेत्रों को भी ध्यान में रखना होगा, जैसे बाढ़ प्रभावित क्षेत्र, सूखा प्रभावित क्षेत्र आदि आदि,क्योंकि इन बाढ़ पीड़ित क्षेत्रो में तो अब फिर से एक नये सिरे से शौचालय बनाना होगा तभी ये योजना आगे प्रभावी रूप से सफल हो सकता है।



