बदलते मौसम में मत्सय पालक बरतें जरूरी सावधानी

0
644

पंचायत खबर टोली
मऊ : ग्रामीण इलाकों में मत्सय पालन आमदनी का महत्वपूर्ण जरिया होता है। लेकिन बढ़ते ठंढ़ में मछली पालकों को कई तरह की परेशानियां होती है। विशेष रूप से जनवरी माह मत्स्य पालकों के लिए अति महत्वपूर्ण होता है। बदलते मौसम के साथ इन दिनों जलाशय के प्रबधंन के लिहाज से भी यह सबसे खास महीना होता है। इस दौरान मत्स्य पालकों को जल के प्रबंधन के साथ संपूरक आहार के प्रति जागरुकता बरतनी हाेती हैं। दूसरी ओर जलाशय में निरंतर जाल चलाकर चुना का छिड़काव करना भी अावश्यक होता है। इस समय की लापरवाही आगामी महीनों में उत्पादन को प्रभावित करेगी।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ
जिले के सहायक मत्स्य विकास अधिकारी संतोष कुमार चौबे का कहना है कि ठंड के मौसम में मछलियों की वृद्धि कम होती है। जल में चक्रमण कम होने से उनकी वृद्धि के साथ जल की गुणवत्ता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। घने कोहरे के बीच अक्सर आक्सीजन की कमी हो जाती है। ऐसे में  इसकी कमी के कारण ठंड में मछलियां मर कर उपर आ जाती हैं।
बरतें ये सावधानी
मौसम परिवर्तन के बीच मत्स्य पालकों काे जलाशय और मछलियों को प्रति विशेष सर्तकता बरतने की जरूरत होती है। पहले जलाशय में जाल चलाने के साथ आवश्यकतानुसार चूना का छिड़काव करना चाहिए। ​यदि जल ​ स्थिर होने लगे तो नियमित रूप से तालाब में जल डालते रहना चाहिए। मछलियों को संपूरक आहार के रूप में सरसों की खली आदि आहार के रूप में लगातार नियमित मात्रा में प्रयाेग करते रहना चाहिए। आहार में मत्स्य पालकों को टेट्रासिन की दो गोली तोड़कर अवश्य डाल देना चाहिए। इससे बदलते मौसम में उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है।

आहार के लिए करें हरे चारे का प्रबंध
विशेषज्ञों की राय है कि इस मौसम में हरे चारे के रूप के बरसीम का प्रयोग आहार के रूप में मछलियों के लिए अवश्य करना चाहिए। उनकी पत्तियों के साथ डंठल और उस पर उगे शैवाल मछलियों की वृद्धि में आशातीत प्रभाव डालते हैं। संपूरक आहर के साथ हरा चारा का प्रयोग करने से ठंड के मौसम की रूकी वृद्धि भर जाती है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here