
Dehradun: उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित सीमांत गांव माणा के पास ऊंचाई वाले क्षेत्र में हिमस्खलन के कारण बर्फ में 57 मजदूर दब गए। सूबे के उंचाई वाले क्षेत्रों में हो रही भारी बर्फबारी के बीच फंसे सीमा सड़क संगठन के लिए काम कर रहे थे। इन 57 मजदूरों में से 33 को सुरक्षित निकाल लिया गया है। प्रदेश के आपदा प्रबंधन विभाग ने बताया की शाम 5 बजे तक बद्रीनाथ धाम से 6 किलोमीटर आगे हिमस्खलन में फंसे 32 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। जबकि शेष बचे 24 अन्य को निकालने की कार्रवाई चल रही है।
इसके अलावा ध्रुवीय मरुस्थल में फंसे मजदूरों को सुरक्षित बचाने के लिए मौसम खुलते ही माणा में बचाव अभियान रेस्क्यू शुरू कर दिया है। ज्योतिर्मठ से पहला हेलीकॉप्टर कुछ जवानों को लेकर रवाना हुआ। साथ ही सुबह भारतीय सेना ने 14 और लोगों को बचाया है। कुछ को गंभीर चोटें आई है। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। आठ मजदूरों की तलाश अभी जारी है।
राहत की बात यह है कि अभी तक किसी के मारे गए होने की सूचना नहीं है। उम्मीद की जा रही है। कि बाकी फंसे मजदूरों को भी सुरक्षित बाहर निकाल लिया जाएगा। बताया जा रहा है। बाकी मजदूर एक कंटेनर में हैं। जो पूरी तरह से बर्फ से ढक चुका है।
आस पास के सभी प्रमुख अस्पताल अलर्ट कर दिए है
इसके अलावा चमोली के डीएम संदीप तिवारी व एसपी सर्वेश पंवार भी घटनास्थल के लिए रवाना हो चुके हैं। वे जोशीमठ पहुंच चुके हैं। इसी के साथ देहरादून के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी मोर्चा संभाल लिया है। एम्स समेत सभी प्रमुख अस्पतालों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। एम्स की हेलीकॉप्टर एंबुलेंस भी तैयार है। रेस्क्यू अभियान को और ज्यादा प्रभावी बनाने में हवाई अभियान अहम भूमिका निभा सकता है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह ने कहा कि राज्य सरकार केंद्र सरकार के संपर्क में है। इसके अलावा प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और रक्षा मंत्री कार्यालय के संपर्क में हैं। उन्होंने कहा कि रेस्क्यू अभियान में किसी भी एजेंसी की आवश्यकता होने पर उनकी मदद ली जाएगी। माणा हेलीपैड को एक्टिवेट करने का निर्देश दिया गया। हालांकि बारिश और बर्फबारी जारी है। कई जगह पर मार्ग अवरुद्ध हो रहा है। इससे बचाव कार्य चुनौतीपूर्ण बना है।
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सीएम ने यह भी कहा कि सभी रेस्क्यू दल आपस में समन्वय के साथ कार्य कर रहें हैं। उन्होंने कहा कि माणा हेलिपैड को भी एक्टिव किया जा रहा है। इसके साथ ही एम्स ऋषिकेश, श्रीनगर मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल गोपेश्वर में भी सभी तैयारी पूरी कर ली गई हैं। लगातार राहत बचाव का कार्य जारी है। इसी के साथ आईटीबीपी, सेना, जिला प्रशासन, वायु सेना, सभी लोग बचाव कार्य में लगे हैं। सभी से निरंतर बातचीत जारी है। इस संबंध में स्नो एक्सपर्ट की सेवाएं ली जा रही हैं।
भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के लोग घटना स्थल पर विशेष रूप से कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा हमारी पहली प्राथमिकता श्रमिकों को सुरक्षित निकलना है। सभी लोग अलग अलग स्थानों से हैं। जिसके लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया जा रहा है। इसके अलावा आईजी एसडीआरएफ रिद्धिम अग्रवाल ने बताया कि एसडीआरएफ के जवान रवाना कर दिए गए हैं। इसके साथ ही ड्रोन की एक टीम तैयार की है। जिससे वहां के हालात की जानकारी मिलती रहे। और उनकी लोकेशन का पता चल सके। जिला प्रशासन के स्तर से आपदा प्रबंधन विभाग के ड्रोन के साथ ही निजी ड्रोन की सेवाएं ली जा रही हैं। वायुसेना के लोगों से वार्ता हो गई है। उन्होंने बताया की हमारा प्रयास है कि मजदूर भाइयों को जल्द से जल्द सुरक्षित बाहर निकाला जाए। पीएमओ, गृह मंत्री, रक्षा मंत्री लगातार संपर्क में हैं।





