वर्षा वर्मा
नई दिल्ली: किसान आंदोलन 2.0 पिछले 10 महीनों से चल रहा है। एसकेएम (गैर राजनीतिक) और केएमएम किसान संगठनों और लोगों को आंदोलन से जोड़ने में लगे हुए हैं। भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) ने भी आंदोलन के समर्थन में बयान दिया है तो वहीं कई दल अभी भी आंदोलन के तरीकों को लेकर इसके पूर्ण समर्थन में नहीं दिख रहे हैं। ये मतभेद अब उभरकर सामने आ रहे हैं। भारतीय किसान यूनियन (एकता-उग्राहां) के अध्यक्ष जोगिंदर सिंह उग्राहां ने आंदोलन को लेकर बयान दिया है। उन्होंने आंदोलन के तरीके को लेकर कई सवाल उठाते हुए इसकी योजना और क्रियान्वन को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि हम पहले आंदोलन (2020-2021) में लड़ाई जीत चुके हैं। प्रधानमंत्री ने सार्वजनिक रूप से गलती के लिए माफी मांग चुके हैं। अब दोबारा आंदोलन की जरूरत नहीं है। किसान संगठनों को रणनीति बदलने की जरूरत है और उन्हें एकजुट रहना चाहिए और जरूरतमंदों का साथ देना चाहिए। वहीं आंदोलन का अराजनीतिक बना रहना जरूरी है।
पंढेर के पत्र में गंभीरता नहीं
संगठन ने किसान नेता सरवन सिंह पंढेर की ओर से जारी किए गए पत्र को लेकर कहा कि उसमें गंभीरता वाली कोई बात नहीं है। और अचानक से समर्थन मांगा गया है। वह पत्र भी उनके पास सोशल मीडिया के जरिए पहुंचा। हालांकि उग्राहां की ओर से किसानों की मांगो को लेकर शंभू और खनौरी बॉर्डर पर विरोध प्रदर्शन को समर्थन जारी रहेगा।
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डल्लेवाल से अनशन खत्म करने का आग्रह
इससे पहले किसान नेता रुल्दू सिंह मानसा ने अन्य किसान संगठनों को विश्वास में लिए बिना आंदोलन शुरू करने की बात कहते हुए डल्लेवाल और पंढेर की आलोचना की थी। वहीं उन्होंने डल्लेवाल से आमरण अनशन खत्म करने का आग्रह भी किया है। एक और किसान नेता हरिंदर सिंह लखोवाल ने भी पंढेर के पत्र को सोशल मीडिया पर जारी किए जाने को लेकर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि एसकेएम-ऑल इंडिया अपने कार्यक्रम के तहत 23 दिसंबर को पूरे पंजाब में डिप्टी कमिश्नर कार्यालयों के बाहर विरोध प्रदर्शन करेगा। इसके अगले दिन 24 दिसंबर को एक बैठक आयोजित की जाएगी।
कांग्रेस भी किसानों के समर्थन में उतरी
वहीं किसानों की मांगों को लेकर कांग्रेस भी केंद्र सरकार पर हमलावर है। वहीं, कई नेताओं ने डल्लेवाल के स्वास्थ्य को लेकर चिंता जाहिर की है। कांग्रेस नेता बजरंग पूनिया, विनेश फोगाट शंभू और खनौरी बॉर्डर पर पहुंचकर किसानों की मांगों के समर्थन में दिखाई दिए हैं। वहीं हरियाणा के पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा भी किसानों की मांगों को लेकर सरकार पर हमलावर दिखाई दे रहे हैं।

